'उत्तराखंड के पूर्व CM यूपी में मंत्री भी नहीं बन पाते'
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड अब तक आठ मुख्यमंत्री देख चुका है, उत्तर प्रदेश में होते तो इनमें से कई मंत्री भी न बन पाते। राज्य ने हमें क्या दिया और हमने उसके लिए क्या किया, इसके मूल्यांकन की जरूरत है।
पटवारी पद से रिटायर होने वाले यहां एडीएम बन गए तो क्लर्क संयुक्त सचिव। नगर निगम सभागार में प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से आयोजित सेवानिवृत्त शिक्षकों के विदाई समारोह में मुख्यमंत्री ने यह बात कही।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के लिए बनने वाली नीति में शिक्षकों को प्रतिनिधित्व देने और कक्षा एक से आठवीं तक के लिए पूर्व की भांति शैक्षिक सत्र जुलाई से किए जाने की घोषणा की। सीएम ने कहा कि जूनियर हाईस्कूल से हाईस्कूल के रूप में उच्चीकृत स्कूलों को अलग संचालित करने का निर्देश वे दे चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों को समाज की जरूरत के अनुसार काम करना होगा। कहा कि दूसरे राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में शिक्षकों को अधिक वेतन और सुविधाएं दी गई हैं। विकास कार्यों के आधार पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड तीन-चार जिलों का प्रदेश बनकर रह गया है। समारोह में प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री दिग्विजय चौहान ने शिक्षक संगठन का 11 सूत्री मांग पत्र प्रस्तुत किया।
अधिकारियों की गलती से देर से पहुंचे सीएम
71 शिक्षक सम्मानित
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पूर्व अपर शिक्षा निदेशक एनएस राणा, सामाजिक कार्यकर्ता मोहन खत्री, शिक्षिका गीता जोशी सहित सेवानिवृत्त हुए 71 शिक्षक, शिक्षिकाओं को सम्मानित किया। समारोह में विधायक हीरा सिंह बिष्ट, ललित फरर्स्वाण, प्रभुलाल बहुगुणा, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र कृषाली, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अनंत सोलंकी आदि मौजूद थे।
मुख्यमंत्री को समारोह में सुबह 11 बजे पहुंचना था, लेकिन वे शाम तीन बजे पहुंच पाए। देरी के लिए उन्होंने अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि अधिकारियों ने एक समय पर दो जगह कार्यक्रम लगा दिए।
परीक्षा परिणाम सुधरेगा तो पांच मांगें मान लूंगा
दुर्गम में कार्यरत शिक्षकों को डाक्टरों की तरह प्रोत्साहन भत्ता देने की मांग को मुख्यमंत्री ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह तो सभी कर्मचारी पहाड़ में नौकरी पर भत्ता मांगने लगेंगे। सीएम ने कहा कि परीक्षाफल में 15 से 20 फीसदी का सुधार हुआ तो वे शिक्षकों की 11 में से पांच मांगे मान लेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक प्रवक्ता, आईएएस और पीसीएस अधिकारी के बराबर वेतन पा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डाक्टर मिल नहीं रहे हैं, यह राष्ट्रीय समस्या है। इसीलिए जो अन्य राज्यों ने किया वहीं हमने किया। उन्होंने कहा कि विकास कुछ ही जिलों में सिमटकर रह गया है। इसीलिए कोई पहाड़ पर जाने को तैयार नहीं है। यही हाल रहा तो उत्तराखंड का विघटन हो जाएगा। सीएम ने कहा कि दुर्घटना के बाद यह उनका दूसरा जन्म है। वे मान चुके हैं कि यह जीवन 2017 तक है।