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मौत के मुहाने पर उत्तराखंड के 73 गांव, जिम्मेदार बेपरवाह
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 30 Nov 2016 11:51 AM IST
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uttarakhand faced disaster situation due to rain
- फोटो : file photo
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आपदा के लिहाज से अतिसंवेदनशील 73 गांव मौत के मुहाने पर खड़े हैं, लेकिन जिन लोगों पर इनके पुनर्वास की जिम्मेदारी है वे अतिसंवेदनहीन बने हुए हैं।
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आलम यह है कि दैवी आपदा के शिकार उत्तरकाशी जनपद को छोड़ दें तो बाकी जिलों में महीनों बाद भी जिलाधिकारी गांवों के पुनर्वास के लिए जमीन नहीं तलाश पाए। जिन्होंने कुछेक गांवों के लिए जमीन तलाशी भी है, उन्होंने प्रस्ताव ही गलत बनाकर भेज दिए। गांवों के पुनर्वास को लेकर सरकारी तंत्र की उदासीनता की यह स्थिति मुख्यमंत्री हरीश रावत के चुनाव क्षेत्र धारचूला और आपदा प्रबंधन मंत्री राजेंद्र भंडारी के गृह जिले चमोली में भी दिखाई दी।
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उत्तराखंड आपदाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। हर वर्ष मानसून के दौरान भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं से जानमाल की भारी हानि होती है। राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती 400 से ज्यादा संवेदनशील गांवों का पुनर्वास है, लेकिन संसाधनों का तकाजा देकर संवेदनशील गांवों का पुनर्वास का ये मसला लंबे समय तक लटका है।
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आपदा प्रबंधन विभाग ने भूगर्भीय सर्वेक्षण के जरिये 73 अतिसंवेदनशील गांवों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की पहल की। इन गांवों में 3491 परिवार रहते हैं, लेकिन इनमें कोई खास प्रगति नहीं हो पाई है। विभाग ने जिलाधिकारियों को गांवों के पुनर्वास एवं विस्थापन के लिए भूमि चयन, उसका भूगर्भीय सर्वेक्षण एवं लागत व्यय का ब्योरा मांगा था। मगर कई जनपदों से तो शासन को प्रस्ताव तक नहीं भेजे गए। शासन स्तर पर इस बारे में कई बार रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री के चुनाव क्षेत्र धारचूला में भी सात गांव अतिसंवेदनशील चिह्नित हुए हैं। लेकिन इन गांवों के पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन से एक भी प्रस्ताव नहीं आया। न्यू सोबला, सोबला, न्यू सुवा, झिमरी गांव, खुम्ती, कनार, तांकुल गांव के लिए भूमि चयन, भूगर्भीय सर्वेक्षण की कोई जानकारी शासन को नहीं भेजी गई।
समूचे पिथौरागढ़ जनपद में 21 गांवों में से एक भी प्रस्ताव शासन को नहीं मिला। आपदा प्रबंधन मंत्री के गृह जिले चमोली के सरतोली, नैथोली, नारंगी, गणांई, दाड़मी, भ्यूंडार पुलना, पांडुकेश्वर, अरूड़ पटूकी, पयां चौरमी, बंगथल गांव के लिए अब तक जमीन नहीं खोजी जा सकी। आपदा की भीषण त्रासदी झेलने वाले रुद्रप्रयाग जनपद में पुनर्वास का एक भी प्रस्ताव नहीं भेजा गया है।
अतिसंवेदनशील गांवों का ब्योरा
जनपद - गांव - परिवार
बागेश्वर- 03 - 31
पिथौरागढ़- 21 - 582
नैनीताल- 03 - 158
अल्मोड़ा- 03 - 84
उत्तरकाशी-11 - 1149
टिहरी- 08 - 507
चमोली- 17 - 888
रुद्रप्रयाग- 07 -92
कुल- 73 - 3491
अतिसंवेदनशील गांवों के पुनर्वास के प्रस्ताव भेजने में उत्तरकाशी जिले का रिकार्ड बेहतर है। जिले में छह गांवों का सर्वेक्षण हो चुका है। 11 में से 10 गांवों के भूमि का चयन कर लिया गया है।
प्रस्ताव भेजने में देरी की वजह तो जिलाधिकारी ही बता सकते हैं, लेकिन कुछ जिलों से भेजे गए प्रस्ताव में कमियां थीं, जिन्हें संशोधन के साथ भेजने को कहा गया है। शासन स्तर से रिमांइडर भेजे जा रहे हैं। फील्ड में कुछ कठिनाइयां होंगी, जिनकी वजह से प्रस्ताव आने में देरी हो रही है।’
- सी. रविशंकर, अपर सचिव, आपदा प्रबंधन