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उत्तराखंडः भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाने की कवायद तेज, रायशुमारी में जुटा केंद्र

Sun, 22 Dec 2019 10:12 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 22 Dec 2019 10:12 AM IST
सार

  • समीकरणों की कसौटी पर कुमाऊं का पलड़ा भारी, कतार में कई दावेदार

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Uttarakhand: BJP exercise intensifies to make state president
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत

विस्तार

भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर कवायद तेज हो गई है। कतार में कई दावेदार हैं और उनमें से किसी एक नाम पर रायशुमारी करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने आरएसएस के खांटी नेता, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद विनय सहस्रबुद्धि और राष्ट्रीय मंत्री आरपी सिंह को भेजा है। दोनों केंद्रीय नेताओं ने शुक्रवार को भाजपा कोर ग्रुप के नेताओं से अलग अलग चर्चा कर रायशुमारी की। कोर ग्रुप के कुछ नेताओं से उन्होंने दूरभाष पर संपर्क साधकर राय मांगी।

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पार्टी ने 15 नवंबर तक प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव करने की घोषणा की थी। लेकिन संसद सत्र की अवधि बढ़ने और केंद्रीय नेताओं की व्यस्तता के चलते प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की तिथि आगे बढ़ाई जाती रही। अब माना जा रहा है कि पार्टी को 25 दिसंबर तक नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएगा। लेकिन बड़ा प्रश्न यही है कि वह कौन सा चेहरा है जिसे संगठन की कमान सौंपी जाएगी। 2022 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव काफी अहमियत रखता है। यही वजह है कि इस बार प्रदेश अध्यक्ष के दावेदारों की कतार में कई बड़े चेहरे हैं।
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पार्टी के भीतर स्थापित फार्मूले के हिसाब से अभी तक यही हुआ है कि यदि सत्ता की बागडोर यदि गढ़वाल के नेता के हाथों में रही थी संगठन की कमान कुमाऊं के नेता के हाथों में सौंपी गई। क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को संगठन में हमेशा से स्थान दिया जाता रहा है। लेकिन केंद्र और प्रदेश में प्रचंड बहुमत की सरकार बदलने के बाद क्षेत्रीय और जातीय समीकरण बहुत अधिक प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। त्रिवेंद्र सीएम बनने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में कुमाऊं के सांसद को स्थान मिलने की संभावनाएं गलत साबित हुई और गढ़वाल से खांटी सियासतदां रमेश पोखरियाल निशंक को केंद्रीय मंत्री बनाया गया। 
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मुख्यमंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री से हुई रायशुमारी

दोनों केंद्रीय नेताओं ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने पार्टी स्तर पर तैयार किए गए पैनल में से किसी एक नाम पर भी अपनी राय दी।

इसी तरह केंद्रीय नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, मदन कौशिक, हरक सिंह रावत, डॉ. धनसिंह रावत समेत पूर्व मुख्यमंत्रियों से भी रायशुमारी की। कोर ग्रुप के जो नेता राजधानी में मौजूद नहीं थे, उनसे टेलीफोन पर चर्चा की गई। 

केंद्र को सौंपेंगे रिपोर्ट

रायशुमारी के बाद दोनों केंद्रीय नेता राष्ट्रीय संगठन को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। उनकी रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय नेतृत्व फैसला लेगा और उसके बाद केंद्रीय पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में नए अध्यक्ष के सर्वसम्मति से निर्वाचन की घोषणा कर दी जाएगी।

कुमाऊं का पलड़ा भारी

कोर ग्रुप के नेताओं से रायशुमारी के बाद अब नए प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। संगठन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जातीय व क्षेत्रीय समीकरण के हिसाब से कुमाऊं का पलड़ा भारी माना जा रहा है।

विधायकों में वरिष्ठ विधायक बंशीधर भगत और नवीन चंद दुम्का, युवाओं में पुष्कर सिंह धामी और सुरेंद्र सिंह जीना के नाम चर्चाओं में तैर रहे हैं। आरएसएस और संगठन के खांटी नेताओं में कैलाश पंत सबसे आगे हैं, जबकि केदार जोशी, सुरेश जोशी और बलराज पासी, राजू भंडारी को भी दौड़ में माना जा रहा है। गढ़वाल से मजबूत नाम केवल डॉ. धनसिंह रावत का ही सामने आया है।
 
केंद्रीय नेताओं ने नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कोर ग्रुप के सभी सदस्यों से रायशुमारी की है। मुझसे भी पूछा गया है। मैंने अपनी राय दे दी है।
- अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष व सांसद भाजपा

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