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उत्तराखंड में चुनावी संग्राम: सत्ता में भाजपा-कांग्रेस बैठे बारी-बारी, इस बार मिथक तोड़ने की बेकरारी

Tue, 23 Nov 2021 10:25 AM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 23 Nov 2021 10:25 AM IST
सार

Uttarakhand Assembly Election 2022: उत्तराखंड के चुनाव में कुछ मिथक खास माने जाते हैं। लेकिन मिथकों को तोड़ने के लिए सियासी दल और नेताओं के प्रयास के बावजूद मिथक नहीं टूटते हैं।

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Uttarakhand Assembly Election 2022: Bjp and Congress wanted to break Myth this year
भाजपा-कांग्रेस - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड की सियासत में सत्ता परिवर्तन को लेकर एक मिथक रहा है। 2022 के चुनाव में मिथक टूटेगा या इतिहास बना रहेगा। यह देखना दिलचस्प होगा। राज्य गठन के बाद से प्रदेश में चार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। प्रदेश के चुनावी इतिहास में कोई भी दल लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल नहीं कर पाया है। 

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उत्तराखंड के चुनाव में कुछ मिथक खास माने जाते हैं। लेकिन मिथकों को तोड़ने के लिए सियासी दल और नेताओं के प्रयास के बावजूद मिथक नहीं टूटते हैं। हालांकि राजनीति जानकारों की मानें तो यह एक संयोग है। राज्य गठन के बाद पहला विधानसभा चुनाव 2002 में हुआ था। जिसमें कांग्रेस ने जीत हासिल कर सरकार बनाई।
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एनडी तिवारी ने पांच साल सरकार चलाई। लेकिन 2007 के चुनाव में भाजपा की सरकार बनी। इसके बाद 2012 के चुनाव में कांग्रेस और 2017 में भाजपा सत्ता में आई। राज्य बनने के बाद 20 सालों के राजनीति सफर में कांग्रेस व भाजपा दो-दो बार सत्ता में रही। 2022 का चुनाव इस बार खास होगा। पिछले चार चुनाव के इतिहास पर सत्ता परिवर्तन को लेकर मिथक टूट पाएगा या इतिहास बना रहेगा। 

शिक्षा मंत्री तोड़ पाएंगे मिथकह?
विधानसभा चुनाव में शिक्षा मंत्री को लेकर एक मिथक बरकरार है। जो सरकार में शिक्षा मंत्री रहा है वह दोबारा चुनाव नहीं जीता। 2022 के चुनाव में वर्तमान सरकार में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय इस मिथक को तोड़ पाएंगे? वर्ष 2000 में भाजपा सरकार में तीरथ सिंह रावत शिक्षा मंत्री बने थे। लेकिन 2002 के चुनाव में विधानसभा चुनाव हार गए थे। इसके बाद वर्ष 2002 में प्रदेश में एनडी तिवारी की सरकार बनी। तिवारी सरकार में नरेंद्र सिंह भंडारी शिक्षा मंत्री बने। वे 2007 में चुनाव हार गए थे।

2007 में भाजपा फिर सत्ता में आई। उस समय गोविंद सिंह बिष्ट और खजान दास शिक्षा मंत्री बने थे। लेकिन दोनों ही 2012 में विधानसभा चुनाव हार गए। वर्ष 2012 में कांग्रेस सत्ता में आई। देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने मंत्री प्रसाद नैथानी को शिक्षा मंत्री बनाया गया था। लेकिन वर्ष 2017 के चुनाव में चुनाव हार गए। 

गंगोत्री से जो जीता उसकी पार्टी की बनी सरकार

उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री विधानसभा सीट को लेकर भी एक मिथक चला आ रहा है। यहां से जिस पार्टी का विधायक चुनाव जीतता है, उसी पार्टी की सरकार बनती है। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद 2002 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ। गंगोत्री सीट से कांग्रेस प्रत्याशी विजयपाल सजवाण ने जीत हासिल की और सरकार कांग्रेस की बनी। 2007 में भाजपा प्रत्याशी गोपाल सिंह रावत ने चुनाव जीता और भाजपा सत्ता में आई। 2012 में फिर विजयपाल सजवाण ने कांग्रेस टिकट पर चुनाव जीता। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। 2017 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी गोपाल सिंह रावत ने चुनाव जीता और भाजपा सत्ता में आई। वर्तमान विधायक गोपाल सिंह रावत का निधन हो गया है। 

चुनाव                        सत्तासीन दल
2002                           कांग्रेस
2007                           भाजपा
2012                           कांग्रेस
2017                          भाजपा

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