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उपनलकर्मियों की हड़ताल दून अस्पताल में मरीजों की देखभाल में दिक्कत, सरकारी, निजी नर्सिंग कालेजों से बुलायी नर्सिंग की छात्राएं
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दून अस्पताल के उपनल कर्मियों की ओर से दो माह से जारी हड़ताल के चलते मरीजों की देखभाल में दिक्कतें खड़ी हो गई हैं। कर्मियों के कार्य बहिष्कार के चलते पटरी से उतरी व्यवस्था को संभालने के लिए अब मेडिकल कॉलेज व अस्पताल प्रशासन ने उत्तरांचल नर्सिंग कॉलेज, स्टेट नर्सिंग कॉलेज और कंबाइंड नर्सिंग इंस्टीट्यूट में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही छात्राओं को मरीजों की देखभाल के लिए वैकल्पिक रूप से बुलाया है।
राजकीय दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केसी पंत ने बताया कि नर्सिंग स्टाफ की कमी को देखते हुए सीनियर छात्राओं को बुलाया गया है, जिनकी मदद से मरीजों का इलाज करने के साथ देखभाल की जा रही है। डॉ. पंत ने बताया कि अस्पताल में तैनात 600 से अधिक उपनल कर्मियों के कार्य बहिष्कार से पैदा हुई अव्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार और स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर पर वार्ता का दौर जारी है और जल्द ही कोई निर्णय हो सकता है। दून अस्पताल में कार्यरत 600 से अधिक उपनलकर्मी अस्पताल के ओपीडी से लेकर पैथोलॉजी में योगदान दे रहे थे।
कर्मियों के कार्य बहिष्कार से अस्पताल में मरीजों के इलाज में दिक्कतें आ रही हैं। मरीजों व तीमारदारों को ओपीडी का पर्चा बनवाने से लेकर पैथोलॉजी जांच कराने तक में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलित कर्मियों का कहना है कि जब तक मांगे मंजूर नहीं की जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उपनल कर्मियों से कोरोनाकाल के दौरान सेवाएं ली गईं थी, पर 30 मार्च को इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं थी।
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राजकीय दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केसी पंत ने बताया कि नर्सिंग स्टाफ की कमी को देखते हुए सीनियर छात्राओं को बुलाया गया है, जिनकी मदद से मरीजों का इलाज करने के साथ देखभाल की जा रही है। डॉ. पंत ने बताया कि अस्पताल में तैनात 600 से अधिक उपनल कर्मियों के कार्य बहिष्कार से पैदा हुई अव्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार और स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर पर वार्ता का दौर जारी है और जल्द ही कोई निर्णय हो सकता है। दून अस्पताल में कार्यरत 600 से अधिक उपनलकर्मी अस्पताल के ओपीडी से लेकर पैथोलॉजी में योगदान दे रहे थे।
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कर्मियों के कार्य बहिष्कार से अस्पताल में मरीजों के इलाज में दिक्कतें आ रही हैं। मरीजों व तीमारदारों को ओपीडी का पर्चा बनवाने से लेकर पैथोलॉजी जांच कराने तक में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलित कर्मियों का कहना है कि जब तक मांगे मंजूर नहीं की जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उपनल कर्मियों से कोरोनाकाल के दौरान सेवाएं ली गईं थी, पर 30 मार्च को इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं थी।
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