Uttarakhand Glacier Burst: देवलीबगड़ और अलकापुरी के ग्रामीणों ने गांव खाली कर बदरीनाथ हाईवे पर बिताया दिन
ग्लेशियर टूटने से ऋषिगंगा मेें मची तबाही के बाद चमोली जिले के साथ ही निचले क्षेत्रों में लोगों में अफरातफरी मची रही। लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर में चले गए।
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नंदप्रयाग के समीप अलकनंदा नदी के किनारे देवलीबगड़ गांव के भोटिया जनजाति के 70 परिवार अनहोनी की आशंका को देखते हुए अपनी जरुरी सामग्री के साथ बदरीनाथ हाईवे पर आ गए। दिनभर हाईवे पर रहने के बाद भूखे-प्यासे ग्रामीण शाम को नदी सामान्य होने के बाद ही अपने घरों को लौटे।
प्रधान पुष्कर सिंह राणा ने बताया कि रैणी गांव से नदी में बाढ़ आने की सूचना टेलीफोन से साढ़े नौ बजे मिली। इसके बाद ग्रामीणों को अपने-अपने घरों को छोड़कर हाईवे पर चले जाने के लिए कहा गया। 11 बजे तक अलकापुरी गांव के ग्रामीण भी अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। लोगों में अफरातफरी मच गई। चमोली बाजार के निचले क्षेत्र में लोग अपने बच्चों और जरूरी सामान समेट कर अपर बाजार की ओर चले गए।
नदी का रौद्र रुप देखने के लिए पहुंचे लोग
देवलीबगड़ और अलकापुरी गांव के ग्रामीण भी अपने घरों को छोड़कर बदरीनाथ हाईवे पर आ गए। अलकनंदा के किनारे स्थित नंदप्रयाग, बिरही, पीपलकोटी, चमोली, मैठाणा, लंगासू, कालेश्वर और जिलासू में भी ग्रामीण दहशत में रहे। ग्रामीण क्षेत्रों से भी भारी मात्रा में लोग नदी का रौद्र रुप देखने के लिए पहुंचे।
पुलिस की ओर से वाहन में लाउडस्पीकर लगाकर लोगों को नदी किनारे न जाने और सुरक्षित स्थानों में शरण लेने के लिए कहा गया। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य महानंद बिष्ट ने बताया कि दोपहर में पौने एक बजे चमोली में नदी का जलस्तर लगभर तीन मीटर तक बढ़ गया। करीब आधा घंटे बाद नदी का जलस्तर कम होने लग गया था। नदी में बड़े-बड़े लकड़ी के स्लीपर औैर गाद बहकर आ रहा था।
अधजला शव छोड़कर भागे
चमोली बाजार के समीप अलकनंदा घाट पर कुछ लोग दाह संस्कार कर रहे थे। तभी पुलिस वाहन से पुलिस कर्मियों ने लाउडस्पीकर से नदी किनारे से चले जाने की चेतावनी जारी कर दी। जिसे देख लोग अधजला शव छोड़कर भाग गए।