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उत्तराखंड : कोचिंग कारोबार पर कोविड का प्रहार, इस इंडस्ट्री को अनलॉक की दरकार, 25 अरब का है कारोबार

Wed, 15 Jul 2020 03:13 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 15 Jul 2020 03:13 PM IST
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uttarakand news: covid 19 attack on coaching business, this industry needs to unlock
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

उत्तराखंड ने पिछले एक दशक में एजुकेशन हब के तौर पर भी पहचान बनाई है। यहां सरकारी और निजी क्षेत्र के कई नामी शिक्षण संस्थान हैं। कुछ समय से देहरादून, रुड़की, नैनीताल और काशीपुर में कोचिंग कारोबार ने विस्तार लिया है। लेकिन लॉकडाउन से इस कारोबार को भी बहुत अधिक नुकसान हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश में सालाना 25 अरब का कोचिंग कारोबार है।

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16 मार्च को लॉकडाउन होने के बाद से आज तक बंद हैं प्रदेशभर के कोचिंग संस्थान

हर साल हजारों युवाओं की शिक्षा और रोजगार में हमकदम बनने वाले कोचिंग संस्थान करीब चार महीने से लॉकडाउन में हैं। यहां पढ़कर आगे बढ़ने का सपना देखने वाले लाखों युवा या तो घर खाली बैठे हैं या फिर ऑनलाइन कोचिंग से किसी तरह काम चला रहे हैं।
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संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, बैंक जैसे तमाम संस्थानों ने भविष्य की परीक्षाओं की तिथियां जारी कर दी हैं। युवाओं के लिए बड़ी चुनौती है तो वहीं प्रदेश के इस बड़े स्वरोजगार को अनलॉक होने की दरकार है। हजारों लोगों का रोजगार संकट में हैं। अब सभी सरकार से राहत की आस लगा रहे हैं।
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बीते एक दशक में प्रदेश में कोचिंग इंडस्ट्री बड़े पैमाने पर स्थापित हुई है। प्रदेशभर में 700 से अधिक ऐसे कोचिंग संस्थान हैं जिनके पास छात्र संख्या 200 से लेकर हजार तक है। 16 मार्च को कोरोना लॉकडाउन होने के बाद से यह इंडस्ट्री आज तक अनलॉक नहीं हो पाई है।

कोचिंग संचालकों की परेशानियां बढ़ने लगी हैं तो उधर इनमें पढ़ रहे छात्रों की चिंताएं भी पुरजोर होने लगी हैं। स्वरोजगार के इस दौर में कोचिंग इंडस्ट्री अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए सरकार से कुछ राहत की उम्मीद लगा रही है।

किराए का होने लगा है संकट

उत्तराखंड कोचिंग एवं लाइब्रेरी स्वरोजगार संगठन के मुताबिक, प्रदेश में 700 से अधिक कोचिंग संस्थान हैं, जिनमें से करीब 95 फीसदी संस्थान किराए की इमारतों में चल रहे हैं। मार्च महीने से सभी संस्थान बंद तो हैं लेकिन किराया हर महीने की चुनौती बन रहा है। मकान मालिकों का दबाव अब कोचिंग संस्थानों के लिए परेशानी पैदा करने लगा है। संगठन के अध्यक्ष सविंदर सिंह मिंगवाल का कहना है कि कई कोचिंग संस्थान तो इस वजह से बंदी की कगार पर पहुंच गए हैं।

बेरोजगारी बढ़ने की आशंका

प्रदेशभर के कोचिंग संस्थानों में इस वक्त करीब पांच से छह हजार कर्मचारी व शिक्षक काम करते हैं। इन सभी के वेतन का भी एक बड़ा चैलेंज कोचिंग इंडस्ट्री के सामने खड़ा हो गया है। कोचिंग संचालकों का कहना है कि शुरू के तीन महीने तो किसी तरह से कट गए लेकिन अब हालात ऐसे नहीं बचे कि कर्मचारियों और शिक्षकों को वेतन दिया जा सके। इससे आने वाले समय में बेरोजगारी का आलम हो सकता है।

लाखों युवाओं के सपनों पर लग रहा है ग्रहण

कोचिंग संस्थानों से पढ़ने वाले हजारों छात्र हर साल मेडिकल, इंजीनियरिंग, बैंकिंग, एसएससी, यूपीएससी, सिविल सेवा, एनडीए के साथ ही समूह-ग जैसी तमाम भर्तियों में कामयाब होते हैं। 16 मार्च से इन सभी भर्तियों के लिए तैयारी करने वाले युवाओं को कोचिंग की दरकार है। संस्थान बंद होने की वजह से उन्हें भी भविष्य की चिंता सताने लगी है।

प्रवेश परीक्षाएं, भर्ती परीक्षाएं भी हुई अनलॉक

कोरोना संक्रमण के बीच तमाम प्रवेश परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया था। अनलॉक 2.0 में इनकी तिथियां जारी होने लगी हैं। सिविल सेवा प्री परीक्षा, एनडीए परीक्षा, जेईई मेन, नीट, एसएससी, एसबीआई के अलावा राज्य की भी कई भर्तियों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे इनकी तैयारी कर रहे युवाओं की चिंता और बढ़ गई है।

कोचिंग इंडस्ट्री पर एक नजर
प्रदेश में कोचिंग संस्थान - 700 से अधिक
देहरादून में कोचिंग संस्थान - 250 से अधिक
कोचिंग संस्थानों का अनुमानित सालाना टर्नओवर - 500 करोड़ से ऊपर
संस्थानों में नौकरी करने वाले लोग - करीब 6000

अनलॉक के दौर में अब कोचिंग संस्थान भी खुलें

कोचिंग संस्थान संचालकों का कहना है कि जिस तरह से पूरे बाजार, तमाम प्रतिष्ठान खुलने शुरू हो गए हैं, वैसे ही अनलॉक 2.0 में कोचिंग संस्थानों को भी खोलने की अनुमति जारी की जाए। इसके लिए अलग से एसओपी तैयार की जाए। कम से कम छात्र संख्या के साथ छात्रों को कोचिंग का मौका मिलेगा तो इस इंडस्ट्री को बचाने की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ सकता है। देहरादून के एकलव्य एकेडमी के निदेशक एसएस रौतेला का कहना है कि कोचिंग संस्थान खोलने की दिशा में सरकार कदम बढ़ाएगी तो ही इस इंडस्ट्री का अस्तित्व बचेगा।

किराए में माफी जैसी कोई योजना आए तो बेहतर

उत्तराखंड कोचिंग एवं लाइब्रेरी स्वरोजगार संगठन से प्रदेशभर के करीब 300 कोचिंग जुड़े हुए हैं। इस संगठन ने सरकार से मांग की है कि फौरी राहत के तौर पर किराए में छूट के लिए प्रावधान किए जाएं। या फिर सरकार की ओर से कुछ राहत पैकेज दिया जाए, जिससे स्वरोजगार से जुड़ी यह इंडस्ट्री बचाई जा सके। 

चार तरह की कोचिंग संस्थान हैं प्रदेश में

प्रदेशभर में चार तरह के कोचिंग संस्थान हैं। पहले तो प्रवेश परीक्षाओं इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ, मैनेजमेंट आदि की तैयारी कराने वाले संस्थान हैं, जिनमें कई बड़े नाम भी शामिल हैं। दूसरे, सिविल सेवा परीक्षा और राज्य की परीक्षा की तैयारी कराने वाले संस्थान हैं। तीसरे, डिफेंस सर्विसेज से जुड़े ऐसे कोचिंग संस्थान हैं, जिनमें दाखिले के लिए देशभर से छात्र देहरादून आते हैं। चौथे, ऐसे संस्थान हैं जो कि वन डे एग्जाम यानी बैंकिंग, एसएससी, समूह-ग, रेलवे आदि की तैयारी कराते हैं। 

कोचिंग संस्थानों के लिए फौरी राहत के तौर पर किराया माफी सबसे अहम साबित हो सकता है। अगर सरकार इस दिशा में कुछ योजना बनाएगी तो निश्चित तौर पर फायदा होगा। इसके अलावा सरकार से हमारी मांग यह भी है कि जल्द ही कुछ राहत पैकेज भी दिया जाए, ताकि तमाम लोगों का रोजगार बच सके। - सविंदर सिंह मिंगवाल, अध्यक्ष, उत्तराखंड कोचिंग एवं लाइब्रेरी स्वरोजगार

कोचिंग इंडस्ट्री कोरोना लॉकडाउन में सबसे बुरी तरह से प्रभावित हुई है। यह असंगठित क्षेत्र है, जिसे हम लोग संगठित करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार से हमारी मांग यही है कि अस्तित्व बचाने की इस लड़ाई में सहयोग करे। -खजान राणा,महामंत्री, उत्तराखंड कोचिंग एवं लाइब्रेरी स्वरोजगार संगठन

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