समाज के लिए कलयुग में भी 'तपस्या' में लीन हैं ये 'साधु'
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उत्तराखंड के चंपावत जिले में समाज के सेवा करने के लिए इस कलयुग में कुछ 'साधु' तपस्या में लीन हैं।
कुदरती न्याय के लिए प्रसिद्ध गोरलदेव मूल मंदिर के महंत जगेंद्र नाथ ने गोलज्यू की सेवा में एक साल तक नंगे पांव रहने और बाल न कटाने का संकल्प लिया है।
चंपावत जिले में रिटायर्ड कमांडर त्रिलोक सिंह बोहरा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय घनानंद जोशी, बुजुर्ग नेता शिवराज चंद जैसे कई ऐसी शख्सियत रही हैं, जिन्होंने समाज से जुड़े मसलों के लिए अपने शरीर को साधने में कामयाबी हासिल की है। इनका समाज में असर भी पड़ा है।
कमांडर बोहरा ने उत्तरांचल राज्य का नाम उत्तराखंड करने की मांग को लेकर करीब 65 महीनों तक दाड़ी और बाल नहीं कटवाए। जबकि घनानंद जोशी ने देवीधुरा में डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर वर्षो नंगे पांव चलते हुए आवाज उठाई। अब गोलज्यू मंदिर के महंत समाज कल्याण के लिए नंगे पांव चल रहे हैं।
उनका कहना है कि जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी एसएस परंगाई ने जिस तरह निस्वार्थ अपने प्रयासों से गोलू देवता के मूल मंदिर का कायाकल्प किया है उससे प्रेरित होकर नंगे पांव रहने का संकल्प लिया है।
सेनानी के प्रयास से अब पूरा हुआ सपना
चंपावत जिले के सबसे अंतिम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे स्वर्गीय घनानंद जोशी ने भी बाराहीधाम देवीधुरा में डिग्री कॉलेज खोलने की मांग को लेकर नंगे पैर रहने का संकल्प लिया था।
वह जीवन के अंतिम पड़ाव तक अपनी मांग को लेकर बिना जूते चप्पल के ही चलते रहे। दो वर्ष पूर्व उनके निधन के बाद देवीधुरा में डिग्री कॉलेज का सपना पूरा हुआ है।
साढ़े पांच साल तक नहीं काटे दाड़ी और बाल
कमांडर त्रिलोक सिंह बोहरा ने राज्य का नाम उत्तराखंड रखने की मांग को लेकर करीब 66 महीने तक दाड़ी बाल नहीं काटने का संकल्प पूरी तरह से निभाया था। तत्कालीन एनडीए सरकार ने अगस्त 2006 में राज्य का नाम उत्तराखंड कर दिया था। जिसके बाद ही कमांडर बोहरा ने अपने दाढ़ी, बाल काटे।