उत्तराखंडः पुल हुआ धराशायी, चीन सीमा पर भारतीय सेना का संपर्क टूटा
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जोशीमठ-मलारी नेशनल हाईवे पर सुराईथोटा में धौली गंगा पर बना मोटर पुल उस वक्त धराशायी हो गया, जब वहां से बीआरओ का लोडेड ट्रक गुजर रहा था। इससे चीन सीमा पर भारतीय सेना का संपर्क टूट गया है।
हादसे में बीआरओ के तीन मजदूर बाल-बाल बचे। पुल गिरने से सीमा क्षेत्र तक सेना और आईटीबीपी के जवानों की आवाजाही बाधित हो गई है, साथ ही नीती घाटी के 14 गांव भी घाटी में ही कैद हो गए हैं। बीआरओ के कमांडर आर सुब्रमण्यम ने दो दिनों के भीतर पुल को आवाजाही लायक बना देने का दावा किया है।
वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद भारत-चीन सीमा पर स्थित नीती घाटी को यातायात से जोड़ने के लिए जोशीमठ-मलारी नेशनल हाईवे का निर्माण किया गया था। तभी यह पुल भी बनाया गया था। चीन सीमा पर मुस्तैद सेना और आईटीबीपी के जवान यहीं से आवाजाही करते हैं।
ग्रामीणों की आवाजाही का भी यह एकमात्र मार्ग
नीती घाटी की ग्राम पंचायत लौंग, जुम्मा, फाक्ती, झेलम, कोसा, द्रोणागिरी, कागा, तमक, मलारी, महरगांव, फरकिया, बांपा, गमशाली और नीती गांवों के ग्रामीणों की आवाजाही का भी यह एकमात्र मार्ग है।
मंगलवार को दोपहर बारह बजे बीआरओ का दस टायरा ट्रक सड़क डामर का कच्चा माल लेकर पुल से गुजर रहा था, पुल ट्रक का भार नहीं झेल पाया और ट्रक सहित भरभरा कर गिर गया। ट्रक में बीआरओ के तीन मजदूर भी सवार थे। सभी मजदूर बाल-बाल बचे।
बता दें कि यह पुल लंबे समय से जीर्ण-शीर्ण बना हुआ है। बीआरओ द्वारा वर्ष 2008 में यहां नए पुल का निर्माण कार्य शुरू किया गया, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते यह पुल आज तक नहीं बनाया जा सका है। वर्तमान तक भी पुल नहीं बन पाया है।
पुल की पिछले दिनों जांच भी की गई थी, लेकिन पुल में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं पाई गई। अब पुल क्षतिग्रस्त होने के कारणों का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त कर दो दिन में आवाजाही सुचारु करवा दी जाएगी।
- आर सुब्रमण्यम, कमांडर, बीआरओ, जोशीमठ