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वृक्षमानव विशेश्वर दत्त सकलानी का निधन, 50 लाख पेड़ लगाकर प्रकृति को समर्पित किया जीवन  

Sat, 19 Jan 2019 10:10 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंबा (टिहरी)
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंबा (टिहरी) Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 19 Jan 2019 10:10 AM IST
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Tree Man Vishweshwar Dutt Saklani passed away
विश्वेश्वर दत्त सकलानी

वृक्ष माता-पिता हैं, हमारी संतान हैं, हमारे सगे साथी हैं, का नारा देने वाले वृक्षमानव विश्वेश्वर दत्त सकलानी नहीं रहे। इस पहाड़ के मांझी ने 50 लाख से अधिक पेड़ लगाकर अपना पूरा जीवन प्रकृति को समर्पित कर दिया था।

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उन्होंने बांज, बुरांश, सेमल, देवदार का घना जंगल तैयार कर सकलाना क्षेत्र के बंजर इलाके की तस्वीर बदल दी। इसी का नतीजा है कि आज भी क्षेत्र में प्राकृतिक जल धाराएं ग्रामीणों की प्यास बुझा रही हैं। 
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सकलाना पट्टी के पुजार गांव में जन्मे वृक्ष ऋषि विशेश्वर दत्त सकलानी का जन्म दो जून 1922 को हुआ। बचपन से ही बाप-दादा की पर्यावरण संरक्षण की कहानियां सुनकर विशेश्वर दत्त को प्रकृति प्रेम की प्रेरणा मिली।

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यही कारण है कि उन्होंने आठ साल की छोटी सी उम्र से पेड़ लगाने शुरू कर दिए। उन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में भी बढ़-चढ़कर योगदान दिया। देश की आजादी की खातिर उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा।

उनकी कड़ी मेहनत के बाद सकलाना घाटी की तस्वीर बदल गई। दरअसल, छह-सात दशक पूर्व तक यह पूरा इलाका वृक्ष विहीन था। धीरे-धीरे उन्होंने बांज, बुरांश, सेमल, भीमल और देवदार के पौधे लगाना शुरू किया।

पुजार गांव में बांज, बुरांश का मिश्रित सघन खड़ा जंगल आज भी उनके परिश्रम की कहानी को बयां कर रहा है। विशेश्वर दत्त सकलानी को 19 नवंबर 1986 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्ष मित्र पुरस्कार से भी सम्मानित किया था।

वृक्षमानव सकलानी का सपना था कि प्रत्येक आदमी पेड़ों को अपने जीवन के तुल्य माने और उनकी रक्षा करे। उनका संदेश था कि जीवन के तीन महत्वपूर्ण मौकों जन्म, विवाह और मृत्यु पर एक पेड़ जरूर लगाएं।

शुक्रवार सुबह विशेश्वर दत्त सकलानी ने अपने घर में अंतिम सांस ली। उनके अचानक से चले जाने पर क्षेत्र के प्रकृति प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार को ऋषिकेश स्थित घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।  

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