उत्तराखंडः एसटीएफ ने पकड़ी हथियारों की अवैध फैक्ट्री, मुठभेड़ के बाद इनामी गुरदीप और दो को किया गिरफ्तार
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एसटीएफ ने नानकमत्ता (ऊधमसिंह नगर) के पास जंगलों में चल रही हथियारों की अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। इस दौरान हुई मुठभेड़ के बाद इनामी कुख्यात गुरदीप सिंह उर्फ दीपा और उसके तीन साथी भी पकड़े गए हैं। मौके से भारी मात्रा में अवैध असलाह और बंदूक तमंचे आदि बनाने का सामान बरामद हुआ है। गुरदीप उर्फ दीपा पर 10 हजार रुपये का इनाम है और वह हत्या, लूट व डकैती के मामलों में 12 सालों से फरार चल रहा था।
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एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि बीते दिनों नानकमत्ता के पास कामन नदी के जंगलों में गुरदीप उर्फ दीपा के सक्रिय होने की जानकारी मिली थी। बताया गया था कि गुरदीप आसपास के लोगों को डरा धमकाकर गैंग चला रहा है। उसने वहां पर हथियार बनाने की अवैध फैक्ट्री भी चलाई हुई है। इन हथियारों को वह असामाजिक काम करने वाले लोगों को बेचता था। इस सूचना पर वहां इंस्पेक्टर संदीप नेगी और एसआई यादवेंद्र बाजवा को लगाया गया।
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शनिवार तड़के पुख्ता सूचना पर एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की टीम वहां पहुंची तो बदमाशों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी। इस पर एसटीएफ ने भी जवाबी कार्रवाई में कई राउंड फायर किए। कुछ देर बाद बदमाश सुदलीमठ के जंगलों में भागने लगे।
एसटीएफ ने उनका पीछा किया और कुछ देर बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें एक बदमाश गुरदीप सिंह उर्फ दीपा निवासी ग्राम पहसानी, नानकमत्ता, जिला ऊधमसिंह नगर है। जबकि, दो उसके साथी कमलदीप उर्फ कुलदीप सिंह निवासी सिद्वानवदिया, नानकमत्ता और बलवीर सिंह निवासी ग्राम छिनकी, खटीमा ऊधमसिंह नगर हैं।
ऊधमसिंनह नगर में लूट, हत्या और डकैती के कई मुकदमे दर्ज
पूछताछ में इनामी दीपा ने बताया कि वह 12 सालों से फरारी काट रहा है। उसके खिलाफ ऊधमसिंनह नगर में लूट, हत्या और डकैती के कई मुकदमे दर्ज हैं। हथियार बनाकर वह इन्हें बाहर सप्लाई करता था। एसटीएफ एसएसपी ने बताया कि इनके कब्जे से दो बंदूक 12 बोर, एक पिस्तौल 32 बोर और 28 बंदूक की नाल व कुछ कारतूस बरामद हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह सब उनके द्वारा ही बनाए गए थे।
तराई का विरप्पन कहलाता था दीपा
दीपा बदमाश के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा वह 12 सालों से कई ऐसे कारनामे कर रहा था, जिनसे लोगों के दिलों में खौफ था। वह नेपाल के सीमावर्ती जनपदों में भी सक्रिय था। उसे तराई का विरप्पन भी कहा जाता था। वर्तमान में पुलिस इसके ऊपर इनाम को और बढ़ाने की तैयारियां भी कर रही थी।
कई दिन भेष बदलकर रहे बाजवा
एसएसपी ने बताया कि कई दिनों से एसआई यादवेंद्र सिंह बाजवा और उनकी टीम वहां पर जुटी थी। इस दौरान एसआई बाजवा जंगलों में भेष बदलकर रह रहे थे। ताकि, वहां किसी को उनके ऊपर शक न हो। अंत में 36 घंटों में वे पूरी तरह से सक्रिय हो गए और बदमाशों का पता खोज निकाला। बदमाशों को गिरफ्तार करने वाली टीम को डीजीपी अशोक कुमार ने 20 हजार रुपये नगद पुरस्कार देने की घोषणा की है।