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कांग्रेस में अजब-गजब सियासत, न तुम हारे, न हम जीते

Tue, 24 Jul 2018 05:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 24 Jul 2018 05:58 PM IST
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uttarakhand congress politics
harish rawat

कांग्रेस भवन ने सोमवार को जोर आजमाइश की सियासत के दो रूप देखे। दिन में प्रीतम-इंदिरा का सिक्का चला तो शाम को हरीश रावत का जादू। इन स्थितियों के बीच गुटबाजी के अजब-गजब रंग भी दिखे। जो चेहरे दिन के उजाले में भी नहीं दिखे, वह शाम को खूब चमके। कांग्रेस के सियासी मैदान में कभी कोई दिग्गज जीतता दिखा, तो कभी कोई प्रभावी। जीत के इस अहसास के बीच में ही कहीं हार का स्वाद भी छिपा रहा। कुल मिलाकर कांग्रेस की अंदरुनी सियासत में दिग्गजों का जो हाल उभरा, उसमें लब्बोलुआब ये ही रहा-न तुम हारे, न हम जीते।

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सबसे पहले बात प्रीतम-इंदिरा की। हरीश रावत और उनके चहेते लोगों को लगभग चिढ़ाते हुए कांग्रेस में शूरवीर सिंह सजवाण की एंट्री हो गई। प्रीतम-इंदिरा की जोड़ी के नाम यह तीसरा मामला रहा, जिसमें हरीश रावत या उनके करीबियों को असहज करने वाले नेता की कांग्रेस में जगह बनी। पहले हेम लाल आर्या, फिर राजेश्वर पैन्यूली और अब शूरवीर सिंह सजवाण। सजवाण की घर वापसी न होने देने के लिए दबाव भी बने, लेकिन चली प्रीतम-इंदिरा की ही। हालांकि प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह भी उनके पक्ष में पहले दिन से थे। इस लिहाज से देखें, तो प्रीतम-इंदिरा ने सजवाण के रूप में हरीश खेमे के कट्टर दुश्मन को पार्टी का हिस्सा बनाकर बड़ी सियासी जीत हासिल की है। इस पर ये जोड़ी जाहिर तौर पर खुशी मना रही है तो हरीश खेमा असहज है।
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अब बात, हरीश रावत खेमे को उत्साहित करने वाली। जिस तरह से राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद कांग्रेस भवन में हरीश रावत की एंट्री हुई, वह बताता है कि कांग्रेस के सबसे बडे़ ‘जननेता’ फिलहाल वे ही हैं। उनके लिए उनके समर्थकों में खास क्रेज देखने को मिला। पार्टी प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह के स्वागत का जिम्मा प्रीतम-इंदिरा खेमे के ऊपर ही था, लेकिन यदि शाम को हरीश रावत के खैरमकदम से उसकी तुलना की जाए तो बहुत बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है। हरीश रावत की टीम ने जिस खूबसूरती से शाम को माहौल बनाया, वह प्रीतम-इंदिरा खेमे को असहज करने के लिए काफी है।
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कांग्रेस की सियासत के दिग्गज भले ही औपचारिक भाषणों में एक-दूसरे का महिमा मंडन करते दिखे, लेकिन गुटबाजी की एक प्रभावी लकीर कांग्रेस भवन में साफ तौर पर दिखी। प्रभारी के स्वागत के लिए तमाम नेताओं के कदम कांग्रेस भवन की तरफ नहीं बढे़, लेकिन शाम को हरीश रावत के स्वागत के लिए उन्हें लालायित जरूर देखा गया। गुटबाजी और जोर आजमाइश की इस सियासत को हालांकि प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह ने अपनी आंखों से नहीं देखा। इसकी वजह ये रही कि वह शाम को कांग्रेस भवन आए ही नहीं। हालांकि बीजापुर रेस्ट हाउस के उनके कक्ष में वे सारी सूचनाएं पहुंचीं, जो कांग्रेस की राजनीति के स्याह पक्ष से जुड़ी मानी जा सकती हैं।

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