चमोली जिले के सीमांत गांव रैणी में ग्लेशियर टूटने और उससे उपजे जलप्रलय ने 16 जून 2013 की केदारनाथ आपदा के जख्मों की याद दिला दी। लेकिन इस बार कुदरत ने कुछ रहम किया कि यह घटना मूसलाधार बारिश के बीच घुप अंधेरी रात में नहीं हुई। सुबह की घटना, साफ मौसम और प्रचंड आपदा से सबक सीखे सिस्टम ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। बाढ़ से उपजे हालातों को अफवाहों के चंगुल से बचाते हुए पल-पल की सूचना पब्लिक डोमेन पर साझा की गई और शाम होने तक बाढ़ से सहमे अलकनंदा और गंगा नदी के तटवर्ती शहरों, कस्बों और नगरों के लोगों ने राहत की सांस ली।
Uttarakhand Glacier Burst: इस बार कुदरत ने किया कुछ रहम, 2013 की आपदा में एकदम उलट थे हालात
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16 जून 2013 की आपदा के गवाह आज भी उसकी कल्पना मात्र से सिहर उठते हैं। चमोली के सीमांत गांव रैणी में ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना के मलबे में दफन हो जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो अलकनंदा तट के गांवों-कस्बों से लेकर देश और और दूसरे मुल्कों में रहने वाले उत्तराखंड वासी व प्रवासी का कलेजे धक रह गए। जल प्रलय की कल्पना मात्र से ही 2013 की उस महाप्रलय की जख्मों को हरा कर दिया जिसमें करीब चार हजार जिंदगियां दफन हो गईं। हजारों लोग बेघर हो गए। सड़कें, पुल बह गए।
लेकिन सात फरवरी 2021 की यह घटना ऐसे समय में हुई जब मौसम साफ था। हेलीकॉप्टर उड़ सकते थे। बचाव एवं राहत कार्यों के लिए टीमें घटना स्थल तक आसानी से पहुंच सकती थी। इन हालातों की वजह से ही जोशीमठ के पास एनटीपीसी की 550 मेगावाट की विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना में फंसे 16 लोगों को जीवनदान मिल सका। इस बार कुदरत ने उत्तराखंड पर रहम किया। 16 जून 2013 की आपदा के समय मूसलाधार बारिश हो रही थी। घुप अंधेरी रात में चौराबारी ग्लेशियर के पास बनी झील टूटी और केदारघाटी मलबे में समा गई।
इस बार भी जल प्रलय की वजह ग्लेशियर का टूटना ही माना जा रहा है। लेकिन यह घटना सुबह के समय और साफ मौसम के बीच होने से केदार आपदा से सबक सीखे सरकारी और आपदा प्रबंधन तंत्र के लिए काफी मददगार बना। यह हादसा इस लिहाज से दुखद है कि इसमें अभी तक सवा सौ लोगों के लापता होने की सूचना है। प्रकृति ने इतना समय दिया कि तटवर्ती इलाकों में बसे लोग सुरक्षित स्थानों में चले गए। हालांकि बाढ़ के पानी का वेग श्रीनगर गढ़वाल स्थित जीवीके की जल विद्युत परियोजना तक पहुंचने से पहले काफी कम हो गया।
इस तरह बड़ी आबादी वाले शहर ऋचषिकेश और हरिद्वार ने राहत की सांस ली। सरकारी तंत्र ने तटवर्ती इलाकों को समय रहते अलर्ट कर दिया। मैदानी इलाकों को बाढ़ बचाने के लिए राज्य सरकार को इतना समय मिला कि गंगा पर जल प्रवाह का दबाव कम करने उपाय किए जा सके। मुख्यमंत्री के निर्देश पर भागीरथी नदी में पानी का प्रवाह कम करने के लिए टिहरी बांध से पानी के बहाव को कम कर दिया गया। चीला बैराज को खाली किया गया ताकि बाढ़ का पानी झेल सके।