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दो राज्यों में जीत के बाद अब उत्तराखंड के CM खेलने वाले हैं बड़ा दांव, तय की रणनीति

Mon, 18 Dec 2017 09:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 18 Dec 2017 09:40 PM IST
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 uttarakhand cm trivendra prepare for nikay chunav after himachal election

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जीत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी बड़ा दांव खेलने वाले हैं। सियासी जानकारों की मानें तो इस जीत से उनकी कार्यशैली को लेकर दबी जुबां में उठ रहे विरोध के सुर ठंडे पड़ेंगे, लेकिन इसी के साथ अब त्रिवेंद्र पर सुशासन देने की जवाबदेही बढ़ जाएगी।

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ऐसे में वे नगर निकाय चुनाव में कड़ी मेहनत करने वाले हैं। उनका पूरा फोकस ही इस पर रहेगा। अहम बात यह भी है कि उनके सियासी और प्रशासनिक कौशल का पहला टेस्ट अप्रैल में संभावित निकाय चुनाव में होगा, जिसमें पार्टी का प्रदर्शन सरकार की कार्यप्रणाली का पैमाना बनेगा।
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दो राज्यों में विधानसभा चुनाव घोषित होने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में तमाम तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। खासकर गुजरात को लेकर कहा जा रहा था कि यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला होगा।
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ऐसे में अपने गृह जनपद में हार की स्थिति पर केंद्रीय नेतृत्व पर सवाल खड़े होने लाजमी थे। इन परिस्थितियों में त्रिवेंद्र रावत के कामकाज के तौर-तरीकों को लेकर कुछ एक मंत्री और विधायकों के बीच भी अंदरखाने में पनप रहे रोष के भी सतह पर आने की संभावना जताई जा रही थी।

उपलब्धियां भी लानी होंगी सामने

 uttarakhand cm trivendra prepare for nikay chunav after himachal election

मगर भाजपा की जीत से सबके मंसूबों पर पानी फिर गया। शाह कैंप से आने वाले त्रिवेंद्र रावत को ताजा जीत से मजबूती तो मिलेगी, साथ ही विरोध के स्वर धीमे पड़ेंगे। हालांकि इसी के साथ त्रिवेंद्र को खुद को साबित करने के लिए सत्ता संचालन के मानदंडों में और निखार भी लाना होगा।

राज्य में अप्रैल के महीने में होने वाले निकाय चुनाव इस बाबत पहला लिटमस टेस्ट होगा, जिसमें खरा उतरना बेहद अहम है। प्रदेश की राजधानी देहरादून में महापौर के लिए कांग्रेस पार्टी की ओर से पूर्व कैबिनेट मंत्री और तीन बार के विधायक रहे दिनेश अग्रवाल को अगर उतारा गया तो सीएम की चुनौती बढ़नी तय है।

उपलब्धियां भी लानी होंगी सामने
निकाय चुनाव के ठीक पहले त्रिवेंद्र सरकार को एक साल का वक्त भी पूरा हो जाएगा। ऐसे में उन्हें साल भर की उपलब्धियां भी सामने रखनी होंगी। इसमें राज्य में 13 पर्यटन स्थलों को विकसित करने, कंडी मार्ग को विकसित करने, किसानों की आय दोगुनी करने, पहाड़ों पर चिकित्सा सुविधाओं की बेहतरी, गांवों में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने, कनवेंशन सेंटर विकसित करने, कैंसर अस्पताल बनाने समेत तमाम घोषणाओं की धरातल पर लाने चुनौती है।

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