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उत्तराखंड: चमोली, पिथौरागढ़ और नैनीताल में बाल लिंगानुपात में गिरावट, तीनों जिलों में मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश

Mon, 04 Jan 2021 11:10 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 04 Jan 2021 11:10 PM IST
सार

  • मुख्य सचिव ने तीनों जिलों में मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश दिए
  • गर्भवती महिलाओं की पहली, दूसरी व तीसरी जांच अनिवार्य रूप से कराने को कहा

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Uttarakhand: Child sex ratio decline in Chamoli, Pithoragarh and Nainital District
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के चमोली, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिले में बाल लिंगानुपात में पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने तीनों जिलों में मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गर्भवती महिलाओं की पहली, दूसरी व तीसरी जांच अनिवार्य रूप से कराने को कहा है।

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राज्य में जन्म के समय लिंगानुपात में तो सुधार है, लेकिन तीन जिलों में गिरावट दर्ज हुई है। वर्ष 2018-19 में प्रति हजार बालकों की तुलना में 938 बालिकाओं ने जन्म लिया था, जो बढ़कर अब 949 हो गया है। राज्य के पांच जिले बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, देहरादून और उत्तरकाशी देश के टॉप 50 जिलों में शामिल हैं। वहीं, लिंगानुपात सुधार में उत्तराखंड देश के टॉप टेन राज्यों में शुमार है। लेकिन चमोली (864), पिथौरागढ़ (887) और नैनीताल (906) का रिकार्ड खराब है। तीनों जिलों में 2018-19 की तुलना में लिंगानुपात गिरा है।
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सोमवार को सचिवालय में महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में इस पर चिंता जाहिर की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तीनों जिलों पर फोकस करते हुए गहन मॉनिटरिंग की जाए।
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उन्होंने मदर चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम में सक्रिय भागीदारी निभाने, गर्भवती महिलाओं की तीनों जांच कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दूसरी तिमाही जांच बहुत ही महतत्वपूर्ण होती है, ऐसे समयावधि में गर्भपात होना अथवा जांच न कराया जाना संदिग्ध होता है। यदि गर्भपात हुआ है तो इसके कारणों की भी जांच की जानी चाहिए। बैठक में सचिव एल फैनई व अपर सचिव एचसी सेमवाल भी उपस्थित थे।

प्रोएक्टिव होकर काम करना होगा

मुख्य सचिव ने कहा कि लिंगानुपात में सुधार के लिए प्रोएक्टिव होकर काम करना होगा। इससे संबंधित सभी विभागों को आपस में समन्वय बनाकर कार्य करना होगा। उन्होंने महिलाओं में आयरन की कमी एवं कुपोषण के साथ ही, मातृ मृत्यु दर को कम किए जाने के लिए लगातार प्रयास करने की बात कही। उन्होंने वन स्टॉप सेंटर को और अधिक सक्रिय करने के भी निर्देश दिए। कहा कि वन स्टॉप सेंटर में पंजीकृत केसों में से कितनों में चार्जशीट दाखिल हुई, कितनों में सजा हुई, इसका भी ब्योरा दिया जाना चाहिए। 

बालिकाओं के ड्राप आउट के कारण जानें, निदान करें
मुख्य सचिव ने कहा कि ड्रॉप आउट बालिकाओं के ड्रॉप आउट करने के कारणों को जानकर उनके निराकरण के प्रयास किए जाने चाहिए। ड्रॉप आउट करने वाले बच्चों में अधिकतर प्रवासी और मजदूरों के बच्चे होते हैं, ऐसे में उनके लिए नोन-फार्मल एजुकेशन पर विचार किया जा सकता है।

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