उत्तराखंड विस सत्र: आजादी का अमृत महोत्सव के मुद्दे पर चर्चा के बीच वार भी तकरार भी, करण महरा ने की पीएम की तारीफ
सत्र के अंतिम दिवस पर सदन में अमृत महोत्सव को लेकर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान जहां कुछ सदस्यों ने सारगर्भित ढंग से अपनी बात रखी, वहीं कुछ सदस्यों ने इसे आरोप-प्रत्यारोप का मंच बना दिया।
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15 अगस्त 2022 को भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने जा रहे हैं, इसी बात को ध्यान में रखते हुए आजादी की 75वीं वर्षगांठ से 75 सप्ताह पूर्व आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। सत्र के अंतिम दिवस पर सदन में अमृत महोत्सव को लेकर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान जहां कुछ सदस्यों ने सारगर्भित ढंग से अपनी बात रखी, वहीं कुछ सदस्यों ने इसे आरोप-प्रत्यारोप का मंच बना दिया। इस बीच सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच जहां कुछ मुद्दों को लेकर तीखी तकरार हुई, वहीं पीठ पर बैठे विस अध्यक्ष को कई बार सदस्यों को टोका और मुद्दे पर लौटने की नसीहत दी। आखिर में संसदीय कार्य मंत्री बंशीधर भगत से चर्चा में भाग लेने के लिए सभी सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
आजादी का इतिहास उन्होंने लिखा, जिन्होंने हमें गुलाम बनाया : चौहान
अमृत महोत्सव पर चर्चा के दौरान सदन के वरिष्ठ सदस्य मुन्ना सिंह चौहान ने चर्चा की शुरूआत करते हुए कहा कि आजादी का इतिहास उन लोगों ने लिखा, जिन्होंने हमें गुलाम बनाया।
मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि आजादी में तमाम लोगों ने अपनी आहूति दी। लेकिन जब अब नई पीढ़ी को आजादी का इतिहास बताते हैं तो सौ-पचास नामों पर आकर रुक जाते हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के संग्राम में उत्तराखंड की भी बड़ी भूमिका रही है। लेकिन इस बात को बहुत कम लोग जानते हैं कि नैनीताल में एक गदेरा है, जिसे फांसी गदेरा के नाम से जाना जाता है। हरिद्वार में एक बरगद के पेड़ पर सैकड़ों लोगों को फांसी पर लटका दिया गया था। लेकिन इन लोगों का नाम आज कोई नहीं जानता है। देहरादून के शहीद दुर्गा मल्ल और शहीद केशरी चंद की प्रतिमाएं आजादी के 70 साल बाद स्थापित की जा सकी। जबकि दोनों को ट्रायल के बाद कानूनी रूप से फांसी की सजा दी गई थी। कुछ लोगों ने जानबूझकर ऐसे लोगों का जिक्र न कर इतिहास को छुपाने का काम किया है।
करण महरा ने की पीएम मोदी की तारीफ
कांग्रेस विधायक करण महरा ने साबरमती आश्रम से आजादी के अमृत उत्सव की शुरूआत करने पर पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की। उन्होंने इसे अच्छी पहल बताते हुए कहा कि इससे सिद्ध होता है कि वह महात्मा गांधी का कितना आदर करते हैं। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों को लालच था कि यहां के बाजार का दोहन करेंगे। लेकिन नमक सत्याग्रह ने उनके इरादों पर पानी फेरने का काम किया। उन्होंने कहा कि हूकूमत करने से कोई महान नहीं बनता, बल्कि अपने कार्यों के मूल्याकंन के बाद ही कोई महान बनता है। उन्होंने अकबर के नौ रत्नों से लेकर सम्राट अशोक का उदाहरण देते हुए कहा कि यह लोग अपने कार्यों के कारण महान कहलाए। जबकि देश की आजादी के बाद कई संगठनों को अपने कायालय में तिरंगा लगाने में साठ साल लग गए। उन्होंने बाबा साहिब भीम राव आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल को आधुनिक भारत के तीन शिल्पियों की संज्ञा दी।
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..उनकी संतानों ने कभी कोई लाभ नहीं लिया
चर्चा में भाग लेते हुए विधायक काजी निजामुद्दीन ने कहा कि आजादी को संजोकर रखने की जिम्मेदारी सभी दलों की है। देश को आजादी दिलानी में तमाम लोगों का योगदान है। कई ऐसे नाम हैं, जो गुमनाम हैं। कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने इसके प्रमाण पत्र तक नहीं बनवाए, उनकी संतानों ने भी आजादी के बाद इसका कोई लाभ नहीं लिया। देश को आजादी शहीदों के खून पसीने से मिली है। अब जिसकी जो जिम्मेदारी है, वह उसी को बेहतर ढंग से निभा ले, यहीं आजादी के परवानों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कौशिक ने दी महरा को बधाई, पीएम मोदी की तारीफ के बांधे पुल
पीएम मोदी की तारीफ करने पर विधायक मदन कौशिक ने पहले तो करण महरा की तारीफ की। इसके बाद खुद पीएम मोदी की तारिफों के पुल बांधने शुरू कर दिए। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में देश में नौ माह में कोरोना की वैक्सीन तैयार हो गई। उन्होंने अयोध्या में ढांचा ढहाने और राम मंदिर बनाने जैसे मुद्दे उठाए। इसके बाद उन्होंने कई बार विधायक करण महरा का नाम लेते हुए अपनी बात रखनी शुरू की। इस पर विपक्षी सदस्यों ने एतराज जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। कहा कि आप सदन में न तो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं और न ही यह आपकी कार्यकारिणी की बैठक हो रही है। विपक्ष ने कौशिक पर भाजपा का एजेंडा रखने का आरोप लगाया। इस पर सदन में अध्यक्ष को बीच-बचाव करना पड़ा।
पुरखों ने दी आजादी, अक्षुण बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी : प्रीतम
चर्चा में भाग लेते हुए नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि कुछ सदस्यों ने जो बातें कहीं, वह आहत करने वाली हैं। अगर सदन में इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा के दौरान ऐसी बातें होंगी, तो अच्छा संदेश नहीं जाएगा। देश की आजादी में लाखों लोगों का योगदान है। स्वभाविक बात है कि जिन्होंने अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर नेतृत्व किया, उनके नामों का उल्लेख किया जाता है। उन्होंने कहा कि आजादी हमें हमारे पुरखों ने दी है, उसे अक्षुण बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
इन्होंने कहा...
सतपाल महाराज- आजादी में स्थानीय लोगों के योगदान की लोक गाथाओं को संजोकर उसका डिजीटल वर्जन तैयार किया जाना चाहिए।
सुबोध उनियाल- 75 वर्षों में देश का लोकतंत्र मजबूत हुआ है। इसमें सभी दलों का सहयोग रहा। आज अगर हम चांद और मंगल पर पहुंच पाए हैं तो इसमें इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री से लेकर नरेंद्र मोदी तक का योगदान है।
बिशन सिंह चुफाल- देश की नदियों को स्वच्छ बनाए रखने में पीएम मोदी सहित आम लोगों के योगदान का जिक्र किया। कहा कि यह जनता की सहभागिता से ही संभव हो पाया।
अरविंद पांडेय- उन गुमनाम सैनानियों को याद किया, जिनका आजादी में अहम योगदान रहा। पंजाब के बालक करतार सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने आजादी में अपने प्राणों की आहूति देकर अपना नाम अमर कर लिया।
महेंद्र भट्ट- भारत देश सोने की चिड़िया था। चोर डकैत वहीं आते हैं, जहां जहां धन-धान्य से परिपूर्ण हो। क्या गारंटी है कि हम फिर से गुलाम नहीं होंगे। हमें मोदी जैसा नेतृत्व चाहिए।
सुरेश राठौर- कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35-ए हटने के बाद देश को सही मायने में आजादी मिली है। आयोध्या में राम मंदिर बन रहा है, जिस पर सभी को गर्व है।
देशराज कर्णवाल- बाबा साहिब भीमराव अंबेडकर से लेकर पीएम मोदी के राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया। कहा- यह बाबा साहिब की ही सोच थी कि आज एक नौकरानी को बेटा भी साहब बन जाता है।
आदेश चौहान- आजादी का श्रेय किसी एक दल या किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता है। इसमें तमाम लोगों ने अपने प्राणों की आहूति दी है।
ममता राकेश- पूर्व पीएम स्व. राजीव गांधी के राज में महिलाओं को सच्ची आजादी मिली। उन्होंने पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था कर उनके सम्मान को बढ़ाने का काम किया था।
हरीश धामी- अमृत महोत्सव में अमृत कम और विष ज्यादा निकल रहा है। हमें ऐसा वातावरण बनाना चाहिए ताकि अच्छा संदेश जाए। हमें देश को आगे बढ़ाने के लिए मिलजुलकर काम करना चाहिए।
सौरभ बहुगुणा- देश की आजादी की लड़ाई एक लक्ष्य के लिए लड़ी गई थी। किसी ने नाम के लिए यह लड़ाई नहीं लड़ी थी। इसलिए सबके योगदान को याद करते हुए महत्व दिया जाना चाहिए।
विनोद चमोली- आजादी में उत्तराखंड के योगदान के दस्तावेज को तैयार करने के लिए कोई कमेटी बनाकर काम किया जाना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों के परिजनों को भूमि देने के लिए पूर्व में सीएम ने घोषणा की थी, उस पर अमल किया जाना चाहिए।
राम सिंह कैड़ा- आजादी का उत्सव सिर्फ कुछ सरकारी दफ्तरों में न मनाकर, घर-घर में त्योहार की तहर मनाया जाना चाहिए।