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CM साहब 600 करोड़ रुपये पर अब तक पर्दा क्यों?

Thu, 14 Jan 2016 12:07 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 14 Jan 2016 12:07 PM IST
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uttarakhand cm do not know about reconstruction package.

डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत, वित्त और नियोजन विभाग के आला अफसरों ने पुनर्निर्माण पैकेज का हिसाब तो साफ किया पर इससे वित्त, नियोजन आदि विभागों की काहिली भी सामने आ गई।

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सितंबर 2013 से जिस बाह्य सहायतित परियोजनाओं के पुनर्निर्माण पैकेज को प्रदेश सरकार 3737.34 करोड़ का मान कर चल रही थी, वह बुधवार की मशक्कत के बाद 3014 करोड़ रुपये का निकला। देर रात सूचना विभाग ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि केंद्र ने पहले 3737.34 करोड़ रुपये का पैकेज स्वीकार किया था, लेकिन अंतिम रूप से 3014 करोड़ रुपये का पैकेज स्वीकार किया गया।
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तीन जनवरी को मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने यह पैकेज 3737.34 करोड़ रुपये का ही बताया था। आखिर बुधवार को मुख्यमंत्री ने वित्त और नियोजन विभाग को ऐसी कौन सी जादू की झप्पी दी कि अधिकारी एकदम सही आंकड़ा लेकर उनके सामने आ गए।
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जून 2013 की आपदा के बाद प्रदेश सरकार ने केंद्र को 13844.44 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन केंद्र को भेजा था। केंद्र में उस समय यूपीए की सरकार थी। नुकसान को देखते हुए उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन उत्तराखंड का गठन किया गया था। अगस्त 2013 में केंद्र ने प्रदेश के प्रस्ताव को खारिज किया।

सितंबर 2013 में प्रदेश की ओर से सितंबर 2013 में केंद्र को फिर से प्रस्ताव भेजा गया, जिसे कमेटी ने स्वीकार कर लिया। जून 2013 की आपदा की ऑडिट रिपोर्ट में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने वित्तीय व्यवस्थाओं की समीक्षा में साफ कहा है कि केंद्र ने 7981.04 करोड़ रुपये का पुनर्निर्माण पैकेज स्वीकार किया है। कैग को यह जानकारी प्रदेश के आपदा प्रबंधन विभाग ने दी।

तीन स्तर पर सामने आई जानकारी में मुख्य अंतर बाह्य सहायतित परियोजनाओं के पुनर्निर्माण पैकेज में है। मुख्यमंत्री के स्तर से पूर्व में और कैग को दी गई जानकारी में यह पैकेज 3737.34 करोड़ रुपये का था। अब यह 3104 करोड़ रुपये का है। यह अंतर करीब 600 करोड़ रुपये का है।

कैग के बार-बार के आग्रह के बाद भी सितंबर 2013 को केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव का विवरण उपलब्ध न कराना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। देर रात सूचना विभाग की ओर से जारी प्रेस बयान में स्पष्ट किया गया कि पहले बाह्य सहायतित योजनाओं का पैकेज 3737.34 करोड़ का था, पर अंतिम रूप से 3104 करोड़ रुपये का पैकेज स्वीकार किया गया।


बाह्य सहायतित परियोजनाएं

विश्व बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक आदि की फंडिंग वाली योजनाओं को बाह्य सहायतित परियोजनाएं (एक्सटरनल ऐडिड प्रोजेक्ट) कहा जा सकता है। इन योजनाओं में विशेष राज्य होने के कारण राज्य को कुल लागत का केवल दस प्रतिशत वहन करना होता है।

कैग की टिप्पणी
सितंबर 2013 को केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव का विवरण अनुरोध केबावजूद भी लेखापरीक्षा को उपलब्ध नहीं कराया गया।

कैग की अनुशंसा
- विभाग को सुनिश्चित करना चाहिए कि आपदा के लेखों के लिए उचित प्रणाली विद्यमान हो और जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण उसका पालन करें।
- संबंधित जिलों को विभिन्न स्रोतों से प्राप्त निधियों से संबंधित प्राप्ति एवं भुगतान विवरण का अलग से रखरखाव किया जाना चाहिए।

जो मुख्यमंत्री ने पहले बताया
विशेष योजनागत सहायता 1100.00
केंद्र पोषित योजनाएं 1884.92
बाह्य सहायतित योजनाएं 3737.34
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ 1207.87
नॉन प्लान 0050.00
कुल 7980.13

जो कैग को बताया गया
विशेष योजनागत सहायता 1100.00
केंद्रपोषित योजनाएं 1885.80
बाह्य सहायतित योजनाएं 3737.34
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ 1207.87
नॉन प्लान 0050.00
कुल 7981.04

जिसका आकलन अब किया गया
विशेष योजनागत सहायता 1100.00
केंद्रपोषित योजनाएं 1884.92
बाह्य सहायतित योजनाएं 3104.00
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ 1207.87
सेंटर प्लान 0050.00
पीएम राहत कोष 154.11
कुल 7500.90

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