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'उक्रांद के प्रति लोगों में सहानुभूति पर मैं उक्रांद में नहीं' 

Sun, 18 Dec 2016 12:55 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 18 Dec 2016 12:55 PM IST
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Urban Development Minister Pritam Singh interview
pritam singh - फोटो : amar ujala

सरल स्वभाव वाले शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह प्रमुख राज्य आंदोलनकारियों में से हैं। पहाड़ के गांधी कहे जाने वाले स्वर्गीय इंद्रमणि बड़ोनी के नेतृत्व में वे उक्रांद में शामिल हुए। उक्रांद के टिकट पर वर्ष 2002, 2007 और 2012 पर यमुनोत्री से चुनाव लड़ा। 2002 में जीते, 2007 में हार गए। 2012 में दूसरी बार विधानसभा पहुंचे तो कांग्रेस को समर्थन देकर मंत्री बने। उन पर आरोप है कि मंत्री बनते ही उन्होंने उक्रांद को दरकिनार कर दिया, जिसके चलते पार्टी से निलंबित भी हुए।

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अब चुनाव से ठीक पहले शहरी विकास मंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे उक्रांद में नहीं हैं। हालांकि वे साफ तौर पर कहते हैं कि उक्रांद के प्रति लोगों में सहानुभूति है और वे उत्तराखंड में क्षेत्रीय दलों के पक्षधर हैं। लेकिन इस बार चुनाव वे बतौर निर्दलीय प्रत्याशी लड़ेंगे। चुनाव लड़ने से लेकर हरीश रावत से करीबी पर अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता बिशन सिंह बोरा के कई तीखे सवालों का उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया-
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आपके उक्रांद में होने या न होने को लेकर तमाम अटकलें लगाई जाती हैं। आप ही बताएं, उक्रांद में हैं या नहीं ?
- मैं शुरूआत से उक्रांद में रहा हूं, लेकिन वर्ष 2012 में जो कुछ हुआ उसके बाद से मैं उक्रांद में नहीं हूं। 

आप राज्य आंदोलनकारी रहे हैं, लेकिन गैरसैंण स्थाई राजधानी के मसले पर आपने चुप्पी साध ली? 
- ऐसा नहीं है। गैरसैंण में विधानसभा भवन बन रहा है, कई अन्य काम हो रहे हैं। इस काम में हमारा भी योगदान रहा होगा, मेरा मानना है कि वहां जनभावना के अनुरूप काम हुआ है। 
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क्या वजह रही कि 2002 में चार विधानसभा सीटें जीतने वाला उक्रांद 2012 में एक सीट पर आकर सिमट गया?
- उक्रांद के  प्रति लोगों में सहानुभूति है। लोग उसे इस नजर से देखते हैं कि यह उनका हितैषी है, लेकिन कुछ कमियां रही हैं, जिसके चलते यह सब हुआ है। 

आप आगामी विधानसभा किसी पार्टी से लड़ेंगे या निर्दलीय?
- मेरा राष्ट्रीय पार्टी से चुनाव लड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता। मैं 2017 का चुनाव निर्दलीय लड़ूंगा।

क्या आप मानते हैं कि 1996 के लोकसभा चुनाव में राज्य नहीं तो चुनाव नहीं का नारा उक्रांद के लिए आत्मघाती फैसला रहा?
- उक्रांद को जनता का जबरदस्त समर्थन था, लेकिन चुनाव बहिष्कार का निर्णय हमारे लिए नुकसानदायी रहा।  
 
दो बार यमुनोत्री विधानसभा से जीतने के बाद अब धनौल्टी से लड़ने की तैयारी है। ये राजनीतिक अवसरवादिता नहीं है?
- मेरी तैयारी यमुनोत्री और धनौल्टी दोनों विधानसभा क्षेत्रों से है। कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर तय करूंगा कि कहां से चुनाव मैदान में उतरना है। 

यमुनोत्री किसके भरोसे छोड़ेंगे। क्या पत्नी को मैदान में उतार रहे हैं ?
- अभी ऐसा कुछ नहीं है। क्षेत्र की जनता के साथ बैठकर ही निर्णय होगा। 

सीएम ने खरशाली में रोपवे व मास्टर प्लान की घोषणा की, लेकिन आपने इसमें रुचि नहीं दिखाई?
- ऐसा नहीं है। मेरी समझ से केंद्र से इसकी स्वीकृति मिल चुकी है और इस पर काम हो रहा है।

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