Union Budget 2021: उत्तराखंड में किसी को भाया तो किसी को बजट ने किया निराश, पढ़ें किसने क्या कहा..
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उत्तराखंड में केंद्रीय बजट को किसी ने सराहा तो किसी को निराश मिली। बजट को व्यापारी वर्ग ने जमकर सराहा है। व्यापारियों का कहना है कि बजट में व्यापारियों के साथ ही आमजन का पूरा ख्याल रखा गया है। बजट से घरेलू शेयर बाजार में भरपूर तेजी देखने को मिलेगी। ऑडिट की सीमा पांच से 10 करोड़ तक बढ़ा दी गई है। इससे व्यापारियों को लाभ होगा।
बजट बहुत संतुलित और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए संयमित तरीके से बनाया गया है। व्यापार की दृष्टि से कुछ विशेष उपलब्धियां नहीं होते हुए ठीक-ठाक लगता है। टैक्स देने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रलोभन दिया जाना चाहिए था। 75 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों को आयकर रिटर्न भरने में छूट दिया जाना स्वागत योग्य है। ऑनलाइन व्यवस्था में लगाम लगाई जानी चाहिए थी, जिससे भारतीय बाजार प्रणाली को राहत प्रदान किया जा सके।
-नवीन चंद्र वर्मा, अध्यक्ष, प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल
बजट शानदार है। बजट के बाद घरेलू शेयर बाजारों में भरपूर तेजी देखने को मिली। बजट में घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों को कई राहत का एलान किया है। इससे निवेशकों के उत्साह से व सकारात्मक संदेश से बाजार में तेजी आएगी। कंपनी अधिनियम के तहत छोटी कंपनियों की परिभाषा को पुनर्जीवित करने का प्रयास सराहनीय है। सीनियर सीटिजन को आयकर रिटर्न भरने में छूट भी स्वागत योग्य है। गंभीर कर चोरी के मामलों को छोड़कर मूल्यांकन अवधि को छह वर्ष से घटाकर तीन वर्ष करने का कदम भी सराहनीय है।
-राजेश अग्रवाल, प्रांतीय संयुक्त महामंत्री, प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल
बजट सराहनीय है। सरकार ने सोने में कस्टम ड्यूटी को घटा कर 12.50 से 7.5 प्रतिशत कर दिया है। इसका सभी सराफा व्यवसायी उत्साहित हैं। सरकार के इस फैसले से सराफा व्यापार की दिक्कतें कम होने की उम्मीद है। इसके अलावा सरकार ने कई ऐसे कदम बजट में उठाए हैं, जिससे कोरोना से पीड़ित व्यापारियों और आम जनता को लाभ मिलेगा।
-सुनील मैसोन, अध्यक्ष, दून सराफा मंडल
बजट स्वागत योग्य है। बजट में सरकार ने बाजार और उद्योगों को प्रोत्साहित किए जाने के प्रावधान किए हैं। बुजुर्ग व्यक्तियों को आयकर रिटर्न में छूट का फैसला स्वागत योग्य है। इससे बुजुर्ग व्यापारियों को काफी राहत मिलेगी। ऑडिट की सीमा भी दस करोड़ तक करने से छोटे व्यापारियों को लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर बजट संतुलित और आमजन को राहत देने वाला है।
-पंकज मैसोन, अध्यक्ष, दून वैली व्यापार मंडल
नौकरीपेशा लोग बोले- बजट से मिली निराशा
नौकरीपेशा लोगों का कहना है कि आम बजट से उन्हें निराशा हाथ लगी है। कर्मचारी वर्ग आयकर सीमा में किसी तरह की रियायत न मिलने से सबसे ज्यादा मायूस है। बढ़ती महंगाई और कोरोना काल के इस दौर में कोई छूट न मिलना निराश करता है।
कर्मचारियों के लिए बजट मायूस करने वाला है। कर्मचारी उम्मीद लगाए बैठे थे कि आयकर स्लैब में छूट मिलेगी। बजट में ऐसा कोई प्रावधान न आने से कर्मचारी निराश हैं। -गिरिजा शंकर चतुर्वेदी, पूर्व जिलाध्यक्ष, उत्तराखंड राजस्व संग्रह अमीन संघ
कर्मचारियों के लिए बजट में कुछ भी नहीं मिला। 75 साल से अधिक के पेंशनर्स को आयकर में छूट मिली है। नौकरीपेशा को इसमें सिर्फ नाउम्मीदी ही हाथ लगी है।
- दीपक बेनीवाल, कार्यवाहक अध्यक्ष, ऊर्जा कामगार संगठन
आम बजट सरकारी कर्मचारियों के लिहाज से ठीक नहीं लग रहा है। कोरोना काल में सबसे अधिक पर्यटन विभाग और पर्यटन कारोबार को नुकसान हुआ। इस हिसाब से भी बजट में कुछ खास प्रावधान नहीं हैं।
- राजेश रमोला, अध्यक्ष, कर्मचारी संगठन गढ़वाल मंडल विकास निगम (सीटू)
कर्मचारी मध्यमवर्ग से माना जाता है। मध्यम वर्ग के लिए केंद्र सरकार ने बजट में कुछ भी नहीं दिया। आयकर सीमा में कोई छूट न मिलने से कर्मचारी मायूस हैं।
- प्रमोद सिंह रावत, जिलाध्यक्ष, उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ
रसोई गैस के दाम में नहीं मिली रियायत, महिलाएं मायूस
रसोई गैस के दामों में रिरायत न मिलने से महिलाओं में निराशा है । आगे पढ़िए किसने क्या कहा..
आम बजट से महिलाओं को खासी उम्मीदें थीं, लेकिन महिला वर्ग के लिए कुछ खास नहीं रहा। हालांकि, किसान, उद्योग व अन्य क्षेत्र के लिए बजट अच्छा रहा।
-बीना, गांधीग्राम
हमें उम्मीद थी कि सरकार रसोई गैस में सब्सिडी को बढ़ाएगी, ताकि महंगी रसोई गैस से निजात मिलती। पिछले कई महीने से लगातार रसोई गैस के दाम बढ़ रहे हैं और सब्सिडी भी खत्म होने के कगार पर है।
-गुड़िया जायसवाल, राजीव नगर
सरकार को रसोई गैस के दाम में राहत देनी चाहिए थी। रसोई गैस के दाम बढ़ने से सबसे ज्यादा महिलाएं प्रभावित होती हैं। महिला स्वरोजगार को बढ़ावा देना चाहिए था। अन्य वर्ग का खासा ध्यान रखा गया है
-नीना, मोहनी रोड
कुल मिलाकर बजट अच्छा रहा, लेकिन महिला वर्ग को कोई बड़ी सौगात नहीं मिली। अच्छा होता कि सरकार महंगाई को कम करने के लिए कोई बड़ी घोषणा करती।
-अनिता, लक्खीबाग
रेल बजट में उत्तराखंड को नहीं मिले कोई नई सौगात
रेल बजट में नई रेल परियोजनाओं और ट्रेनों के संचालन को लेकर कोई घोषणा नहीं होने से लोग निराश हैं। यात्रियों का कहना है कि उन्हें कोरोना संकट के दौर में किराये में कमी के साथ ही नई ट्रेनों के संचालन और सुविधाओं को लेकर नई घोषणाएं होने की उम्मीद थी, लेकिन रेल बजट में सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देने के अलावा कुछ भी प्रावधान नहीं किए गए हैं।
सेवानिवृत्त अधिकारी वीपी पांडे का कहना है कि उन्हें देहरादून से लखनऊ समेत अन्य स्थानों के लिए नई ट्रेनों के संचालन को लेकर घोषणा की उम्मीद थी, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। कोरोना संकट के दौर में यात्री किराये में कमी पर भी सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया।
वहीं, मोहकमपुर निवासी लेखक एवं कवि श्रीकांत श्री का कहना है कि सरकार और रेल मंत्रालय ने कोई खास बजट पेश किया नहीं है। वहीं, नथुआवाला निवासी अवनीश मलासी का मानना है कि रेल बजट में उत्तराखंड में नई रेल परियोजनाओं के साथ ही नई ट्रेनों के संचालन की उम्मीद थी, लेकिन सरकार और रेल मंत्रालय ने एक भी घोषणा नहीं की, जो निराशाजनक है।
जसवीर सिंह हलधर ने कहा कि रेल बजट में यात्री किराये में कमी की उम्मीद जताई जा रही थी। सरकार को देहरादून से नई दिल्ली और लखनऊ के अलावा पंजाब, जम्मू कश्मीर के लिए नई ट्रेनों के संचालन की घोषणा करनी चाहिए थी।
दून-पांवटा साहिब रेल परियोजना की घोषणा नहीं होने से उद्यमियों में निराशा
रेल बजट में देहरादून-पांवटा साहिब रेल परियोजना को लेकर कोई घोषणा नहीं होने से उद्यमियों में निराशा है। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता का कहना है कि दून-पांवटा साहिब रेल परियोजना को लेकर 1962 से चर्चाएं जारी हैं। कई बार सर्वे भी किया गया, लेकिन छह दशक बाद भी योजना को मंजूरी नहीं मिल पाई है, जो निराशाजनक है। फूड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन उत्तराखंड के समन्वयक अनिल मारवाह ने कहा कि उम्मीद थी कि बजट में इस रेल परियोजना को लेकर जरूर घोषणा की जाएगी, लेकिन इस महत्वाकांक्षी परियोजना का जिक्र ही नहीं किया गया।