गैरसैंण: सदन से सड़क तक हंगामा, 15 मिनट में 7 विधेयक पेश
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सोमवार को गैरसैंण में शुरू हुए उत्तराखंड विधानसभा सत्र के पहले दिन सदन के अंदर से बाहर तक हंगामा होता रहा। सदन के अंदर सीएम के सचिव के कथित सीडी कांड को लेकर भाजपा ने वेल में आकर विरोध जताया तो सदन के बाहर विभिन्न संगठन मांगों को लेकर सड़कों को घेरे रहे। प्रश्नकाल और शून्यकाल भी विपक्ष के विरोध की भेंट चढ़ गया।
विरोध के बीच ही संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण से संबंधित दो विधेयक सदन पटल पर रखे। इसके बाद शाम को लगभग 15 मिनट में ही अनुदान मांगों सहित सात विधेयक सदन में पेश कर दिए गए।
सोमवार सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट सीडी मामले को लेकर सीट से उठ खड़े हुए। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के आग्रह के बाद वे शांत हुए, तभी पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि अर्पित की जा सकी। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन का शोक प्रस्ताव पढ़ा और दो मिनट का मौन रखा गया।
इसके तुरंत बाद भाजपा सदस्य वेल में उतर आए। विपक्ष के तेवर देखते हुए अध्यक्ष को दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष के विरोध के चलते प्रश्नकाल और शून्यकाल भी नहीं हो पाए।
वित्त मंत्री ने पेश की अनुदान मांगे, विपक्ष ने फाड़ डाला परचा
सरकार ने रखी अनुदान मांगे
भोजनावकाश के बाद शाम चार बजे शुरू हुई सदन की कार्यवाही करीब 15 मिनट ही चली। इस दौरान संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने 4788.0640 करोड़ की अनुदान मांगे सदन पटल पर रखी। इन अनुदान मांगों में 3815.4447 करोड़ रुपये प्लान और 972.6193 करोड़ रुपये नॉन प्लान बजट से संबंधित है।
अनुदान मांगों के जरिए सरकार ने यह जाहिर किया कि उसका फोकस योजनाओं पर है। अनुदान मांगों में प्लान के लिए नॉन प्लान की तुलना में पांच गुना अधिक धन की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही सात और विधेयक सदन पटल पर रखे गए। कर विधेयक हालांकि कार्यसूची में शामिल नहीं थे, लेकिन विपक्ष के हंगामे को देखते हुए सरकार ने इन विधेयकों को भी सदन पटल पर रख दिया। इस बीच सदन में विपक्ष ने खासा हंगामा काटा। अनुदान मांगों के परचों को फाड़ कर पीठ की ओर उछाला गया। विधायक गणेश जोशी आसन की ओर बढ़ने की कोशिश में मार्शल से उलझते रहे।
बीच में भागना चाहती है सरकार: भट्ट
सदन की कार्यवाही के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा सत्र को बीच में ही समाप्त करने की है। कहा कि अनुपूरक अनुसूची के जरिए सात और विधेयक सदन के पटल पर रखवाकर सरकार ने यही संकेत दिया है। सीडी प्रकरण के बाद यह पहला सत्र था और विपक्ष को यह मामला उठाना ही था। नेता सदन और मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विपक्ष के आरोप को सिरे से नकारा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सरकार की नहीं, बल्कि विपक्ष की मंशा है कि सत्र न चले।
सदन के बाद भी गूंजते रहे नारे
गैरसैंण में सरकार विरोधी नारे सदन के बाहर भी गूंजते रहे। विधानसभा में भाजपा विधायक संजय गुप्ता, पुष्कर धामी, मनोज शुक्ला, यतीश्वरानंद गन्ना मूल्य की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। इसी तरह रानीपुर बीएचईएल की समस्याओं का निराकरण न होने का आरोप लगाते हुए आदेश चौहान भी धरने पर बैठे। सभी विधायकों से मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बात की और उनका धरना खत्म करवाया। गैरसैंण की सड़कों पर भी करीब आधा दर्जन संगठन विभिन्न मांगों को लेकर जुलूस निकालकर विरोध जताते रहे।
जानिए, सदन में कब क्या-क्या हुआ?
11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई। भाजपा सदस्यों के वेल में आने के कारण विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने 11.15 पर 11.45 तक के लिए कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा की। 11.45 बजे मार्शल ने बाहर आकर बताया कि सदन का कार्यवाही12.20 बजे तक स्थगित रहेगी।
12.20 पर सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो भाजपा सदस्य फिर सीडी प्रकरण को लेकर वेल में आ गए। 12.35 तक सदन की कार्यवाही चली। इस बीच सरकार ने विपक्ष के विरोध के बीच जरूरी काम निपटाए। 12.35 पर सदन चार बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
भोजनावकाश के बाद शाम को 4 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई और करीब 4.15 बजे स्थगित कर दी गई।
क्या कहते हैं सत्तापक्ष और विपक्ष
भाजपा केवल विरोध के लिए विरोध कर रही है। विपक्ष को रचनात्मक होना चाहिए। जिस अधिकारी की बात की जा रही है वह केंद्र में है। भाजपा जांच करा ले। फिर सीबीआई नाम की संस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। सदन की कार्यवाही न चलने देने से सबका नुकसान है।
-मुख्यमंत्री हरीश रावत
सीडी प्रकरण कोई छोटा-मोटा नहीं है। यह प्रशभनकाल से भी अधिक महत्वपूर्ण है। सरकार इससे बचना चाह रही है। हमने सीबीआई जांच की मांग की है और हम मूल सीडी सौंपने को भी तैयार है। गैरसैंण सत्र के नाम पर दिखावा किया जा रहा है। -नेता प्रतिपक्ष -अजय भट्ट, नेता प्रतिपक्ष