उत्तरप्रदेश में उत्तराखंड वालों की 'नो एंट्री'
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उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों को यूपी में रोकने का सिलसिला दूसरे दिन गुरुवार को भी जारी रहा।
यूपी के विभिन्न हिस्सों में रूट संचालन एवं अन्य दस्तावेजों के जांच के नाम पर लगभग एक दर्जन बसों को रोककर उन्हें थानों में लाया गया। इससे यात्रियों को भारी परेशानी हुई। उत्तराखंड के बस चालकों-कंडक्टरों के साथ हाथापाई का भी आरोप है।
इससे निगम कर्मचारियों में भारी रोष है। इस मामले को राज्य निगम कर्मचारी यूनियन ने मुख्य सचिव के समक्ष उठाया है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड परिवहन निगमों के बीच बस समझौता नहीं होने से दोनों तरफ से इस तरह की कार्यवाही होती रहती है, लेकिन इस बार लगातार दो दिन से उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों को रूट संचालन के नाम पर रोका जा रहा है।
तीन दिन पहले यूपी की कुछ बसों का चलान उत्तराखंड में हुआ था। इसके बाद बुधवार को यूपी ने बरेली, पीलीभीत, मुरादाबाद, छुटमलपुर, मुजफ्फरनगर में पचास से अधिक बसों का चलान कर थानों में खड़ा किया गया।
बस समझौता करने की मांग
गुरुवार को भी यात्रियों से भरी आधा दर्जन बसों को नजीबाबाद और छुटमलपुर में सीज किया गया। राज्य निगम कर्मचारी यूनियन का प्रतिनिधिमंडल इस मामले में गुरुवार को मुख्य सचिव सुभाष कुमार से मुलाकात कर यूपी के साथ बस समझौता करने की मांग को उठाया।
बस समझौता नहीं होने से कितनी बसें एक दूसरे राज्य में संचालित की जा सकती है इसका अनुपात तय नहीं हुआ है। ऐसे में यूपी में कई बार इस तरह की कार्यवाही होती है, जिससे यात्रियों को परेशानी के अलावा बसों के ड्राइवर कंडक्टरों के साथ मारपीट तक होती है।
मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने मामले में यूपी के मुख्य सचिव से वार्ता कर जल्द विवाद निस्तारित करने का आश्वासन दिया है। प्रतिनिधिमंडल में यूनियन के अध्यक्ष संतोष रावत और महामंत्री रवि पचौरी सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे।