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उत्तराखंड कैबिनेट: अब बांड भरकर 50 हजार रुपये में होगी एमबीबीएस, बिना बांड 1.45 लाख फीस 

Fri, 29 Oct 2021 01:00 AM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 29 Oct 2021 01:00 AM IST
सार

पहले प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में बांड भरने पर महज 50 हजार रुपये सालाना शुल्क पर एमबीबीएस होता था। यह व्यवस्था पूर्ववर्ती त्रिवेंद्र सरकार में बदल दी गई थी।

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Uttarakhand cabinet meeting decision: MBBS will be done for 50 thousand rupees by filling bond
मेडिकल की पढ़ाई - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उत्तराखंड के गरीब होनहारों के लिए अब एमबीबीएस की पढ़ाई करके डॉक्टर बनने की राह आसान हो गई है। सरकार ने मैदानी जिलों के मेडिकल कॉलेजों में बांड भरकर एमबीबीएस करने की सुविधा फिर बहाल कर दी है। 

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पहले बांड व्यवस्था के तहत केवल पर्वतीय क्षेत्रों के मेडिकल कॉलेजों जैसे श्रीनगर में ही बांड से पढ़ाई की सुविधा थी। जबकि बिना बांड के एमबीबीएस का शुल्क भी चार लाख रुपये हो गया था, जिसके तहत देहरादून और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेने वाले छात्रों को भारी परेशानी हो रही थी। छात्र लगातार आंदोलन कर रहे थे। आखिरकार सरकार ने एक ओर जहां बांड की व्यवस्था सभी मेडिकल कॉलेजों में बहाल कर दी है तो दूसरी ओर फीस भी चार लाख रुपये से घटाकर एक लाख 45 हजार रुपये कर दी है। निश्चित तौर पर इससे छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।
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ऑल इंडिया कोटे की सीटों पर फिर बढ़ेगी मारामारी
जब सरकार ने एमबीबीएस की फीस चार लाख रुपये कर दी थी तो प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में ऑल इंडिया कोटे की 15 प्रतिशत सीटों पर बाहरी राज्यों के छात्रों का आना काफी कम हो गया था। यह सीटें राज्य कोटे में परिवर्तित होने से राज्य के होनहारों को लाभ मिल रहा था। लेकिन अब फीस दोबारा कम होने से ऑल इंडिया कोटे की सीटों पर मारामारी बढ़ेगी। फिलहाल हल्द्वानी व श्रीनगर में 15-15 और दून मेडिकल कॉलेज में करीब 27 ऑल इंडिया कोटे की एमबीबीएस सीटें हैं। 

गरीब मेधावियों के लिए आसान होगी एमबीबीएस की राह
प्रदेश में नीट यूजी काउंसलिंग से सीट आवंटन और पसंदीदा कॉलेजों के परिपेक्ष्य में देखें तो हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज पहली पसंद होता है। इसके बाद दूसरी प्राथमिकता पर श्रीनगर और फिर दून मेडिकल कॉलेज होता है। अगर किसी छात्र ने बढ़िया रैंक के आधार पर हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में सीट पाई है तो उसे चार लाख रुपये शुल्क देना अनिवार्य है। इससे गरीब घरों के होनहार छात्रों के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई बेहद मुश्किल हो चली है। अगर बांड की व्यवस्था दोबारा लागू हो जाएगी तो निश्चित तौर पर 50 हजार रुपये सालाना में पढ़ाई आसान हो जाएगी।

बांड भरने वालों के लिए यह हैं नियम

बांड भरने वालों के लिए भी नियम काफी सख्त हैं। मेडिकल कॉलेजों में जूनियर और सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की कमी को देखते हुए बांड से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को पहले एक साल मेडिकल कॉलेजों में सेवा देनी होती है। उसके बाद दो साल तक दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों के प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर सेवा देनी हाेती है। इसके बाद दो वर्ष तक जिला चिकित्सालयों या दुर्गम के चिकित्सालयों में सेवा की अनिवार्यता होती है।

राजकीय मेडिकल कॉलेज में बढ़ाए संकाय सदस्यों के पद
सोहन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान अल्मोड़ा में मानकों के अनुसार संकाय सदस्यों के 157 पदों को बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। सरकार का इसी शैक्षिक सत्र से एमबीबीएस कोर्स शुरू का प्रयास है। इसके लिए मेडिकल कालेज में केंद्र के मानकों के अनुरूप संकाय सदस्यों के पद सृजित किए जा रहे हैं। जिससे मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से 100 सीटों पर एमबीबीएस कोर्स शुरू करने की अनुमति मिल सके। 

राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा को शुरू करने के लिए सरकार लंबे समय से प्रयासरत है लेकिन संकाय सदस्यों की कमी से कारण एमबीबीएस कोर्स संचालित करने की मंजूरी नहीं मिली थी। अब सरकार ने केंद्र के मानकों के अनुरूप संकाय सदस्यों के 157 अतिरिक्त पद सृजित करने की कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। 

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