2009 बवाल प्रकरण: मंत्री हरक सिंह रावत, यशपाल और सुबोध समेत 25 नेताओं को कोर्ट से मिली राहत
- सरकार के प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर कोर्ट ने वाद को लिया वापस
- कांग्रेस ने 2013 और भाजपा ने 2018 में वाद वापसी का लिया था निर्णय
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उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दौरान हुए बवाल के मुकदमे में फंसे कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य और सुबोध उनियाल समेत 25 नेताओं को कोर्ट से राहत मिल गई है। मुकदमा वापस लेने के सरकार के अनुरोध को अदालत ने स्वीकार कर लिया है। इससे पहले कोर्ट ने कांग्रेस सरकार के 2013 और भाजपा सरकार के 2018 में वाद वापस लेने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था।
2009 में भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने विधानसभा का घेराव किया था। इस दौरान जाम के दौरान हुए बवाल को लेकर पुलिस ने हरक सिंह रावत समेत 25 नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। 2013 में कांग्रेस सरकार ने कोर्ट में वाद वापस लेने का प्रार्थनापत्र दिया था, जो खारिज हो गया था।
2018 में भाजपा सरकार ने भी वाद को वापस लेने का निर्णय लिया था। हालांकि कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उसे स्वीकार नहीं किया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट में सुनवाई के दौरान इन नेताओं पर आरोप तय हो गए थे।
इसी बीच आरोपी और कांग्रेस नेता संग्राम सिंह पुंडीर ने जिला एवं सत्र न्यायालय में फैसले को चुनौती थी। अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ शंकर राज की कोर्ट ने सीजेएम कोर्ट के सितंबर 2018 के आदेश को खारिज कर सरकार के अनुरोध को जनहित में बताया था।
इसी आधार पर सीजेएम विवेक श्रीवास्तव ने वाद वापस लेने की अर्जी को स्वीकार कर लिया। मुकदमे में भाजपा सरकार में मंत्री हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य, सुबोध उनियाल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल, प्रदीप टम्टा, पूर्व विधायक हीरा सिंह बिष्ट, विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन, सूर्यकांत धस्माना, लालचंद शर्मा, संग्राम सिंह पुंडीर, उपेन्द्र सिंह, मनीष नागपाल, कुंवर प्रताप सिंह, भूपेंद्र, विवेक खंडूरी, ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी समेत 25 नेता इस मामले में आरोपी थे।