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Uttarakhand: मुख्य सचिव सख्त...अब कैबिनेट के लिए हड़बड़ी में आए प्रस्तावों पर नहीं होगा विचार

Sun, 22 Jun 2025 06:54 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 22 Jun 2025 06:54 PM IST
सार

पत्र में कहा है कि विभिन्न प्रशासकीय विभाग मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तावों और टिप्पणियों को प्रस्तुत करते समय नियमों व दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

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Uttarakhand Chief Secretary is strict now hasty proposals for the cabinet will not be considered
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश सरकार के कई विभाग मंत्रिमंडल की बैठकों में प्रस्तुत किए जाने वाले प्रस्ताव बनाने के लिए तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। विभागों की इस लापरवाही पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन बेहद सख्त है। उन्होंने साफ कर दिया है कि हड़बड़ी में आए प्रस्तावों पर मंत्रिपरिषद विचार नहीं करेगा। सभी प्रशासकीय विभागों को निर्देश दे दिए गए हैं कि उनके उन्हीं प्रस्तावों पर विचार होगा, जो मंत्रिमंडल की बैठक से सात दिन पहले सभी औपचारिकताएं पूरी करके मंत्रिपरिषद विभाग को प्राप्त होंगे।

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इस संबंध में मुख्य सचिव ने सभी प्रमुख सचिवों और सचिवों को पत्र निर्देश जारी किए हैं। पत्र में कहा है कि विभिन्न प्रशासकीय विभाग मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तावों और टिप्पणियों को प्रस्तुत करते समय नियमों व दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए हैं। सीएस ने कहा है कि विभाग भविष्य में मंत्रिमंडल की बैठक से कम से कम सात दिन पहले प्रस्ताव मंत्रिपरिषद को उपलब्ध करा दें और यह सुनिश्चित कर लें कि उपलब्ध कराए गए प्रस्ताव पर परामर्शी विभाग वित्त, कार्मिक एवं न्याय की राय तथा विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त होना चाहिए।
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यदि किसी प्रस्ताव के कैबिनेट बैठक में प्रस्तुत करने की अपरिहार्यता होगी तो प्रशासकीय विभाग प्रस्ताव पर इसका अनिवार्य रूप से उल्लेख करेगा। सीएस ने मंत्रिमंडल के लिए प्रस्ताव ई मंत्रिमंडल पोर्टल के माध्यम से मंत्रिपरिषद विभाग को ऑनलाइन भेजने के भी निर्देश दिए। उन्होंने साफ किया कि प्रस्ताव प्रस्तुत करने के मामले में देरी और असुविधा के लिए प्रशासकीय विभाग जिम्मेदार होगा।
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जिस दिन कैबिनेट, उसी दिन प्रस्ताव
मुख्य सचिव के पत्र के मुताबिक, अधिकांश विभाग मंत्रिमंडल की बैठक से ठीक पूर्व उसी दिन अथवा बैठक के दौरान बिना परामर्शी विभागों की सहमति और सलाह प्राप्त किए प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रस्ताव देरी से प्राप्त होने के कारण उनका ठीक से परीक्षण किया जाना संभव नहीं हो पाता है। इससे प्रस्तावों को मंत्रिमंडल के समक्ष रखे जाने के लिए मुख्यमंत्री से स्वीकृति प्राप्त होने में कठिनाई होती है।

सीएम और मंत्री भी जता चुके हैं आपत्ति
बैठक से ठीक पहले हड़बड़ी में प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने पर मुख्यमंत्री और मंत्री तक कई बार आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। बैठक में जाने से पहले उन्हें कुछ प्रस्तावों के बारे में जानकारी तक नहीं होती, जिससे इन पर फैसला लेने में दुविधा होती है। मुख्य सचिव ने अपने पत्र में सीएम और मंत्रियों की आपत्ति का जिक्र किया है।

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