UK Board 10th-12th Result 2020: माता-पिता की बीमारी और गरीबी को मात देकर नाजिया ने हासिल किया मुकाम
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मन में कुछ करने का जुनून हो तो गरीबी भी आड़े नहीं आती। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली नाजिया और विशाल ने कड़ी मेहनत के बल पर हाईस्कूल में मेरिट सूची में जगह बनाकर माता-पिता का नाम रोशन किया है।
UK Board 10th-12th Result 2020: मजदूरों के बेटों ने बढ़ाया माता-पिता का मान, मेरिट में बनाया स्थान
मदर कॉलोनी महेशपुरा निवासी अशफाक एक दुकान पर मोटर मैकेनिक हैं। छह महीने पूर्व उन्हें लकवा हो गया, जबकि पत्नी शबनम तीन वर्षों से रीढ़ की हड्डी के रोग से ग्रस्त हैं। आय का कोई स्रोत नहीं होने के कारण परिवार के आगे आर्थिक संकट खड़ा हो गया।
बड़े पुत्र आसिफ को 12वीं, छोटे पुत्र तालिब को 10वीं के बाद बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। दोनों पार्लर और फर्नीचर की दुकान पर कामकर परिवार पाल रहे हैं।
भाइयों ने नाजिया को दो वर्ष पूर्व जीबी पंत इंटर कॉलेज में प्रवेश दिलाया। प्रधानाचार्य अजय शंकर कौशिक ने नाजिया की प्रतिभा को देखते हुए शुल्क माफ कर किया।
बुधवार को जब रिजल्ट आया और नाजिया ने 93.40 फीसदी अंक हासिल कर मेरिट में 24वीं जगह बनाई तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। छात्रा की उपलब्धि से गदगद प्रधानाचार्य कौशिक ने नाजिया की हर संभव मदद करने का भरोसा दिलाया है।
नाजिया बताती हैं कि वर्ष 2019 देहरादून में राज्य स्तर पर हुई गाने की प्रतियोगिता में वह प्रथम स्थान और संस्कृत श्लोकोच्चारण में भी प्रथम स्थान हासिल कर चुकी हैं।
संस्कृत भाषा में महारथ हासिल
नाजिया को हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी के साथ संस्कृत भाषा में भी महारथ हासिल है। गायन में संगीत शिक्षिका शिल्पी चतुर्वेदी और संस्कृत में शिक्षक जगदीश पांडे ने सहयोग किया।
इंजीनियर बनकर माता-पिता को हर सुख देना ही विवेक का उद्देश्य
उधर, मोहल्ला कटोराताल निवासी कैलाश चंद्र उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज में अस्थायी चतुर्थ श्रेणी कर्मी है। बड़े पुत्र यश दिवाकर ने 12वीं में 79, पुत्री ज्योति दिवाकर ने 78, छोटे पुत्र विवेक कुमार दिवाकर ने इसी स्कूल में पढ़ते हुए 97.4 प्रतिशत से अंकों के साथ हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की है।
तीन बच्चों की पढ़ाई और घर चलाने के लिए उनकी पगार पूरी नहीं पड़ती थी। विवेक ने बताया कि उन सभी भाई-बहनों को आगे बढ़ाने के लिए माता शीला देवी को लोगों के घरों में खाना बनाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इंजीनियर बनकर माता-पिता को हर सुख देना ही उनका उद्देश्य है।