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उत्तराखंड विधानसभा सत्र: दिवंगत कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत के नाम पर होगा विधानसभा का प्रसार भवन

Tue, 25 Jun 2019 08:48 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 25 Jun 2019 08:48 AM IST
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Uttarakhand Assembly new building name will on late minister Prakash pant name
विधानसभा सत्र के दौरान स्व. मंत्री प्रकाश पंत को दी श्रद्धांजलि - फोटो : अमर उजाला

विधानसभा स्थित नवीन प्रसार भवन को कैबिनेट मंत्री स्व. प्रकाश पंत का नाम दिया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल ने भवन का नाम पंत के नाम पर करने की घोषणा की। दो दिवसीय सत्र के पहले दिन दिवंगत कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत से जुड़े संस्मरणों को सुनाते हुए कई सदस्यों की आंखें गीली हुईं और गला रुंधा। 

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सोमवार को सुबह 11 बजे शुरू हुए विधानसभा सत्र की शुरूआत श्रद्धांजलि से हुई। सभी सदस्यों ने प्रकाश पंत के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इसके बाद संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने सदन की संपूर्ण कार्यवाही को स्थगित करते हुए दिवंगत मंत्री प्रकाश पंत को श्रद्धांजलि अर्पित करने का प्रस्ताव रखा।
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सर्वसम्मति से मंजूर प्रस्ताव के बाद नेता सदन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्व. पंत के राजनीतिक, सामाजिक एवं साहित्यिक उपलब्धियों का जिक्र किया। मुख्यमंत्री इस दौरान मुख्यमंत्री भावुक भी हो गए। नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने भी उनसे जुड़े कुछ संस्मरणों को रखा। सभी सदस्यों के श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने पंत की याद में प्रसार भवन का नाम रखने की घोषणा की। इसके बाद दो मिनट का मौन रखा गया।
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‘आंखें बंद करता हूं तो लगता है प्रकाश पंत आ रहे हैं’
‘जब मैं आंखें बंद करता हूं तो लगता है कि सामने से प्रकाश पंत जी आ रहे हैं।’ यह कहते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भावुक हो गए। कुछ क्षणों के लिए उनके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकल पाया। समूचे सदन में एकाएक सन्नाटा पसर गया। फिर सीएम ने मेज पर रखे पानी का गिलास उठाया और पानी पीने के बाद रुंधे गले से स्वर्गीय पंत से जुड़ी अन्य यादों को साझा किया। स्वर्गीय पंत को याद करते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल भी अपनी भावनाओं को नहीं रोक पाए। पंत से जुड़े संस्मरणों को सुनाते हुए कई अन्य सदस्यों की आंखें भी गीली हुई और गला रुंधा।

सोमवार को जब सत्र शुरू हुआ तो संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने सदन की संपूर्ण कार्यवाही को स्थगित करते हुए दिवंगत मंत्री प्रकाश पंत को श्रद्धांजलि अर्पित करने का प्रस्ताव रखा। सर्वसम्मति से मंजूर प्रस्ताव के बाद नेता सदन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वर्गीय पंत के राजनीतिक, सामाजिक एवं साहित्यिक उपलब्धियों का जिक्र किया। सबसे कम आयु में विधानसभा अध्यक्ष बनने का संस्मरण भी उन्होंने सदन में साझा किया। उन्होंने बताया कि राज्य गठन के समय वे पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री थे। उनसे संगठन ने पूछा था कि विधानसभा अध्यक्ष किसे बनाया जाना चाहिए। तब उन्होंने प्रकाश पंत का नाम सुझाया था। कम उम्र के पंत को अध्यक्ष बनाए जाने पर संगठन को शंका थी, क्या वो संभाल पाएंगे? लेकिन जब उन्होंने ये जिम्मेदारी निभाई तो वरिष्ठ लोग भी आश्चर्य प्रकट करते थे। वे मुस्कराते हुए ठंडे दिमाग से सोचते हुए समस्याओं के समाधान करते थे। अब वे हमारे बीच नहीं है.. उनकी बहुत कमी खलेगी। आज भी जब आंखें बंद करता हूं तो लगता है कि प्रकाश पंत आ रहे हैं। यह कहते हुए सीएम भावुक हो गए।

विधानसभा अध्यक्ष की आंखों में छलके आंसू 
दिवंगत मंत्री प्रकाश पंत को याद करते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की आंखों में भी आंसू छलक गए। स्वर्गीय पंत से जुड़ी यादों को जब उन्होंने सदन के सामने रखा तो इस दौरान उनका गला रुंधने लगा। वे कुछ क्षण चुप रहे। आंखों में छलके आंसुओं को हथेलियों से पोछा और फिर अपने कथन को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पंत ने विस अध्यक्ष रूप में संसदीय परंपराओं और मर्यादाओं के मानदंडों की मजबूत नींव रखी। वे हमारे लिए प्रेरणा हैं।

पंत जी आप जल्दी चले गए: धामी 
खटीमा के विधायक पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पंत जी को शायद एहसास हो गया था। एक दिन मैं पंत जी के पास गया। उन्होंने मुझसे कहा, ‘मेरी उम्र 60 साल की है। अब मेरे में मन जो आएगा, वो बात बोलूंगा।’ यह कहते हुए धामी भावुक हो गए। रुंधे गले से वो बोले, पंत जी आप जल्दी चले गए।

मैं समझता हूं कितना दर्द सहा होगा: गहतोड़ी
कैंसर के रोग से जंग जीते चंपावत के भाजपा विधायक कैलाश चंद गहतोड़ी ने कहा,‘मैंने छह महीने ये दर्द झेला है। मैं समझ सकता हूं कि पंत जी ने कितना दर्द सहा होगा। उनके जाने से राजनीतिक शून्यता आ गई है।

 
उन्होंने कभी किसी को निराश नहीं किया: कैड़ा
भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा भी उस समय भावुक हो गए जब उन्होंने कहा कि पंत जी के पास कोई भी गया तो उन्होंने कभी किसी को निराश नहीं किया। उनसे मेरा विशेष लगाव रहा। मेरी मांग है कि कुमाऊं विवि के भीमताल परिसर का नाम स्वर्गीय पंत के नाम पर हो।

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