उत्तराखंड विधानसभा सत्र 2020: हाथों में गन्ने लेकर विधानसभा पहुंचे कांग्रेस विधायक, जमकर किया प्रदर्शन
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वर्तमान पेराई सत्र में गन्ने का मूल्य घोषित करने और किसानों को बकाया गन्ने का भुगतान की मांग को लेकर कांग्रेस विधायकों ने प्रदर्शन किया। मंगलौर के विधायक काजी निजामुद्दीन की अगुवाई में कांग्रेस विधायक हाथों में गन्ना लेकर विधानसभा पहुंचे। लेकिन मुख्य गेट पर सुरक्षा बलों ने विधायकों को विधानसभा परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया। इस दौरान विधायकों व पुलिस के बीच धक्का मुक्की भी हुई।
मंगलवार को कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन, फुरकान अहमद, ममता राकेश, आदेश चौहान, हरीश रावत, मनोज रावत हाथों में गन्ना लेकर विधानसभा पहुंचे। रिस्पना पुल के पास बैरिकेडिंग पर पुलिस ने विधायकों को रोकने का प्रयास किया। लेकिन विधायक सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विधानसभा के मुख्य गेट तक पहुंच गए। गन्ना लेकर विधानसभा परिसर में जाने से रोके जाने पर पुलिस और विधायकों के बीच धक्का मुक्की भी हुई।
विधायक काजी निजामुद्दीन ने कहा कि पेराई सत्र शुरू हो गया है। लेकिन सरकार ने अभी तक गन्ने का मूल्य घोषित किया नहीं है। वहीं, चीनी मिलों पर गन्ना भुगतान का करोड़ों का बकाया है। काशीपुर व इकबालपुर चीनी मिलों पर 200 करोड़ का बकाया है। वर्तमान में डीजल, बिजली, उर्वरक, कीटनाशक की कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। लेकिन प्रदेश सरकार ने गन्ने की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं की है।
छात्रों ने सड़क पर दिया धरना, पुलिस से नोकझोंक
अंब्रेला एक्ट के खिलाफ डीएवी पीजी कॉलेज में छात्रों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। मंगलवार को छात्रों ने शिक्षक-कर्मचारियों के साथ मिलकर सड़क पर धरना दिया। इस दौरान जाम की स्थिति बनी रही। पुलिस सड़क से छात्रों को हटाने पहुंची तो जमकर नोकझोंक हुई।
डीएवी पीजी कॉलेज में चल रहे शिक्षक-कर्मचारियों के धरने में एनएसयूआई, आर्यन ग्रुप, सत्यम ग्रुप, निश्चय व अन्य संगठन के छात्रों ने पहुंचकर समर्थन दिया। वे अशासकीय कॉलेजों के खिलाफ प्रदेश सरकार के फैसले के विरोध में सड़क पर बैठे। सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
सूचना मिलने पर पुलिस बल भी मौके पहुंचा। सड़क पर लगे जाम को खोलने के लिए पुलिस ने छात्रों को हटाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र डटे रहे। इस दौरान छात्रों व पुलिसकर्मियों के बीच जमकर कहासुनी हुई।
पुलिस ने किसी तरह शिक्षकों की मदद से धरना खत्म कराया। एचएनबी केंद्रीय विवि-महाविद्यालय शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. डीके त्यागी ने कहा कि अशासकीय कॉलेजों का अनुदान खत्म करने से छात्रों को भी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इसी वजह से छात्र संगठन भी आंदोलन से जुड़ रहे हैं।