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Unlock-2 in Uttarakhand : ट्रेवल एजेंसियों को पुनर्जीवित करना है तो जोश से शुरू हो चारधाम यात्रा

Wed, 01 Jul 2020 04:01 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 01 Jul 2020 04:01 PM IST
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Unlock-2 in Uttarakhand :  If the travel agencies have to be revived, then Chardham Yatra starts with enthusiasm
चारधाम यात्रा - फोटो : AmarUjala

कोरोना महामारी के बीच केंद्र और राज्य सरकार ने आमजन को राहत देने के लिए बेशक कई ठोस कदम उठाए हैं। लेकिन, प्रदेश में चारधाम यात्रा शुरू न होने से संयुक्त रोटेशन से जुड़े बस संचालकों, टैक्सी, मैक्सी, टेंपो ट्रेवलर संचालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कॉमर्शियल वाहनों के पहिये पिछले करीब चार माह से थमे हुए हैं। ट्रेवलर संचालकों का कहना है ट्रेवल एजेंसियों को पुनर्जीवित करना है तो सितंबर में पूरे जोश के साथ चारधाम यात्रा शुरू करनी चाहिए।

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उत्तराखंड परिवहन महासंघ के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल 30 जून तक संयुक्त रोटेशन की 5000 बसों को चारधाम यात्रा पर रवाना किया जा चुका था। जिसमें 173000 तीर्थयात्रियों ने यात्रा की। उससे संचालकों को 24 करोड़ रुपये की अच्छी आमदनी भी हुई। इन बस संचालकों ने एक बार की यात्रा में औसतन 50 हजार रुपये की कमाई की। लेकिन, इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते उपजे हालात से यात्रा ही शुरू नहीं हो पाई।
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इससे वाहन संचालकों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि ड्राइवर-कंडक्टरों को कर्ज लेकर जिंदगी गुजर बसर करनी पड़ रही है। उत्तराखंड परिवहन महासंघ के अध्यक्ष सुधीर राय की मानें तो इस साल यात्रा न होने से अर्थव्यवस्था पटरी से उतर गई है। संयुक्त रोटेशन से जुड़े 1650 वाहन संचालकों के साथ-साथ चालक-परिचालकों के परिवार समेत डेढ़ लाख से अधिक लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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संयुक्त रोटेशन के साथ टैक्सी-मैक्सी और ट्रेवल एजेंसी एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यात्रा का पीक सीजन लॉकडाउन में निकल गया है। लेकिन, सितंबर से यात्रा जोश के साथ शुरू होनी चाहिए ताकि ट्रेवल संचालकों को थोड़ी संजीवनी मिल सके। 

टैक्सी-मैक्सी का संचालन न होने से 200 करोड़ का नुकसान

कोरोना संकट के चलते टैक्सी-मैक्सी का संचालन न होने से जीप, कमांडर, सूमो, बोलेरो जैसे वाहन संचालकों को करीब 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। ऋषिकेश जीप, सूमो, कमांडर एसोसिएशन के अध्यक्ष भगवान सिंह राणा की मानें तो इससे जुड़े तमाम संचालक यात्रा के दौरान हर साल औसतन दो लाख की कमाई करते हैं। यात्रा में प्रदेश में 10,000 से अधिक बोलेरो, जीप, कमांडर, सूमो जैसे वाहन संचालन होते हैं। लेकिन इस साल वाहनों का संचालन नहीं होने से 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। 

ट्रेवल इंडस्ट्रीज इस समय सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। इस इंडस्ट्री को उबारना है तो प्रदेश सरकार को सितंबर में चारधाम यात्रा पूरे जोश के साथ शुरू करवानी चाहिए। परिवहन विभाग वाहनों के लिए शून्य सत्र लागू करें। राज्य सरकार डीजल पर लागू जीएसटी को पूरी तरह माफ करें। तभी उनकी स्थिति सुधर सकती है।
- सुधीर राय, अध्यक्ष, उत्तराखंड परिवहन महासंघ

लॉकडाउन में आर्थिक संकट का सामना कर रहे टैक्सी संचालकों, चालकों, परिचालकों को वित्तीय मदद करने के लिए सरकार को आगे आना चाहिए। चारधाम यात्रा के साथ ही राज्य के विभिन्न इलाकों में वाहनों के संचालन की अनुमति दी जाए। परिवहन विभाग की ओर से वसूले जाने वाले टैक्स एक साल के लिए माफ किए जाएं।
- अनमोल अग्रवाल, सचिव, दून ट्रेवल्स ऑनर्स एसोसिएशन

प्रसाद, फूल, खिलौने के व्यापारी मायूस

कोरोना के चलते धार्मिक स्थल पूरी तरह बंद हैं। इसके चलते मंदिरों पर आश्रित दुकानदारों का व्यापार भी चौपट है। प्रसाद, फूल, फोटो आदि व्यापारी तीन माह से बेरोजगार हैं। श्री टपकेश्वर महादेव मंदिर (गढ़ी कैंट) की बात करें तो यहां करीब 12 दुकानें हैं।

इन सबकी कमाई पूरी तरह मंदिर पर आश्रित है। व्यापारियों को आस थी कि गर्मियों की छुट्टी में मंदिर में रौनक होने से व्यापार में लाभ होगा, लेकिन कोरोना से सब कुछ चौपट हो गया है। कई व्यापारी कर्ज लेकर गुजारा कर रहे हैं।

प्रसाद-थाली की दुकान तीन माह से बंद हैं। उनके पास इसके सिवाय कमाई का कोई जरिया नहीं है। दो बच्चे हैं, उनकी स्कूल फीस, राशन का खर्च देने को पैसे नहीं हैं। कोरोना कब तक चलेगा इसका कुछ पता नहीं है। सीजन में प्रतिदिन औसतन 2000-3000 रुपये कमा लेते थे। लेकिन इस बार एक पैसे की कमाई नहीं हुई।
- योगेश काम्बोज, व्यापारी टपकेश्वर मंदिर

मेरी मंदिर के बाहर खिलौने, भगवान की फ्रेम-फोटो की दुकान है। घर का गुजारा दुकान पर निर्भर रहता है। लेकिन दुकान तीन माह से बंद है। लेकिन अब कर्ज लेकर गुजारा करना पड़ रहा है। मई, जून और जुलाई में गर्मियों की छुट्टियां रहती हैं तो पर्यटक व परिवार के साथ लोग अधिक संख्या में मंदिर आते हैं। लेकिन इस बार कुछ नहीं बचा।
- देशराज मित्तल, निवासी पलटन बाजा

कर्ज लेकर बेटे के लिए खरीदी बस, कोरोना ने उम्मीदों पर फेरा पानी

चारधाम यात्रा सीजन अच्छा चलने की उम्मीद पर एक बुजुर्ग पिता ने बेटे को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए कर्ज लेकर बस खरीदी, लेकिन कोराना ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। नई टिहरी निवासी तिलोक चंद रमोला ने अपनी जमा पूंजी, रिश्तेदारों से उधार लेकर और साढ़े 12 लाख रुपये बैंक से लोन लिया।

उसके बाद परिवहन विभाग में बस का पंजीकरण कराया। लेकिन, पिछले चार माह से उनकी नई बस घर के सामने खड़ी है। कोरोना संकट के चलते एक दिन भी बस नहीं चल पाई। रमोला का कहना है इन दिनों वह भारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। एक तरफ जहां जमा पूंजी पूरी खर्च कर दी।

वहीं रिश्तेदार भी अब अपना पैसा मांगने लगे हैं। इसके अलावा बैंक भी हर महीने साढ़े 28 हजार रुपये किश्त जमा करने का नोटिस जारी कर रहा है। फिर भी उसे उम्मीद है कि जल्द चारधाम यात्रा शुरू होगी और उनकी बस यात्रा पर जाएगी। 

लॉकडाउन से 8000 टैक्सियों के पहिए थमे

कोरोना संक्रमण से उपजे हालात और चारधाम यात्रा पर ग्रहण लगने से न सिर्फ संयुक्त रोटेशन से जुड़े बस संचालकों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है, बल्कि प्रदेश के 8000 से अधिक टैक्सी संचालकों को भी करारा झटका लगा है।

टैक्सी एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों की बातों पर यकीन करें तो प्रत्येक संचालक को इस दौरान डेढ़ से दो लाख की चपत लग चुकी है। दून ट्रेवेल्स ऑनर्स एसोसिएशन के सचिव अनमोल अग्रवाल का कहना है कि पूरे प्रदेश के टैक्सी संचालक के सामने आर्थिक संकट खड़ा है। उन्होंने सरकार से आर्थिक पैकेज जारी करने की मांग की थी, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। यदि सरकार की ओर से थोड़ी मदद मिल जाती तो टैक्सी संचालकों के साथ ही चालकों को राहत मिल जाती।

प्रमुख मांगे

>> यूपी समेत अन्य राज्यों की तर्ज पर उत्तराखंड में पूरी यात्री क्षमता के साथ वाहनों के संचालन की अनुमति मिले।
>> प्रदेश सरकार की ओर से डीजल पर जीएसटी में छूट दी जाए।
>> सार्वजनिक वाहन संचालकों के एक साल तक रोड टैक्स समेत अन्य टैक्स माफ किए जाएं।
>> परिवहन विभाग की ओर से सत्र को शून्य किया जाए। ताकि वाहनों की उम्र को एक साल और बढ़ाई जा सके।
>> नई दिल्ली की तर्ज पर सार्वजनिक वाहनों के संचालकों, चालकों-परिचालकों को आर्थिक पैकेज दिया जाए।

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