उत्तराखंड बजट सत्रः गैरसैंण की चिंता सब करते हैं मगर यहां कोई टिकना नहीं चाहता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जनभावनाओं की प्रतीक गैरसैंण बेशक ग्रीष्मकालीन राजधानी बना दी गई। उसके सुनियोजित विकास के लिए सैकड़ों करोड़ की घोषणाएं भी हो रही हैं। मगर जब यहां रहकर काम करने का वक्त आता है तो कोई यहां टिककर नहीं रहना चाहता। शनिवार को छह दिन में ही मंत्रियों, विधायकों, अफसरों और कर्मचारियों का जी भर गया और वे अपने-अपने ठिकानों को लौटने के लिए मचलने लगे।
कैग रिपोर्ट में खुलासा : उत्तराखंड के लोगों का स्वास्थ्य भगवान भरोसे
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग करने वाले विपक्षी सदस्य हों या ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाकर गैरसैंण के सुनियोजित विकास का दंभ भरने वाले सत्ता पक्ष के विधायक, भराड़ीसैंण में ज्यादा दिन रहना किसी को नहीं सुहा रहा।
बजट सत्र के शनिवार को छठे दिन देहरादून वापसी का सवाल एक बार फिर भराड़ीसैंण की फिजाओं में तैरता रहा। मंत्री, विधायक, अफसर से लेकर उनकी खिदमत में देहरादून व अन्य स्थानों से भराड़ीसैंण पहुंचे कारिंदों की फौज ने सुबह से ही वापसी के लिए बोरिया बिस्तर बांध दिए। फिर वही पुरानी कहानी दोहराई गई। शुक्रवार देर शाम बंद कमरे में वापसी की पटकथा लिखी गई और उसी के अनुरूप सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष ने उसे निभा भी दिया।
विपक्ष के हो हल्ले में सत्ता पक्ष ने घंटों का काम मिनटों में निपटाकर अपनी पीठ थपथपाई और सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। एक बार फिर बिना चर्चा के अधिकांश विभागों की अनुदान मांगें, महत्वपूर्ण विधेयक और विनियोग विधेयक पास करा दिए गए। शाम होते-होते मंत्रियों, विधायकों और आला अधिकारियों का कारवां गुजरने लगा और गैरसैंण की उम्मीदें, आशाएं और सपने गुबार देखते रह गए।
कार्यमंत्रणा हुई और सीन बदल गया
शनिवार को चूंकि प्रश्नकाल नहीं होना था, लिहाजा सदन कार्यवाही कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के साथ हुई। कार्यस्थगन के बाद सरकार ने अनुदान मांगों को पास कराने के जतन शुरू किए। ट्रेजरी बेंच को उम्मीद थी कि विपक्ष में बैठे नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश, प्रीतम सिंह, काजी निजामुद्दीन और गोविंद सिंह कुंजवाल पटकथा के अनुरूप किरदार निभाएंगे।
लेकिन सियासी हलचल के बीच विपक्ष ने एक के बाद एक अनुदान मांग पर चर्चाएं शुरू की। भोजनावकाश के बाद कार्यमंत्रणा बैठक हुई और उसके बाद विपक्ष का अंदाज बदल गया। अनुदान मांगें फटाफट पास होती गईं और स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांग पर कोविड के मुद्दे पर विपक्षी सदस्य वेल में चले गए और इसके बाद सीन पूरी तरह से बदल गया।
गैरसैंण में कोई टिकना नहीं चाहता, इस बात से मैं सहमत नहीं हूं। सरकार कामकाज पूरा करने के लिए 10 दिन के सत्र करने का इरादा किया था। लेकिन भराड़ीसैँण में सत्र ज्यादा अवधि तक संचालित हुआ। जिससे ज्यादा दिन का काम कम दिन में पूरा हो गया। इसलिए सत्र पहले स्थगित हो गया।
- मदन कौशिक, संसदीय कार्यमंत्री
हम तो चाहते हैं कि सत्र सोमवार को भी चले। लेकिन सरकार की मंशा सोमवार को सत्र चलाने की नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोमवार का दिन मुख्यमंत्री का होता है। मुख्यमंत्री के पास कई अहम विभाग हैं, जिनके संबंध में सदस्यों को सवाल पूछने का मौका नहीं मिलता।
- काजी निजामुद्दीन, कांग्रेस विधायक