एकता ही नहीं, चुनाव चिन्ह भी नहीं बचा पाई यूकेडी
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वजूद की लड़ाई लड़ रहे उत्तराखंड क्रांति दल को चुनाव आयोग ने भी झटका दिया है। कुर्सी चुनाव चिन्ह तो पहले ही छिन गया था, इसके बाद कप प्लेट भी हाथ से गया। अब तो उक्रांद की मांग ठुकराते हुए आयोग ने सिलेंडर का चुनाव चिन्ह देने से भी मना कर दिया है।
पिछले दो तीन सालों में उक्रांद में कई फाड़ हुई। पार्टी बंटती गई तो चुनाव चिन्ह भी गायब होते गए। पिछले लोकसभा चुनाव में कुर्सी वाला सिंबल छिन गया।
इसके बाद विधानसभा चुनाव में कप प्लेट मिला लेकिन बाद में एक और टूट हुई तो यह सिंबल भी जाता रहा।
दल की मान्यता भी गई
इस बार उक्रांद ने सिलेंडर का सिंबल देने की मांग की लेकिन केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने उक्रांद की यह मांग भी खारिज कर दी है।
साथ ही सीईओ को निर्देशित किया है कि यह दल मान्यता प्राप्त नहीं है। इसलिए इन तीनों को अलग कोई सिंबल दिया जाए।
उधर, सीईओ राधा रतूड़ी ने उक्रांद के स्टार प्रचारकों के लिए वाहन परमिट देने से भी मना कर दिया है। सीईओ ने कहा कि यह व्यवस्था मान्यता प्राप्त दलों के लिए होती है। चूंकि अब उक्रांद इस श्रेणी में नहीं है लिजाहा यह सुविधा नहीं दी जा सकती।
इस बार चुनाव में होंगे 34 करोड़ खर्च
इस बार उत्तराखंड के लोकसभा चुनाव पर 34 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सीईओ कार्यालय ने इसका प्रस्ताव पहले ही सरकार को भेज दिया था।
2009 के चुनाव पर प्रदेश में 19 करोड़ का खर्च हुआ था। लोकसभा चुनाव का सारा खर्च केंद्रीय कानून मंत्रालय से मिलता है। लेकिन पहले संबंधित राज्य सरकार को चुनावी बजट देना होता है।
लोकसभा चुनाव में पूरा खर्र्च केंद्र वहन करता है और विधानसभा चुनाव में आधा खर्च राज्य सरकार को देना होता है।