एक ही चाल से मोदी सरकार ने उत्तराखंड सरकार को किया चित्त
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्टिंग मामले में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत की जिद का सलीके से जवाब दिया। हरीश जिद पकड़े थे कि फारेंसिक जांच से पहले अफसर पर कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन केंद्र ने शाहिद की प्रतिनियुक्ति रद्द कर उन्हें वापस बुला लिया।
केंद्र ने संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार ही कदम उठाए। पहले गुजरात सरकार ने शाहिद की उत्तराखंड प्रतिनियुक्ति के लिए दी गई एनओसी वापस लेने का पत्र दिल्ली भेजा और फिर केंद्र ने एक ही चाल में हरीश को मात दे दी। भारतीय प्रशासनिक सेवा देश के संविधान से गवर्न होती है। हर आईएएस पर उसके मूल कैडर का ही नियंत्रण होता है।
इसलिए मोहम्मद शाहिद पर गुजरात सरकार का ही एकाधिकार है। 22 जुलाई को जब शाहिद के कथित स्टिंग की खबर प्रसारित हुई तो उस दिन हरीश रावत पशोपेश में थे। कार्रवाई करते तो आरोप की पुष्टि हो जाती। इसीलिए केंद्र को पटखनी देने के लिए शाहिद के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई को खारिज कर दिया।
इसके बाद सरकार व कांग्रेस दोनों ने मान लिया कि अब कुछ नहीं बिगड़ेगा। लेकिन यहीं से हाथ आई बाजी फिलसने लगी। यदि कार्रवाई की होती तो शाहिद की प्रतिनियुक्ति भी रद्द न होती। इसी बीच केंद्र व गुजरात के बीच का संवाद का स्तर बढ़ गया।
24 जुलाई को गुजरात सरकार ने एक पत्र केंद्र को भेजा और कहा कि उनके कैडर के 1998 बैच के आईएएस मोहम्मद शाहिद उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति पर है, इसके लिए केंद्र को गुजरात द्वारा दी गई एनओसी वापस ली जाती है।
25 जुलाई को केंद्र सरकार ने पीएमओ व डीओपीटी को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति की बैठक बुलाकर शाहिद का उत्तराखंड प्रतिनियुक्ति का आदेश निरस्त कर दिया।
हालांकि शनिवार को केंद्रीय कार्यालयों में अवकाश होता है, लेकिन इसी दिन बैठक हुई और इसी दिन शाम को डीओपीटी ने उत्तराखंड सरकार को आदेश भेज दिया। अब शाहिद डीओपीटी में जाकर ज्वाइनिंग देंगे और उसके बाद केंद्र सरकार ही तय करेगी कि उन्हें क्या करना है।
चिंतित हो उठी राज्य सरकार
शाहिद को दिल्ली वापस बुलाने से हरीश सरकार में चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही है। क्योंकि अभी तक तो केंद्र सरकार शाहिद के खिलाफ कुछ नहीं कर सकती थी, लेकिन अब शाहिद के बहाने हरीश पर कई निशाने साधे जा सकते हैं।
यदि केंद्र की मंशा केवल शाहिद को उत्तराखंड से हटाने की होती तो उन्हें गुजरात भेजा जाता, मगर ऐसा नहीं हुआ। उन्हें केंद्र में ज्वाइन करने को कहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि केंद्र चाहेगा तो इसी प्रकरण के बहाने अब शाहिद को माध्यम बनाकर हरीश पर शिकंजा कसा जा सकता है।
शाहिद की प्रतिनियुक्ति निरस्त
उत्तराखंड सीएम के सचिव के कथित स्टिंग आपरेशन को लेकर केंद्र ने राज्य को झटका दिया है। स्टिंग के बाद पीएम की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने शाहिद की उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति को निरस्त कर दिया है। मुख्य सचिव को भेजे आदेश में कहा गया है कि शाहिद को तत्काल कार्यमुक्त करें।
शाहिद उत्तराखंड में आने से पहले जहां तैनात थे, वहीं वापसी करेंगे। यह पहला मामला है कि राज्य में तैनात किसी आईएएस की प्रतिनियुक्ति को केंद्र ने निरस्त कर दिया है। चार दिन चले स्टिंग के बवाल से राज्य की हरीश सरकार अभी उबरी भी नहीं थी कि आज केंद्र ने मोहम्मद शाहिद की उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति को ही निरस्त कर दिया।
केंद्र के इस कदम से राज्य सरकार असहज दिख रही है और कार्यमुक्त करने की फाइल बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री का अनुमोदन होते ही शाहिद को केंद्र के लिए कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। शाहिद 1998 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस हैं और वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के समय से ही हरीश रावत के साथ हैं।
इसके बाद जब हरीश राज्य के मुख्यमंत्री बने तो शाहिद उनके सचिव बनकर उत्तराखंड आए थे। 22 जुलाई को शाहिद के कथित स्टिंग आपरेशन सामने आने के बाद केंद्र ने उनकी प्रतिनियुक्ति रद्द कर पुराने तैनाती स्थल पर ज्वाइन करने के आदेश दिया है।
केंद्र में बुलाया गया
स्टिंग के मामले में केंद्र का यह कदम एक नया गेम माना जा रहा है। क्योंकि शाहिद राज्य में तैनाती के दौरान केंद्र के नियंत्रण में नहीं थे, इसलिए उनकी प्रतिनियुक्ति निरस्त कर केंद्र वापस बुलाया गया है। जिससे राज्य में हरीश सरकार पर दबाव बनाया जा सके। अभी सीधे उन्हें केंद्र में डीओपीटी के सचिव को जाकर रिपोर्ट करनी होगी।
केंद्र सरकार की चिट्ठी आज दोपहर में ही मिली है। मैंने प्रमुख सचिव कार्मिक को फाइल तैयार कर मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिया है। अंतिम निर्णय सीएम करेंगे।
- एन रविशंकर, मुख्य सचिव