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व्हाट्एप की डीपी पर जज की फोटो लगाकर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार
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व्हॉट्सएप की डीपी पर सुप्रीम कोर्ट के जज और राष्ट्रपति की फोटो लगाकर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के दो शातिरों को पुलिस ने नोएडा से गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को देहरादून में एक जमीन खाली करवाने का काम मिला था। इसके लिए उन्होंने खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर सचिवालय में एक वरिष्ठ आईएएस से मुलाकात की थी। आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
शनिवार को एसटीएफ के एसआई दिलबर सिंह नेगी ने नगर कोतवाली में सूचना दी कि एक साइबर गिरोह सुप्रीम कोर्ट के जज और राष्ट्रपति की फोटो व्हॉट्सएप की डीपी पर लगाकर केंद्र, राज्य सरकार के मंत्रालयों, वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभाव में लेकर आम लोगों से काम करवाने के एवज में ठगी की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस कप्तान डीआईजी जन्मेजय खंडूड़ी ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर गिरोह के पर्दाफाश के लिए टीमों का गठन किया गया। जांच में पता चला कि नोएडा और दिल्ली के आसपास एक ऐसा गिरोह सक्रिय है।
पुलिस को एक संदिग्ध मोबाइल नंबर मिला, जो मनोज कुमार के नाम पर रजिस्टर्ड है। कुछ दिन पूर्व इस नंबर से चलने वाले व्हॉट्सएप की डीपी पर सुप्रीम कोर्ट के जज की फोटो लगाकर खुद को जज बताते हुए शासन में तैनात एक वरिष्ठ आईएएस से काम कराने के लिए फोन और मैसेज किया गया था। छह जुलाई को दो व्यक्ति जज बनकर दो महिलाओं और एक अन्य व्यक्ति के साथ सचिवालय में आईएएस से मिले थे। इसके बाद संदिग्ध नंबरों के संबंध में जानकारी जुटाकर नोएडा में मुखबिरों और अन्य माध्यमों से गिरोह के बारे में सूचनाएं एकत्र की गईं।
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रविवार को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने नोएडा सेक्टर 50 स्थित महागुन मेपल सोसाइटी में दबिश दी। वहां दो व्यक्ति मिले। दोनों के मोबाइल चेक करने पर कई मंत्रालयों और वीआईपी के नंबर सेव मिले। उनसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को न्यायमूर्ति के नाम से मैसेज किए गए थे। पुलिस ने मोबाइल और सिम कार्ड को कब्जे में लेकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी पहचान मनोज कुमार निवासी 110 महागुन मेपल सेक्टर-50, नोएडा और राजीव निवासी बरनाला, पंजाब के रूप में हुई।
देहरादून में महिला ने दिया था जमीन खाली करवाने का काम
डीआईजी के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि देहरादून में उनकी मुलाकात एक महिला से हुई। उसने एक क्लाइंट की जमीन खाली करवाने का काम दिया। काम होने पर 50 लाख रुपये देने का वादा किया। लालच में आकर मनोज कुमार ने नया सिम कार्ड खरीदा और साथी राजीव अरोड़ा के साथ उस नंबर को ट्रू कॉलर में सुप्रीम कोर्ट के जज के नाम से फीड किया। इसके बाद दोनों देहरादून पहुंचे और एक से छह जुलाई तक यहीं रुके। इस दौरान उनकी मुलाकात दो व्यक्तियों से हुई। दोनों जमीन खाली करवाना चाह रहे थे। उन्होंने दोनों को काम करवाने के लिए उत्तराखंड शासन में तैनात वरिष्ठ आईएएस से मिलवाने की बात कही। ट्रू कॉलर में फीड किए गए फर्जी नंबर से उन्होंने आईएएस को मैसेज किया। इसके बाद खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर व्यक्तियों के साथ उनसे मिलने सचिवालय गए।
फर्जी कागज तैयार कर लोगों को विदेश भेजता था मनोज
डीआईजी ने बताया कि पूछताछ में आरोपी मनोज ने बताया गया कि वह और राजीव अरोड़ा बचपन के दोस्त हैं। उसने दिल्ली मॉडल स्कूल, लाजपत नगर से 12वीं पास करने के बाद मोदी रबर लिमिटेड में पांच साल तक क्वांटिटी कंट्रोलर की नौकरी की, लेकिन पर्याप्त पैसा नहीं मिलने के कारण लोगों को विदेश भेजने के नाम पर पासपोर्ट और वीजा का कार्य भी किया। फर्जी कागजात तैयार कर लोगों को विदेश भेजता था। फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर उसके खिलाफ चाणक्यपुरी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद एंबेसी में वीजा लगाने के लिए फर्जी कागज का इस्तेमाल करने के आरोप में कई और मुकदमे भी दर्ज हुए। वह कई बार जेल भी गया।
850 करोड़ की टैक्स चोरी में भी गया था जेल
पूछताछ में मनोज ने बताया कि वर्ष 2015 के आसपास उसने पुरवाई पान मसाला प्राइवेट लिमिटेड और पूर्वी प्रोडक्शन के नाम से कंपनियां खोली और व्यवसाय शुरू किया। वर्ष 2017 में आयकर विभाग ने सेंट्रल एक्साइज टैक्स न देने पर करीब 265 करोड़ रुपये टैक्स चोरी और पेनल्टी सहित कुल 850 करोड़ रुपये का टैक्स लगा दिया। टैक्स न भरने पर उसे जेल जाना पड़ा। वर्ष 2020 तक वह मेरठ जेल में बंद रहा। बाहर आने के बाद उसकी आर्थिक हालत नाजुक हो गई। तब उसने अपने दोस्त राजीव अरोड़ा के साथ मंत्रियों और जजों के नाम पर लोगों को ठगने व काम कराने के एवज में पैसा लेना शुरू कर दिया।
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शनिवार को एसटीएफ के एसआई दिलबर सिंह नेगी ने नगर कोतवाली में सूचना दी कि एक साइबर गिरोह सुप्रीम कोर्ट के जज और राष्ट्रपति की फोटो व्हॉट्सएप की डीपी पर लगाकर केंद्र, राज्य सरकार के मंत्रालयों, वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभाव में लेकर आम लोगों से काम करवाने के एवज में ठगी की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस कप्तान डीआईजी जन्मेजय खंडूड़ी ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर गिरोह के पर्दाफाश के लिए टीमों का गठन किया गया। जांच में पता चला कि नोएडा और दिल्ली के आसपास एक ऐसा गिरोह सक्रिय है।
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पुलिस को एक संदिग्ध मोबाइल नंबर मिला, जो मनोज कुमार के नाम पर रजिस्टर्ड है। कुछ दिन पूर्व इस नंबर से चलने वाले व्हॉट्सएप की डीपी पर सुप्रीम कोर्ट के जज की फोटो लगाकर खुद को जज बताते हुए शासन में तैनात एक वरिष्ठ आईएएस से काम कराने के लिए फोन और मैसेज किया गया था। छह जुलाई को दो व्यक्ति जज बनकर दो महिलाओं और एक अन्य व्यक्ति के साथ सचिवालय में आईएएस से मिले थे। इसके बाद संदिग्ध नंबरों के संबंध में जानकारी जुटाकर नोएडा में मुखबिरों और अन्य माध्यमों से गिरोह के बारे में सूचनाएं एकत्र की गईं।
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रविवार को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने नोएडा सेक्टर 50 स्थित महागुन मेपल सोसाइटी में दबिश दी। वहां दो व्यक्ति मिले। दोनों के मोबाइल चेक करने पर कई मंत्रालयों और वीआईपी के नंबर सेव मिले। उनसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को न्यायमूर्ति के नाम से मैसेज किए गए थे। पुलिस ने मोबाइल और सिम कार्ड को कब्जे में लेकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी पहचान मनोज कुमार निवासी 110 महागुन मेपल सेक्टर-50, नोएडा और राजीव निवासी बरनाला, पंजाब के रूप में हुई।
देहरादून में महिला ने दिया था जमीन खाली करवाने का काम
डीआईजी के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि देहरादून में उनकी मुलाकात एक महिला से हुई। उसने एक क्लाइंट की जमीन खाली करवाने का काम दिया। काम होने पर 50 लाख रुपये देने का वादा किया। लालच में आकर मनोज कुमार ने नया सिम कार्ड खरीदा और साथी राजीव अरोड़ा के साथ उस नंबर को ट्रू कॉलर में सुप्रीम कोर्ट के जज के नाम से फीड किया। इसके बाद दोनों देहरादून पहुंचे और एक से छह जुलाई तक यहीं रुके। इस दौरान उनकी मुलाकात दो व्यक्तियों से हुई। दोनों जमीन खाली करवाना चाह रहे थे। उन्होंने दोनों को काम करवाने के लिए उत्तराखंड शासन में तैनात वरिष्ठ आईएएस से मिलवाने की बात कही। ट्रू कॉलर में फीड किए गए फर्जी नंबर से उन्होंने आईएएस को मैसेज किया। इसके बाद खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर व्यक्तियों के साथ उनसे मिलने सचिवालय गए।
फर्जी कागज तैयार कर लोगों को विदेश भेजता था मनोज
डीआईजी ने बताया कि पूछताछ में आरोपी मनोज ने बताया गया कि वह और राजीव अरोड़ा बचपन के दोस्त हैं। उसने दिल्ली मॉडल स्कूल, लाजपत नगर से 12वीं पास करने के बाद मोदी रबर लिमिटेड में पांच साल तक क्वांटिटी कंट्रोलर की नौकरी की, लेकिन पर्याप्त पैसा नहीं मिलने के कारण लोगों को विदेश भेजने के नाम पर पासपोर्ट और वीजा का कार्य भी किया। फर्जी कागजात तैयार कर लोगों को विदेश भेजता था। फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर उसके खिलाफ चाणक्यपुरी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद एंबेसी में वीजा लगाने के लिए फर्जी कागज का इस्तेमाल करने के आरोप में कई और मुकदमे भी दर्ज हुए। वह कई बार जेल भी गया।
850 करोड़ की टैक्स चोरी में भी गया था जेल
पूछताछ में मनोज ने बताया कि वर्ष 2015 के आसपास उसने पुरवाई पान मसाला प्राइवेट लिमिटेड और पूर्वी प्रोडक्शन के नाम से कंपनियां खोली और व्यवसाय शुरू किया। वर्ष 2017 में आयकर विभाग ने सेंट्रल एक्साइज टैक्स न देने पर करीब 265 करोड़ रुपये टैक्स चोरी और पेनल्टी सहित कुल 850 करोड़ रुपये का टैक्स लगा दिया। टैक्स न भरने पर उसे जेल जाना पड़ा। वर्ष 2020 तक वह मेरठ जेल में बंद रहा। बाहर आने के बाद उसकी आर्थिक हालत नाजुक हो गई। तब उसने अपने दोस्त राजीव अरोड़ा के साथ मंत्रियों और जजों के नाम पर लोगों को ठगने व काम कराने के एवज में पैसा लेना शुरू कर दिया।