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अच्छी खबर: इस साल कैलाश भू क्षेत्र को विश्व धरोहर घोषित हो सकता है यूनेस्को

Tue, 14 Jan 2020 08:26 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 14 Jan 2020 08:26 PM IST
सार

  • बीते साल संभावित सूची में शामिल हो चुका है इसका प्रस्ताव  
  • पर्यटकों की संख्या में होगा कई गुना इजाफा, बढ़ेंगे रोजगार के मौके

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UNESCO may declare Kailash mansarovar area as world heritage this year
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कैलाश मानसरोवर के लिए जाने वाले सभी प्राचीन मार्गों और इनसे जुड़े पवित्र तीर्थ स्थलों को वर्ल्ड हेरिटेज (विश्व धरोहर) घोषित करने के प्रस्ताव को यूनेस्को ने पिछले साल स्वीकार करके इसे संभावित सूची में शामिल किया था। यूनेस्को इस साल कैलाश भू क्षेत्र को विश्व धरोहर घोषित करने का फैसला ले सकता है।

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यदि यूनेस्को ने इन मार्गों और कैलाश भू क्षेत्र को विश्व धरोहर घोषित कर दिया तो इससे यहां आने वाले राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में कई गुना इजाफा होने की उम्मीद है। साथ ही इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों को रोजगार के भी काफी अवसर मिलेंगे।  
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बता दें कि भारत, चीन और नेपाल अंतरराष्ट्रीय संस्था ईसीमोड (इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट) के तहत 2013 से हिमालय के कैलाश भू क्षेत्र के संरक्षण के लिए आपसी सहयोग से काम कर रहे हैं।
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पवित्र कैलाश भू क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना के तहत अब तक तीनों देश कैलाश पर्वत के आसपास अपने-अपने क्षेत्रों में विभिन्न तरह के अध्ययन और लोगों को आजीविका से जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। साथ ही परियोजना के तहत इन धरोहरों को संरक्षित करने के लिए अन्य कार्य भी किए जा रहे हैं।

कई तीर्थ स्थल भी विश्व धरोहर के प्रस्ताव में शामिल 

परियोजना में भारत की ओर से नोडल एजेंसी जीबी पंत हिमालय पर्यावरण विकास संस्थान के निदेशक डॉ.आरएस रावल ने बताया कि कैलाश मानसरोवर जाने वाले सभी प्राचीन मार्गों जागेश्वर-गंगोलीहाट-पातालभुवनेश्वर मार्ग, पूर्णागिरि से रामेश्वर-हाट कालिका होकर मानसरोवर जाने वाला मार्ग, पिथौरागढ़ से झूलाघाट नेपाल होकर जाने वाले मार्गों को विश्व धरोहर वाले प्रस्ताव में शामिल किया गया है।

डॉ. रावल ने यह भी बताया कि कैलाश क्षेत्र के बारे में विस्तृत जानकारियों वाला प्रस्ताव भारतीय वन्य जीव संस्थान ने तैयार करके पिछले साल मई में भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के माध्यम से नामांकन के लिए यूनेस्को भेज दिया था।  

यूनेस्को ने बीते साल मई में इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए विश्व हेरिटेज की संभावित सूची में शामिल कर लिया था। डॉ. रावल के मुताबिक यूनेस्को परीक्षण आदि में एक साल का समय लगता है। इसलिए इस साल के भीतर कैलाश क्षेत्र को विश्व हेरिटेज घोषित करने के बारे में फैसला हो जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा यूनेस्को में नामांकन हो जाने के बाद इन धरोहरों के रखरखाव और संतुलित विकास का कार्य शुरू होगा। 

विश्व धरोहर के प्रस्ताव में कैलाश मानसरोवर के प्राचीन मार्गों के अलावा इन मार्गों पर पड़ने वाले पवित्र तीर्थ स्थलों पाताल भुवनेश्वर, छिपलाकेदार, थल केदार, पंचेश्वर, छोटा कैलाश, कालापानी सहित कई अन्य स्थलों को भी वर्ल्ड हेरिटेज के प्रस्ताव में शामिल किया गया है।

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