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उत्तराखंड को जोर का झटका, 21 परियोजनाएं खारिज
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 01 Feb 2017 07:15 PM IST
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जल विद्युत परियोजना
नेशनल वाइल्ड बोर्ड ने प्रदेश को बड़ा झटका दिया है। वन आरक्षित क्षेत्रों, नेशनल पार्कों में विकास कार्यों से संबंधित सभी परियोजनाओं को एक झटके में खारिज कर दिया गया। इन प्रकरणों को स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने पास करके मंजूरी के लिए नेशनल बोर्ड के पास भेजा था। इसमें कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट रहे हैं। अधिकांश प्रकरण बिजली, पानी, खनन, सड़क प्रोजेक्ट के रहे हैं।
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स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने नेशनल बोर्ड में 21 प्रकरण प्रस्तुत किए थे। इनमें से किसी को नेशनल बोर्ड ने पास नहीं किया है। इन प्रकरणों में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग गोपेश्वर के विद्युतीकरण, बावला-नंद प्रयाग जल विद्युत परियोजना और राष्ट्रीय राजमार्ग का प्रकरण रहा है। इसी तरह गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क में सड़क, सोनम नया और पुराना में रक्षा मंत्रालय को वन भूमि हस्तांतरण का प्रकरण भी बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत हुआ था।
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इसके अलावा गोविंद वन्य जीव विहार में गांवों के विद्युतीकरण, विंसर वन्य जीव विहार अल्मोड़ा में फैब्रीकेटेड हट और सिविल सोयम वन प्रभाग में मोटर मार्ग तथा चकराता वन प्रभाग में शीतला नदी, यमुना, आसन नदी में खनन के प्रोजेक्ट रहे हैं। इसके अलावा मसूरी वन्य जीव विहार के दायरे में वाल्दी नदी और लैंस डाउन वन प्रभाग की खो नदी में खनन के प्रोजेक्ट रहे।
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तराई पूर्वी के नंधौर में उपखनिज चुगान, वन भूमि हस्तांतरण तथा कालागढ़ क्षेत्र में खो नदी से चुगान के प्रकरण भी नेशनल बोर्ड के भेजे गए थे। प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) डीबीएस खाती ने बताया कि नेशनल बोर्ड ने एक भी प्रकरण पास नहीं किया। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से भी स्वीकृति लेने का सुझाव दिया गया।