आखिर घरवाली ने ही संभाली मुख्यमंत्री की सीट
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पहले हरीश रावत की ना, फिर आलाकमान की ना और हरिद्वार पर जिस हैवीवेट को उतारने की तैयारी थी उसकी ना के बाद हरिद्वार सीट रेणुका रावत को मिल गई। मुख्यमंत्री हरीश रावत की सीट को उनकी घरवाली संभालेंगी।
पहले से तय नामों में पौड़ी संसदीय सीट पर मंत्री हरक सिंह रावत और टिहरी सीट पर साकेत बहुगुणा कांग्रेस के उम्मीदवार होंगे।
दावा करने को नहीं कहा
कांग्रेस की जिन तीनों सीटों पर नामों की घोषणा हुई है तीनों की ओर से ना हो चुकी है। हरीश रावत ने अपने बयानों में बार-बार दोहराया कि पार्टी परिवार से उम्मीदवार हो जाए तो बेहतर है।
उन्होंने कहा कि मैंने परिवार से हमेशा सेवा करने को कहा है दावा करने को नहीं। अंतिम समय में पार्टी को भी लगा कि रावत का प्रतिनिधित्व उनके घर में रहे।
हरक सिंह भी न करने वाले उम्मीदवार
पौड़ी सीट के उम्मीदवार डा. हरक सिंह रावत भी ना करने वाले उम्मीदवार हैं। हरक सिंह ने एक बार नहीं बल्कि दो बार ना की है।
सतपाल महाराज के पार्टी छोड़ने से पहले चुनाव ना लड़ने पर हरक सिंह चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। जब दबाव बना तो इंकार कर दिया।
फिर उम्मीदवार के तौर पर गंभीर सिंह नेगी का नाम चला लेकिन विरोध के चलते पार्टी को ना करनी पड़ी। मजबूरन हरक सिंह को अपनी ना को हां में बदलना पड़ा।
पिता की न पर बेटे को मिली टिहरी सीट
टिहरी पर भी उम्मीदवारी ना से शुरू हुई थी। पार्टी यहां से विजय बहुगुणा को लड़ाना चाह रही थी लेकिन बहुगुणा अंत समय तक ना करते रहे।
इतना ही नहीं कुछ समय पहले बहुगुणा ने यहां तक कहा था कि ना तो वह और ना ही उनके परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ेगा। इस सीट पर भी ना-नुकुर के बाद उनके बेटे साकेत बहुगुणा को प्रत्याशी घोषित किया गया है।
गढ़वाल की तीन संसदीय सीटों पर कांग्रेस की 11वीं सूची में अंतिम फैसला हो सका। इन तीनों सीटों की वजह से ही बार-बार मामला उलझता रहा जिसके चलते कुमाऊं की दो सीटों नैनीताल और अल्मोड़ा पर वर्तमान सांसदों की घोषणा कर पार्टी नेताओं ने कुछ दबाव कम किया था।