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UKSSSC: धांधली सामने आने पर मुकदमा तो दर्ज कराया, लेकिन नकलचियों पर प्रतिबंध नहीं लगा पाया आयोग

Mon, 22 Aug 2022 07:00 AM IST
अलका त्यागी आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 22 Aug 2022 07:00 AM IST
सार

फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा में दस साल के प्रतिबंध का निर्णय लेने के बावजूद आयोग इसे लागू नहीं करवा पाया। माना जा रहा है कि इससे नकल कराने वाला गिरोह आगे बढ़ता चला गया।

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UKSSSC Filed case but could not ban copycats after found Rigged in exam
यूकेएसएससी - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक करने वालों के खिलाफ उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने मुकदमा तो दर्ज करा दिया, लेकिन इस मामले में शामिल अभ्यर्थियों पर कोई पुख्ता कार्रवाई नहीं कर पाया। स्थिति यह है कि फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा में दस साल के प्रतिबंध का निर्णय लेने के बावजूद आयोग इसे लागू नहीं करवा पाया। माना जा रहा है कि इससे नकल कराने वाला गिरोह आगे बढ़ता चला गया।

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फॉरेस्ट गार्ड भर्ती: दस साल के प्रतिबंध का निर्णय कागजों में

आयोग ने वर्ष 2020 में फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा कराई। हरिद्वार के सात केंद्रों पर बड़े पैमाने पर ब्लुटूथ से नकल का मामला सामने आया। पुलिस की जांच में 47 अभ्यर्थियों पर मुकदमा दर्ज किया गया। आयोग ने सात केंद्रों की परीक्षा रद करने के बाद दोबारा परीक्षा कराई। इसके साथ ही निर्णय लिया कि नकल करते पकड़े गए छात्रों को आयोग की परीक्षाओं से दस साल के लिए प्रतिबंधित किया जाएगा, लेकिन यह निर्णय कभी लागू नहीं किया जा सका।

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वीपीडीओ भर्ती: परीक्षा रद हुई कार्रवाई कुछ भी नहीं

2016 में आयोग ने वीपीडीओ भर्ती परीक्षा कराई। इसमें 196 अभ्यर्थी पास हुए, लेकिन परीक्षा विवादों में घिर गई। ओएमआर शीट से छेड़छाड़ के तथ्य सामने आने के बाद परीक्षा रद हुई और दोबारा कराई गई। मामले में विजिलेंस ने मुकदमा तो दर्ज किया, लेकिन आयोग के स्तर चिन्ह्ति परीक्षार्थियों को प्रतिबंधित करने जैसा कोई सख्त फैसला नहीं लिया गया।

यूपीसीएल-पिटकुल जेई भर्ती:

यूपीसीएल और पिटकुल में जेई के 252 पदों पर भर्ती के लिए आयोग ने 2017 में परीक्षा कराई थी। इस परीक्षा में रुड़की के एक ही कोचिंग सेंटर के 65 अभ्यर्थी पास हो गए थे। मामले में आयोग ने जांच बैैठाई थी। दोबारा परीक्षा कराई गई लेकिन अभ्यर्थियों को प्रतिबंधित करने का फैसला लेने के बाद भी उसे अमल में नहीं लाया जा सका।

टीजी-2 भर्ती:

यूपीसीएल, यूजेवीएनएल में टेक्निकल ग्रेड-2(टीजी-2) के पदों पर भर्ती के लिए आयोग ने 2017 में परीक्षा कराई। इसका रिजल्ट आयोग ने 2020 में जारी किया और प्रमाण पत्रों का सत्यापन किया। एक विधायक की शिकायत के बाद कोषागार में रखी हुई ओएमआर और उनकी कॉपी की जांच कराई गई। पता चला कि छह ओएमआर से छेड़छाड़ हुई थी। मामले में आयोग ने मुकदमा दर्ज कराया, लेकिन परीक्षा से प्रतिबंधित करने का निर्णय लागू नहीं कर पाया।

अब तक आयोग ने की कार्रवाई

1- प्रमाणपत्र सत्यापन में एक छात्र के फर्जी दस्तावेज पकड़े गए, जिसे आयोग की परीक्षा से
डिबार किया गया।
2- एलटी भर्ती में सॉल्वर गैंग की मदद से परीक्षा देने वाले 12 अभ्यर्थियों को प्रतिबंधित
किया गया।
3- परीक्षा केंद्र से ओएमआर शीट की तस्वीर लेने वाले एक छात्र को आयोग की परीक्षाओं से
प्रतिबंधित किया गया।

देश में परीक्षा संपन्न कराने वाली संस्थाएं करती हैं कार्रवाई

कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) जैसी तमाम संस्थाएं ऐसी हैं जो नकल करते पकड़े जाने पर अभ्यर्थियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करती हैं। नीट का पेपर लीक होने के बाद नकलची छात्रों को आगामी परीक्षाओं से डिबार करते हुए उनकी सूची भी जारी की गई थी। एसएससी भी ऐसे उम्मीदवारों को परीक्षा से पांच से दस साल के लिए प्रतिबंधित करता आया है।

हमने कुछ मामलों में छात्रों को प्रतिबंधित करने के फैसले लिए हैं, लेकिन फॉरेस्ट गार्ड सहित कई भर्तियों में मामला न्यायालय में होने की वजह से हम प्रतिबंधित नहीं कर पाए। 
- संतोष बडोनी, पूर्व सचिव, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग

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