उफल्डा की 'लक्ष्मी' ने कराई गांव में धनवर्षा
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श्रीनगर के उफल्डा की निवर्तमान ग्राम प्रधान लक्ष्मी रावत गांव के लिए वास्तव में लक्ष्मी साबित हो रही है।
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केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गौरव ग्राम के तहत गांव के विकास के लिए 10 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं।
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अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो चुकी प्रधान की सीट के चलते इस बार लक्ष्मी ग्राम प्रधान तो न बन सकेगी, लेकिन जाते-जाते गांव के लिए एक और तोहफा दे गई।
उफल्डा राष्ट्रीय गौरव ग्राम घोषित
पंचायती राज विभाग के केंद्रीय कार्यालय स्थित वरिष्ठ मीडिया सलाहकार उमा देवी ने बताया कि राष्ट्रीय गौरव ग्राम के लिए प्रदेश सरकार को कम से कम तीन नाम भेजने थे।
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केंद्र सरकार की ओर से चिह्नित बिंदुओं पर हुए कार्यों को आधार मानते हुए राज्य सरकार को ही प्रत्येक ग्राम सभा के लिए अंक भी देने थे।
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उत्तराखंड से इस सूची में पांच नाम दिए गए थे, जिसमें से सर्वाधिक 95 अंक पाने वाली उफल्डा ग्राम पंचायत को राष्ट्रीय गौरव ग्राम घोषित कर दिया गया था।
गांव को मिला 10 लाख रुपए का पुरस्कार
केंद्र सरकार की ओर से उफल्डा गांव में हुए विकास कार्यों को मूल्यांकन कर सही पाया है। उन्होंने बताया कि इसी आधार पर राष्ट्रीय गौरव ग्राम उफल्डा को 10 लाख रुपए की धनराशि पुरस्कार स्वरूप विकास कार्यों के लिए दी जा रही है।
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प्रदेश के पंचायती राज विभाग को भी इसकी सूचना भेज दी गई है। प्रदेश सरकार की ओर से हरिद्वार के शफीपुर, बागेश्वर के कफलडडुंगा, नैनीताल के घुणा और पिथौरागढ़ के सतगढ़ ग्राम पंचायत को भी शामिल किया गया था।
पति के साथ से मिला यह सौभाग्य
निवर्तमान प्रधान लक्ष्मी का कहना है कि पांच साल तक विकास कार्य करने के लिए पति का साथ मिलने से ही गांव इस पुरस्कार का हकदार बना है।
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लक्ष्मी से पहले उनके पति रमेश रावत उफल्डा के ग्राम प्रधान रहे। उनके कार्यकाल में गांव को निर्मल ग्राम पुरस्कार मिल चुका है।
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रमेश रावत की ईमानदारी को देखते हुए ग्रामवासियों ने लक्ष्मी को वर्ष 2007 में पंचायत चुनावों में निर्विरोध ग्राम प्रधान चुना।
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लक्ष्मी कहती हैं कि कदम-कदम पर पति ने साथ तो दिया, लेकिन ईमानदारी का दीया दिखाकर। वह देशभर के श्रेष्ठ ग्राम सभा में चयन होने का श्रेय सरकार की योजनाओं, पति के साथ और ग्राम सभा के लोगों को देती हैं।
सालभर में होती थी छह से सात बैठक
राष्ट्रीय गौरव ग्राम की कसौटी को पार करने के लिए सर्वाधिक अंक का सवाल प्रतिवर्ष ग्राम सभा की कम से कम चार बैठकों का अनिवार्य रूप से होना था, लेकिन लक्ष्मी के गांव में हर साल छह से सात आम बैठकें हुई।
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जिसमें गांव की समस्याओं और विकास केंद्रित सवालों पर कैसे कार्य किया जाएगा, इसकी रूपरेखा तैयार की जाती थी।
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जिस विभाग से भी विकास कार्य के लिए बजट मिलता, तो गांव के लोगों की आम बैठक में ही तय किया जाता कि यह बजट कैसे और कहां खर्च किया जाएगा।
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केंद्र सरकार से उफल्डा गांव को 10 लाख रुपए दिए जाने संबंधी ई-मेल प्राप्त हो चुका है। यह धनराशि ग्राम सभा के खाते में ही पहुंचेगी।
- नरेंद्र सिंह रावत, सहायक विकास अधिकारी पंचायत पौड़ी