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देहरादून: वन विभाग में अफसर बनाकर ठगी करने वाले दो दोस्त गिरफ्तार

Thu, 13 Feb 2020 08:59 AM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Thu, 13 Feb 2020 08:59 AM IST
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Two friends arrested for cheating by becomig as forest officers
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

साइबर थाना पुलिस ने वन विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले दो दोस्तों को गिरफ्तार किया है। दोनों खुद को वन विभाग में अफसर बताते थे। आरोप है कि इन लोगों ने बेरोजगारों से करीब 25 लाख रुपये से अधिक की वसूली की है। आरोपियों ने कुमाऊं और गढ़वाल के युवकों को वन विभाग में ट्रेनिंग भी दिलाई थी। तलाशी में इनके पास से काफी संख्या में जाली नियुक्तिपत्र और वन विभाग के फर्जी लेटरपैड बरामद हुए हैं।

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स्पेशल टास्क फोर्स की पुलिस उप महानिरीक्षक रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि साइबर थाने को छह दिन पहले शिकायत मिली थी कि कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से वन विभाग उत्तराखंड में विभिन्न पदों पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर बेरोजगारों को ठग रहे हैं। इस मामले में वन विभाग के अधिकारी की तरफ से मुकदमा दर्ज कर इंस्पेक्टर पंकज पोखरियाल को विवेचना सौंपी गई। विवेचना के दौरान पता चला कि बेरोजगारों को नमामी गंगे, उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन और वन विभाग में वन बीट अधिकारी, वन दरोगा, लोअर डिविजन क्लर्क, अकाउंटेंट आदि पदों पर भर्ती का प्रलोभन दिया जा रहा है।
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आरोपी खुद को वन विभाग में बड़े पदों पर आसीन बताकर बेरोजगारों से तीन से पांच लाख रुपये वसूल रहे हैं। पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद सरगना सुमितानन्द भट्ट निवासी ग्राम ककोला, रुद्रप्रयाग (हाल निवासी अजबपुर खुर्द नेहरू कालोनी) को गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि तलाशी में आरोपी से वन विभाग में विभिन्न पदों के नियुक्तिपत्र, वन विभाग के फर्जी लेटरपैड, शैक्षिक प्रमाणपत्र, विभिन्न बैंकों के खातों से संबंधित चैक बुक, एटीएम कार्ड, डोंगल, रबर मुहर आदि बरामद हुए।
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बताया कि इस धंधे में पौड़ी गढ़वाल निवासी विक्की सिंह राणा भी शामिल है, जिसने वानिकी में मास्टर डिग्री हासिल कर रखी है। उसे वन विभाग के बारे में अच्छी जानकारी है। साइबर थाना पुलिस ने इसी आधार पर विक्की सिंह राणा निवासी अमकोटी पौड़ी गढ़वाल (हाल निवासी ढालवाला, थाना मुनिकीरेती) को ऋषिकेश से गिरफ्तार किया।

खुद को प्रमुख और सहायक वन रक्षक बताते थे आरोपी

डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि आरोपी खुद को वन विभाग में प्रमुख वन संरक्षक और सहायक वन संरक्षक बताते थे। आरोपियों ने अपनी गाड़ियों के लिये भी नेम प्लेट भी बना रखी थी। नेम प्लेट पर वन विभाग का लोगो और एसीए मुख्यालय देहरादून लिखा है। आरोपी नेम प्लेट का प्रयोग गढ़वाल के पहाड़ी जिलों में भर्ती के नाम पर ठगी करने के लिए करते थे । आरोपियों ने दर्जनाें बेरोजगारों से नौकरी के नाम पर ठगी कर 25 लाख रुपये से अधिक वसूलने की बात स्वीकार की है।

बेरोजगारों को फंसाने को बनाया ग्रुप
देहरादून। आरोपियों ने बेरोजगारों को जाल में फं साने को व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा था। सुमितानंद और विक्की राणा ने ही ग्रुप में अपने कई-कई नंबर जोड़ रखे थे। इन्हीं नंबरों के माध्यम से वह ग्रुप में विश्वास जमाने को झूठे संदेश जारी करते थे। बाद में बेरोजगारों को इस ग्रुप से जोड़ लेते थे। ग्रुप में बातें सुनकर बेरोजगार उन पर विश्वास कर लेते थे।

कई बेरोजगारों को दिया वेतन
देहरादून। एसटीएफ के सीओ अंकुश शर्मा ने बताया कि इन लोगों ने काफी बेरोजगारों को वन विभाग में ट्रेनिंग भी दिलाई थी। जिन बेरोजगारों ने नौकरी ना मिलने पर दबाव बनाया तो इन ठगों ने उन्हें अपने स्तर से ही कई माह तक 15 से 18 हजार रुपये का वेतन भी दिया। साथ ही आश्वासन दिया था कि जल्द ही वन विभाग में उनकी ज्वाइनिंग हो जाएगी।

पुलिस टीम को पुरस्कार
डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल ने टीम में शामिल सीओ अंकुश शर्मा, इंस्पेक्टर पंकज पोखरियाल, उप निरीक्षक राजेश ध्यानी, मुख्य आरक्षी सुरेश कुमार, आरक्षी श्रवण कुमार, मोहम्मद उस्मान, आकाश कौशिक, सुरेन्द्र कुमार और कुलदीप रौतेला को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।

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