Uttarakhand Election 2022: भाजपा की नयापन लाने की कोशिश में सर्वे बना आधार, कइयों का उद्धार, कुछ दौड़ से बाहर
। भाजपा से जुड़े सूत्रों का मानना है कि उम्मीदवारों के चयन में पार्टी का समय-समय पर कराया गया सर्वे और कार्यकर्ताओं का फीडबैक मुख्य आधार बना। इससे कइयों का उद्धार हो गया तो कुछ दौड़ से बाहर भी हो गए।
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उत्तराखंड विधानसभा के चुनावी समर में उतारे गए 59 प्रत्याशियों में से भाजपा ने 10 विधायकों के टिकट काट दिए। 21 नए चेहरों पर पार्टी ने दांव लगाया। भाजपा से जुड़े सूत्रों का मानना है कि उम्मीदवारों के चयन में पार्टी का समय-समय पर कराया गया सर्वे और कार्यकर्ताओं का फीडबैक मुख्य आधार बना। इससे कइयों का उद्धार हो गया तो कुछ दौड़ से बाहर भी हो गए। अगले एक-दो दिन में शेष 11 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा के बाद साफ हो जाएगा कि पार्टी ने कुल कितने विधायकों के टिकट काटे।
कई दौर के कराए सर्वे
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक, पार्टी ने पिछले छह महीनों के दौरान कई दौर के सर्वे कराए। उसके बाद जमीनी कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया। ये सर्वे केंद्रीय संगठन की ओर से स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से कराए गए। कुछ हॉट सीटों पर टिकटों का एलान करने से दो दिन पहले तक रैपिड सर्वे तक कराए गए।
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सत्तारोधी रुझान से बचने का फार्मूला
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के 57 प्रत्याशी चुनाव जीते। पिछले पांच साल के दौरान अधिकांश विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर असंतोष देखा गया। सर्वे की रिपोर्ट में भी सत्तारोधी रुझानों की पुष्टि हुई। इसके बाद पार्टी ने इससे बचाव के लिए नए चेहरों पर दांव लगाने का फार्मूला तैयार किया। पार्टी ने 21 नए प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। ऐसा करके पार्टी चुनाव में नयेपन के साथ जाना चाह रही है। इस कारण कई नए और पुराने दावेदारों की टिकट की मुराद पूरी हो गई है।
पत्नी और बेटे को दिया टिकट
विधायक के खिलाफ सत्तारोधी रुझान से बचने के लिए पार्टी ने 10 सिटिंग विधायकों के टिकट तो काटे। इनमें खानपुर विस सीट से विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन की जगह उनकी पत्नीऔर काशीपुर में बुजुर्ग विधायक हरभजन सिंह चीमा के स्थान पर उनके बेटे को टिकट देकर सत्तारोधी रुझान से बचने का उपाय किया। सूत्रों के मुताबिक, अब झबरेड़ा विधानसभा सीट पर भी पार्टी विधायक देशराज कर्णवाल की पत्नी वैजयंती माला को उम्मीदवार बनाकर यही प्रयोग कर सकती है।
अधर में नहीं छोड़ते, संदेश देने की कोशिश
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए पुरोला के विधायक राजकुमार को बेशक उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। लेकिन पार्टी ने उन सभी विधायकों को टिकट दिया, जो 2016 में कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी में विश्वास जताने वालों को अधर में नहीं छोड़ती।
पार्टी ने 2017 में जसपुर से चुनाव हारे डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल को टिकट दिया। साथ ही सभी सिटिंग विधायकों को भी उम्मीदवार बनाया। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, राजकुमार की सहमति के बाद ही पुरोला से दुर्गेश्वर लाल को प्रत्याशी बनाया गया था। पार्टी ने कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुई सरिता आर्य को भी नैनीताल से टिकट दिया।
भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने सर्वश्रेष्ठ प्रत्याशी चुने हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ये सभी प्रत्याशी जनता के आशीर्वाद लेने जाएंगे और 2017 से भी अधिक सीटें प्राप्त करेंगे। मैं सभी प्रत्याशियों को शुभकामनाएं देता हूं।
- मदन कौशिक, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा