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हरिद्वार-देहरादून के बीच 100 किमी की गति से दौड़ी ट्रायल ट्रेन
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देहरादून। हरिद्वार से देहरादून के बीच ट्रेनों को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से संचालित किए जाने को लेकर रविवार को ट्रायल किया। इस दौरान ट्रेन हरिद्वार से देहरादून के बीच 100 किलोमीटर की गति दौड़ाई गई। ट्रायल के दौरान ओशिलेशन मॉनिटरिंग सिस्टम (ओएमएस) के जरिए 100 किलोमीटर की रफ्तार से संचालित करने पर रेल पटरियों की क्षमता आदि बारीकियां परखी गईं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक ट्रायल सफल रहा है।
बता दें, पिछले दिनों उत्तर रेलवे के संरक्षा आयुक्त ने हरिद्वार से देहरादून के बीच 100 किलोमीटर की गति से ट्रेनों के संचालन को लेकर हरी झंडी दे दी थी। इतना ही नहीं रायवाला से ऋषिकेश के बीच भी ट्रेनों को 100 किलोमीटर की गति से संचालित किया जाना है। इसी के मद्देनजर उत्तर रेलवे और मंडल मुख्यालय के निर्देश पर बरेली से आई विशेष ट्रेन के जरिए ट्रायल किया गया। इस दौरान हरिद्वार से देहरादून के बीच 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ट्रेन संचालित करने को लेकर जरूरतें परखी गईं।
रेल पथ निरीक्षक विक्रम सिंह के मुताबिक फिलहाल ट्रायल सफल रहा है। राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेन 55 किलोमीटर की गति से ही चलाई गई। हरिद्वार से देहरादून के बीच ट्रायल करने के बाद रायवाला से लेकर ऋषिकेश के बीच किया गया ट्रायल भी सफल रहा।
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टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गति पर सहमति नहीं
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेनों को रात 10 से लेकर सुबह छह बजे तक ट्रेनों को 35 किलोमीटर प्रति घंटे से संचालित किए जाने की सहमति बनी है। जन शताब्दी जैसी ट्रेनों को दिन में 55 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से टाइगर रिजर्व क्षेत्र में संचालित करने को निर्णय लिया गया है। राजाजी टाइगर रिजर्व निदेशक डीके सिंह का कहना है कि दिन हो या रात टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेनों की अधिकतम गति 35 किलोमीटर निर्धारित की गई है और यदि ट्रेनों के लोको पायलट द्वारा 35 किलोमीटर से अधिक गति से ट्रेनों का संचालन किया गया और ट्रेनों की चपेट में आकर हाथी, बाघ, तेंदुआ या अन्य वन्यजीवों की मौत होती है तो ऐसे में लोको पायलट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
30 से अधिक हाथियों की हो चुकी है मौत
एलीफेंट टास्क फोर्स (ईटीएफ) और राजाजी टाइगर रिजर्व के आंकड़ों पर नजर डालें तो हरिद्वार- देहरादून के बीच तेज रफ्तार ट्रेनों की चपेट में आकर पिछले दो दशक के भीतर 30 से अधिक हाथियों की जान जा चुकी है। इनमें कई बच्चे भी शामिल हैं। यह आंकड़ा तो सिर्फ हाथियों का है। इसके अलावा कई बार तेंदुए, हिरण, काकड़, सांभर समेत कई अन्य वन्यजीव भी ट्रेनों की चपेट में आकर अपनी जान गवां चुके हैं। ट्रेनों की चपेट में आकर हाथियों की मौत ना हो इसके लिए रेलवे और टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से तमाम कदम उठाए गए हैं।
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बता दें, पिछले दिनों उत्तर रेलवे के संरक्षा आयुक्त ने हरिद्वार से देहरादून के बीच 100 किलोमीटर की गति से ट्रेनों के संचालन को लेकर हरी झंडी दे दी थी। इतना ही नहीं रायवाला से ऋषिकेश के बीच भी ट्रेनों को 100 किलोमीटर की गति से संचालित किया जाना है। इसी के मद्देनजर उत्तर रेलवे और मंडल मुख्यालय के निर्देश पर बरेली से आई विशेष ट्रेन के जरिए ट्रायल किया गया। इस दौरान हरिद्वार से देहरादून के बीच 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ट्रेन संचालित करने को लेकर जरूरतें परखी गईं।
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रेल पथ निरीक्षक विक्रम सिंह के मुताबिक फिलहाल ट्रायल सफल रहा है। राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेन 55 किलोमीटर की गति से ही चलाई गई। हरिद्वार से देहरादून के बीच ट्रायल करने के बाद रायवाला से लेकर ऋषिकेश के बीच किया गया ट्रायल भी सफल रहा।
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टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गति पर सहमति नहीं
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेनों को रात 10 से लेकर सुबह छह बजे तक ट्रेनों को 35 किलोमीटर प्रति घंटे से संचालित किए जाने की सहमति बनी है। जन शताब्दी जैसी ट्रेनों को दिन में 55 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से टाइगर रिजर्व क्षेत्र में संचालित करने को निर्णय लिया गया है। राजाजी टाइगर रिजर्व निदेशक डीके सिंह का कहना है कि दिन हो या रात टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेनों की अधिकतम गति 35 किलोमीटर निर्धारित की गई है और यदि ट्रेनों के लोको पायलट द्वारा 35 किलोमीटर से अधिक गति से ट्रेनों का संचालन किया गया और ट्रेनों की चपेट में आकर हाथी, बाघ, तेंदुआ या अन्य वन्यजीवों की मौत होती है तो ऐसे में लोको पायलट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
30 से अधिक हाथियों की हो चुकी है मौत
एलीफेंट टास्क फोर्स (ईटीएफ) और राजाजी टाइगर रिजर्व के आंकड़ों पर नजर डालें तो हरिद्वार- देहरादून के बीच तेज रफ्तार ट्रेनों की चपेट में आकर पिछले दो दशक के भीतर 30 से अधिक हाथियों की जान जा चुकी है। इनमें कई बच्चे भी शामिल हैं। यह आंकड़ा तो सिर्फ हाथियों का है। इसके अलावा कई बार तेंदुए, हिरण, काकड़, सांभर समेत कई अन्य वन्यजीव भी ट्रेनों की चपेट में आकर अपनी जान गवां चुके हैं। ट्रेनों की चपेट में आकर हाथियों की मौत ना हो इसके लिए रेलवे और टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से तमाम कदम उठाए गए हैं।