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चारधाम : मौसम, खराब रास्ते सबसे बड़ी चुनौती
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 17 Apr 2015 11:34 AM IST
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आज कल केदारनाथ में दोपहर का तापमान लगभग 3 डिग्री सेल्सियस के आसपास है। वहीं बदरीनाथ में थोड़ा ज्यादा अर्थात छह डिग्री के आसपास। गंगोत्री और यमुनोत्री में भी दिन का पारा लगभग 3 डिग्री के पास ही है।
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इन धामों में रात के तापमान का अनुमान लगाया जा सकता है। बहुधा शून्य से नीचे चला जाता है। चारधाम यात्रा शुरू होने में लगभग एक हफ्ते ही बाकी हैं। तपते मैदानी भागों से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए मौसम बड़ी चुनौती के रूप में सामने आने वाला है।
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खुद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत कहते हैं कि उनकी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इंद्रदेव साबित हो रहे हैं। यह भी तय है कि बदहाल, जोखिम भरे पहाड़ी रास्ते और सहूलियतों की कमी भी तीर्थयात्रियों की आस्था की परीक्षा लेगी। चारों धामों का हाल जानते चलें।
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केदारनाथ धाम
2013 जून की आपदा में केदारनाथ क्षेत्र ने भीषण तबाही झेली थी। मंदिर छोड़कर बाकी सब तहस-नहस हो गया था। रामबाड़ा जैसे पड़ावों का नामोनिशान मिटने के साथ ही कई इलाकों के भूगोल ही बदल गए थे। इस बार चारधाम यात्रा की तैयारियों में उत्तराखंड सरकार का सबसे ज्यादा फोकस भी केदारनाथ में ही है।
केदारनाथ में काफी काम भी हुआ है। यहां निम (राष्ट्रीय नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, उत्तरकाशी) की टीम लगभग साल भर से काम में जुटी है। मंदिर क्षेत्र के आसपास का इलाका साफ कर लिया गया है। रास्ते भी बना लिए गए हैं। बिजली-पानी जैसी सहूलियतें भी धाम क्षेत्र में पहुंचाने का दावा किया गया है। लेकिन आए दिन की बारिश और बर्फबारी रोज अड़ंगे डाल रही है।
केदारनाथ धाम के आसपास तो काम हुआ है पर इसके मार्गों पर बहुत काम बाकी है। आलम यह है कि अभी तक रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाया है। रुद्रप्रयाग से अगस्त्यमुनि के बीच कई स्थानों पर मार्ग अब भी बदहाल है।
सेमी गांव के निकट भी सड़क भू-धंसाव के कारण बदहाल है। सबसे बुरी स्थिति सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच पांच किमी क्षेत्र में है, जहां आपदा के बाद से बड़े वाहनों का आवागमन शुरू नहीं हो पाया है। रोज होती बारिश से यहां पूरा मार्ग फिसलनभरा हो रखा है, जिस पर छोटे वाहन फंस रहे हैं।
बदरीधाम
26 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने हैं। धाम क्षेत्र में छह से आठ फीट तक की बर्फ संशय पैदा कर रही है। मौसम पल-पल रंग बदल रहा है। लगभग रोज ही बर्फबारी हो रही है। लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र का डर सता रहा है। बारिश होते ही हाईवे बंद हो रहा है।
बदरीनाथ हाईवे पर बेसब्र वाहन चालकों के चलते आए दिन घंट जाम से सवारियों और पैदल राहगीरों को जूझना पड़ रहा है। नगर के उमा देवी चौक के समीप बदरीनाथ हाईवे पर सुधारीकरण का कार्य किया जा रहा है। आपदा से क्षतिग्रस्त सड़क मरम्मत के मलबे से और संकरी हो गई है।
गंगोत्री-यमुनोत्री
गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट 21 अप्रैल को खुलेंगे। यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम में बिजली और दूरसंचार जैसी सेवाएं अभी तक बहाल नहीं हो पाई हैं। यात्रा मार्ग में सार्वजनिक शौचालय भी नहीं बनाए गए हैं। इसलिए इन दोनों धाम में रुख करने वाले यात्रियों की मुसीबत तय मानिए।
गंगोत्री हाईवे के धरासू नालूपाणी से गंगोत्री धाम तक बीच-बीच में करीब सोलह किमी हिस्से में सड़क तीर्थयात्रियों को खतरों का खिलाड़ी बनाने को तैयार है। यहां ऊपर से भूस्खलन तो नीचे से भागीरथी नदी के कटाव की आशंका बनी हुई है। इन हिस्सों में अभी एक हफ्ते पहले ही पैचवर्क और डामरीकरण कराया गया है, लेकिन हर रोज बिगड़ता मौसम काम में बाधा डाल रहा है।
बड़कोट से यमुनोत्री की ओर बढ़ते ही रास्ते में जगह-जगह पैचवर्क और डामरीकरण अभी भी चल रहे हैं। बारिश अड़चन डाल रही है। जानकीचट्टी-यमुनोत्री पांच किमी पैदल मार्ग अभी भी क्षतिग्रस्त है। मरम्मत हो रही है मगर यात्रा में वक्त बहुत कम बचा है। काम में जुटे लोग बताते हैं कि बारिश और बर्फबारी के कारण दिन में महज 3-4 घंटे ही काम हो पा रहा है।
हेमकुंड साहिब : कपाट सबसे बाद में खुलेंगे, तैयारी ठीक
हेमकुंड साहिब की यात्रा एक जून से शुरू होगी। यात्रा की तैयारियोंको श्री हेमकुंड यात्रा मैनेजमेंट ट्रस्ट तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। वर्ष 2013 की आपदा के दौरान चारों धाम के साथ हेमकुंड यात्रा भी प्रभावित हुई थी। धाम का पैदल रास्ता कई जगह क्षतिग्रस्त हो गया था।
गोविंद घाट स्थित गुरुद्वारा और पार्किंग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। ट्रस्ट ने तकरीबन सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर दी हैं। ट्रस्ट ने यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर गुरुद्वारे में श्रद्धालुओं के रहने और खाने की व्यवस्था कर दी है। पैदल पथ पर सराय, प्याऊ, पथप्रकाश की पूरी व्यवस्था हो चुकी है। यात्रा मार्गों को सुगम भी बनाने का दावा किया गया है।
इस बार नया क्या
- केदारनाथ धाम में 3जी युक्त संचार व्यवस्था
- केदारनाथ धाम में एक बार में पांच हजार से ज्यादा यात्रियों को अनुमति नहीं
- केदारनाथ धाम के लिए यात्रियों का फोटो पहचानपत्र और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (अन्य राज्यों का भी मान्य)
- ग्रीन प्रमाणपत्रधारी वाहन ही ऊपर जा सकेंगे (हरिद्वार-ऋषिकेश में प्रमाणपत्र बनवाने की व्यवस्था)