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चमोली आपदाः तपोवन सुरंग से मलबा निकालने का काम जारी, मलारी पुल बहने से सेना व आईटीबीपी की आवाजाही ठप

Wed, 24 Feb 2021 09:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 24 Feb 2021 09:28 PM IST
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Uttarakhand Chamol news : debris removed 184 meters in Tapovan tunnel, excavation work still in progress
तपोवन में रेस्क्यू के लिए लगी टीमें - फोटो : अमर उजाला

तपोवन सुरंग और बैराज साइट से मलबा हटाने और लोगों की तलाश का अभियान आपदा के 18वें दिन भी जारी रहा। हालांकि बुधवार को यहां कोई शव नहीं मिला है। मंगलवार को भी शव बरामद नहीं हुए थे। बैराज साइट में पानी आने से रोकने के लिए धौली नदी को दाहिने ओर मोड़ने के लिए काम किया जा रहा है। आपदा के समय बैराज साइट के गेट पर भारी भरकम पत्थर आ गया था, जिससे नदी का पानी पानी बैराज की तरफ मुड़ रहा था। मंगलवार शाम को यहां बोल्डर हटाने के लिए ब्लॉस्ट किया गया, जिससे पानी नहीं आने से बैराज साइट में शवों की तलाश में आसानी होगी। 

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सारा मलबा हटने पर ही होगा मिशन पूरा
सात फरवरी को आपदा के बाद से तपोवन टनल से मलबा हटाने का काम चल रहा है। इसमें सबसे आगे रहकर जेसीबी और लोडर ऑपरेटरकाम कर रहे हैं। पिछले 18 दिन से सुरंग के अंदर से मलबा हटाने में दिनरात जुटे ऑपरेटरों का कहना है कि वह सिर्फ एक ही बात सोचते हैं कि जितनी जल्दी हो सके वह सुरंग से पूरा मलबा हटा सकें। 
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जेसीबी ऑपरेटर अमित भट्ट, राजेश चौधरी और लोडर ऑपरेटर जयदेव लाल रेस्क्यू अभियान में पहले दिन से सुरंग के अंदर से मलबा हटाने में जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि सुरंग के अंदर कितनी भी विकट परिस्थिति रही हो, उन्होंने इसकी कभी चिंता नहीं की है। हालांकि खुद की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वह काम कर रहे हैं। दरअसल सुरंग के अंदर काम करना काफी मुश्किल भरा है। लगातार पीछे से मलबा आने और पानी निकलने से काम और भी मुश्किल हो रहा है। अंदर मशीन को संचालित करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। ऑपरेटरों का कहना है कि हमारा लक्ष्य अंदर फंसे लोगों तक जल्दी से जल्दी पहुंचना है।

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38 मृतकों के परिजनों को दिया मुआवजा

चमोली जिले में बीते दिनों आई आपदा में मारे गए लोगों में से अब तक 70 लोगों के शव बरामद हुए हैं। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि अभी तक 38 मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया जा चुका है।  जिला प्रशासन के अनुसार ऋषिगंगा की आपदा में लापता लोगों की तलाश जारी है। अभी तक 70 शव और 29 मानव अंग बरामद हुए हैं। जिसमें अभी भी 134 लोग लापता हैं। वहीं जुवाग्वाड़ में लोनिवि की तरफ से इंजन ट्राली लगाई जा रही है, जिससे लोगों का आवागमन आसान हो जाएगा। साथ ही क्षेत्र में बैली ब्रिज और लकड़ी के पैदल पुलों का निर्माण कार्य भी चल रहा है। वहीं कर्णप्रयाग में पूर्व में मिले एक शव की शिनाख्त दीपक शर्मा पुत्र प्रताप शर्मा निवासी फरीदाबाद के रूप में हुई है। 

मलारी पुल बहने से सेना व आईटीबीपी की आवाजाही ठप
ऋषिगंगा की आपदा में चीन सीमा को जोड़ने वाले मलारी हाईवे का पुल बह गया था, जिसके बाद से मार्ग पर सेना और आईटीबीपी के साथ स्थानीय वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद है। ऋषिगंगा पर बीआरओ बैली ब्रिज बना रहा है, लेकिन उसके तैयार होने में अभी काफी समय लग सकता है।

 पुल टूटने से अलग-थलग पड़े गांवों को जोड़ने के लिए ट्रॉली और सेना की तरफ से वैकल्पिक पैदल पुल बनाया गया है, लेकिन वाहनों की आवाजाही अभी नहीं हो पाई है। स्थानीय निवासी प्रेम सिंह बुटोला का कहना है कि पुल नहीं बनने से पल्ली रैणी, लाता, सुराईटोटा, तोलमा, पगरासू सहित अन्य गांवों का संपर्क टूटा हुआ है।

हालांकि सेना के वैकल्पिक पुल और ट्राली लगने से कुछ सुविधा जरूर हुई है, लेकिन स्थायी पुल बननेे के बाद ही समस्या का समाधान हो पाएगा। जिलाधिकारी स्वाती एस भदौरिया का कहना है कि यह बैली ब्रिज बहुत लंबा है। इसकी लंबाई करीब 200 फीट है। इसके बनने में समय लग रहा है। 

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