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Dehradun News: वन कर्मियों से अभद्रता के मामले में दो आरोपी दोषमुक्त

Sun, 23 Aug 2026 02:51 AM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Updated Sun, 23 Aug 2026 02:51 AM IST
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Two accused acquitted in case of misconduct towardsTwo accused acquitted in case of misconduct towards
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विकासनगर अभिषेक कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने वन विभाग की टीम से अभद्रता, मारपीट, सरकारी काम में बाधा डालने और धमकी देने के आठ साल पुराने मामले में दो आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में भारी विरोधाभास है और वह आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।
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घटना 28 जून 2016 की है। अभियोजन के अनुसार, उप प्रभागीय वनाधिकारी सहसपुर और वन क्षेत्राधिकारी आनंद सिंह रमोला राजावाला-बाड़वाला क्षेत्र में निरीक्षण करने गए थे। आरोप था कि वहां विद्युत भवन निवासी संदीप कौशिक जेसीबी से जमीन का समतलीकरण करा रहे थे। इस दौरान पूर्व में काटे गए साल के पेड़ों के ठूंठों को खुर्द-बुर्द किया जा रहा था। जब वन विभाग की टीम ने जेसीबी को कब्जे में लेने की कोशिश की, तो संदीप कौशिक, ग्राम अंबाड़ी निवासी जमाल खां और अन्य लोगों ने विरोध करते हुए टीम से गाली-गलौज व मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी दी।
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गवाही में खुली पोल, नहीं मिले स्वतंत्र गवाह
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने अपने दावे को सही साबित करने के लिए नौ गवाह अदालत में पेश किए। हालांकि, जिरह के दौरान गवाहों ने स्वीकार किया कि घटनास्थल पर अधिकारियों व कर्मचारियों के जाने और लौटने का कोई सरकारी रिकॉर्ड न्यायालय में मौजूद नहीं है। इसके अलावा, न तो जेसीबी कब्जे में लेने की कोई फर्द बनाई गई और न ही खुर्द-बुर्द किए गए ठूंठों की कोई फोटो या वीडियोग्राफी रिकॉर्ड पर मिली। सबसे बड़ी बात यह रही कि मामले में कोई स्वतंत्र गवाह भी पेश नहीं किया जा सका।
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इन साक्ष्यों के अभाव और घटना के दो दिन बाद मुकदमा दर्ज होने की लेट-लतीफी को अदालत ने संदिग्ध माना। पर्याप्त प्रमाण न मिलने पर अदालत ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
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