उत्तराखंड से हुआ 'अन्याय' तो सीएम ने लिखा पीएम को पत्र
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उत्तराखंड के पॉवर प्रोजेक्ट को लेकर राज्य ने केंद्र से अपने रुख में बदलाव के साथ इससे जुड़ी अन्य विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर विचार करने को कहा है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधामनंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी बात कही है।
जिसमें सुप्रीम कोर्ट में जलविद्युत परियोजनाओं की स्थिति के बारे में केंद्र के स्पष्टीकरण में एक्सपर्ट ग्रुप के अलावा अन्य स्वतंत्र एजेंसियों के वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित अध्ययन और रिपोर्ट भी शामिल करने का अनुरोध किया है।
सीएम के मीडिया प्रभारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि अपने पत्र में सीएम ने कहा है कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने राज्य की जलविद्युत परियोजनाओं के मुद्दे पर अन्यायपूर्ण रुख अपनाया है। इससे राज्य के सभी महत्वपूर्ण हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट रुक सकते हैं। जिसका देश की ऊर्जा सुरक्षा पर भी विपरीत प्रभाव पड़ना तय है।
अतिरिक्त समय का अनुरोध
मुख्यमंत्री ने लिखा है कि 13 अगस्त 2013 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को 3 माह में जलविद्युत परियोजनाओं के पर्यावरण पर अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। 16 माह बीत जाने पर भी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने एक्सपर्ट ग्रुप को अध्ययन के लिए 12 माह का अतिरिक्त समय का अनुरोध किया है।
सीएम ने कहना है कि कथित एक्सपर्ट ग्रुप के गठन में उत्तराखंड सरकार से कोई सलाह नहीं ली गई। एक्सपर्ट ग्रुप की रिपोर्ट पूरी तरह से एकपक्षीय व निराधार तथ्यों पर आधारित है। इसी वजह से दो स्वतंत्र निकायों, केंद्रीय जल आयोग व केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने इसकी रिपोर्ट खारिज कर स्वयं को ग्रुप से अलग कर लिया था। उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी स्वतंत्र रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
सीएम ने हिमालयी राज्यों के लिए एक जैसी नीति अपनाने को कहा है। सीएम ने अन्य विशेषज्ञ ग्रुप सीडब्ल्यूसी, सीईए, एमओब्ल्यूआर, जीएसआई, वाडिया इंस्टीट्यूट, आईआईटी के अध्ययन व रिपोर्टों को भी महत्व देने की बात कही है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश अलकनंदा व भागीरथी पर 24 परियोजनाओं के लिए थे लिहाजा अन्य परियोजनाओं को इससे बाहर रखा जाना चाहिए।