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Uttarakhand Board: खराब रिजल्ट पर शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करना भूला विभाग, पिछले साल हुआ था ऐसा हाल

Sat, 20 May 2023 03:22 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 20 May 2023 03:22 PM IST
सार

प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अच्छा खासा वेतन मिलना है। इसके बावजूद तमाम स्कूलों के रिजल्ट पिछले कई साल से लगातार खराब आ रहे हैं। खराब रिजल्ट वाले और अक्सर बिना सूचना छुट्टी पर रहने वाले खासकर 50 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने का निर्णय लिया था।

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Uttarakhand Board Department forgot to take action against teachers on bad results read more update in hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

पिछले कुछ वर्षों से लगातार बोर्ड परीक्षा में खराब रिजल्ट देने और बगैर सूचना छुट्टी पर रहने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई करना विभाग भूल गया है। यह कार्रवाई केवल निर्देश तक ही सीमित रह गई है। शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी के मुताबिक पूर्व में दो साल कोविड की वजह से पढ़ाई पर इसका असर पड़ा है।

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यही वजह रही कि किसी शिक्षक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिक्षा विभाग की ओर से पहले निर्देश जारी किया गया था कि खराब रिजल्ट वाले और अक्सर बिना सूचना छुट्टी पर रहने वाले खासकर 50 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। विभाग ने हर जिले से ऐसे शिक्षकों की सूची भी मांगी थी।
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विभाग को निर्देश था कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सिफारिश के साथ इस तरह के शिक्षकों की रिपोर्ट निदेशालय भेजी जाए। इसके अलावा, शिक्षा विभाग ने खराब रिजल्ट वाले शिक्षकों पर कार्रवाई और अच्छा रिजल्ट देने वाले शिक्षकों को पुरस्कृत करने का निर्देश दिया था। यह निर्देश भी धरा रह गया और अब तक किसी शिक्षक पर विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।

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पिछले साल 48 हजार से अधिक छात्र हुए थे फेल

उत्तराखंड बोर्ड की पिछले साल हुई 12वीं की परीक्षा में 19 हजार और 10वीं की परीक्षा में 28 हजार से अधिक छात्र फेल हुए थे। इसके बावजूद संबंधित विद्यालयों या उनके शिक्षकों को कार्रवाई के लिए चिह्नित नहीं किया गया।

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मिलता है अच्छा वेतन

प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अच्छा खासा वेतन मिलना है। इसके बावजूद तमाम स्कूलों के रिजल्ट पिछले कई साल से लगातार खराब आ रहे हैं। वेतन में यदि प्रवक्ताओं की बात करें तो वे 70 हजार से एक लाख 40 हजार रुपये तक वेतन पा रहे हैं, जबकि वरिष्ठ प्रधानाचार्यों का वेतन प्रतिमाह सवा दो लाख रुपये तक है।

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