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Uttarakhand Election 2022: संतों के आगे सदा घुटने टेकती रही राजनीति, इनके द्वारे दिशा मिलती और आशीष भी
Mon, 31 Jan 2022 03:05 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
कौशल सिखौला, संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
कौशल सिखौला, संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 31 Jan 2022 03:05 PM IST
सार
जब तक टिकट न बंटें, पार्टियों के बड़े नेताओं पर अपने लिए दबाव डलवाने के लिए दावेदार संतों के पास आते हैं। टिकट मिल जाए तो फिर विजय का आशीर्वाद लेने या अनुष्ठान कराने संतों के पास और यदि जीत जाएं तो कृतज्ञता जताने संतों के पास।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
राजनीति यूं तो धर्म के आगे सदा नतमस्तक रही है। पर चुनाव आएं तो बात ही दूसरी है। साधु संतों के अखाड़ा आश्रमों में भक्त बेशक कम आएं, पर नेताओं की कोई कमी नहीं। जब तक टिकट न बंटें, पार्टियों के बड़े नेताओं पर अपने लिए दबाव डलवाने के लिए दावेदार संतों के पास आते हैं।
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टिकट मिल जाए तो फिर विजय का आशीर्वाद लेने या अनुष्ठान कराने संतों के पास और यदि जीत जाएं तो कृतज्ञता जताने संतों के पास। संतई से राजनीति का रिश्ता नया नहीं, बड़ा पुराना है। राजा महाराजा भी भगवा के दरबार में माथा टेकने आते थे।
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धर्मनगरी हरिद्वार में ऑफ सीजन होने के कारण श्रद्धालु न के समान हैं। लेकिन माथा टेकने वालों की कोई कमी नहीं। यह अधिकांश प्रत्याशी हैं जो यूपी, पंजाब और उत्तराखंड से आते हैं। अभी तो नामांकन का दौर चला, जरा चुनाव आगे बढ़ने दें, अनुष्ठानों का दौर भी चलेगा। मायादेवी, बग्लामुखी, तारा देवी और काली मंदिरों में प्रत्याशी विजय प्राप्ति अनुष्ठान कराते हैं। निर्जन मंदिरों में बैठकर यज्ञादि भी किए जाते हैं। प्रत्याशी विजय के लिए पंडितों से पाठ भी कराते हैं।
हरिद्वार के संतों का राजनीति पर दबदबा कायम है। ऐसे अनेक आश्रम और अखाड़े हैं, जहां के आचार्यों को बड़े नेता अपना गुरु या मुख्य परामर्शदाता मानते हैं। इसी महत्ता के कारण राम मंदिर आंदोलन की तमाम रूपरेखा उत्तरी हरिद्वार और कनखल के अखाड़ा आश्रमों में तैयार की गई। अधिक नाम न गिनाएं तो भी मां आनंदमयी, स्वामी परमानंद सरस्वती, सत्यमित्रानंद गिरी, स्वामी अवधेशानंद गिरि, कैलाशानंद सरस्वती, स्वामी रामदेव, डॉॅ. प्रणव पंड्या, धर्मानंद सरस्वती, शंकर भारती आदि के राजनीति पर प्रभाव को कौन नहीं जानता।
संतों के कुछ आश्रम तो सभी दलों के शीर्ष नेताओं की आस्था का केंद्र बने हुए हैं। हरिद्वार के नेताओं ने स्वयं भी चुनाव की सक्रिय राजनीति में भाग लिया और विजय प्राप्त की। स्वामी बागीश्वरानंद हरिद्वार नगर पालिका के कुछ समय चेयरमैन रहे। स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती न केवल सांसद रहे अपितु अटल बिहारी के मंत्रीमंडल में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के पद पर भी आसीन रहे। आचार्य जगदीश मुनि दो बार विधायक रहे तो महंत घनश्याम गिरि एक बार विधायक चुने गए। स्वामी यतींद्रानंद ने लोकसभा चुनाव लड़ा। स्वामी यतीश्वरानंद हरिद्वार ग्रमीण से विधायक रहे और आज भी चुनाव लड़ रहे हैं।