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उत्तराखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र का तीसरा दिन, विपक्ष ने की लोकायुक्त बिल पर चर्चा कराने की मांग

Thu, 06 Dec 2018 11:25 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 06 Dec 2018 11:25 AM IST
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Uttarakhand assembly winter session 2018 third day updates
uttarakhand assembly house - फोटो : अमर उजाला

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही लोकायुक्त के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे बीच प्रश्नकाल 20 मिनट तक बाधित हुआ। इससे पूर्व 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार लोकायुक्त से डर रही है। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्दयेश, प्रीतम सिंह और करण माहरा ने अपनी सीट पर खड़े होकर कहा कि 100 दिन के भीतर लोकायुक्त के गठन की बात करने वाली भाजपा अपने चुनावी वादे से पीछे हट रही है। साथ ही एनएच-74 घोटाले में सीबीआई जांच से पीछे हटने वाला भाजपा सरकार भ्रष्टाचार का स्टिंग करने वालों को जेल में डाल रही है। कांग्रेस सदस्य नियम 310 के तहत प्रश्नकाल को निलंबित कर तत्काल चर्चा कराए जाने की मांग पर अड़ते हुए वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। 

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इस दौरान सत्ता पक्ष की ओर से प्रकाश पंत, मुन्ना सिंह चौहान ने मोर्चा संभाला। कांग्रेस सदस्य लगातार सरकार से यह सवाल पूछते रहे कि मुख्यमंत्री के वादे को पौने दो साल हो गए आखिर लोकायुक्त बिल कब आएगा? सदन में जारी हंगामे को शांत करने में जुटे स्पीकर प्रेमचंद्र बार-बार नियम 58 के तहत चर्चा कराए जाने की बात कहते रहे। 20 मिनट तक सदन में शोरगुल व आरोप प्रत्यारोप व चुटकियों का सिलसिला चलने के बाद कांग्रेस सदस्य नियम 58 के तहत लोकायुुक्त पर चर्चा को राजी हुए।

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संसदीय कार्यमंत्री ने विपक्ष को ही ठहरा दिया जिम्मेदार 

लोकायुक्त के मुद्दे पर जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने सरकार का बचाव करते हुए बिल के सदन में न आने पर विपक्ष को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। कहा कि, सरकार ने 27 मार्च 2017 को लोकायुक्त बिल सदन में लाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी थी। शून्यकाल में संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने नियमों के तहत विपक्ष के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब देते हुए साफ किया कि लोकायुक्त विधेयक सदन की संपत्ति बन चुका है। लोकायुक्त पर सदन की पीठ का भी निर्देश आ आ चुका है। लिहाजा सदन ही निर्धारित करेगा कि कौन सा विषय लाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ऐसे विधेयकों को सदन में पेश किए जाने से पहले कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में विचार किया जाता है। कार्यमंत्रणा समिति में विपक्ष के भी सदस्य होते हैं। पंत ने साफ किया कि विपक्ष ने कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में लोकायुक्त बिल को सदन में लाने की कोई पहल नहीं की। जब भी सदन चाहेगा, सरकार लोकायुक्त बिल लाएगी। संसदीय कार्यमंत्री के जवाब के बाद सत्ता पक्ष ने मेज थपथपाकर खुशी जाहिर की। जबकि सरकार के जवाब से नाराज नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश और प्रीतम सिंह ने पंत पर सदन की प्रक्रिया ही बदल देने का आरोप लगा दिया। नियम 58 की ग्राह्यता में हुई समूची चर्चा के बाद स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने लोकायुक्त पर नियम 310 में उठाई गई विपक्ष की सूचना को अस्वीकार कर दिया।

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