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अपने 'चहेतों' की कार नहीं चला सकेंगे अफसर

Thu, 10 Oct 2013 12:29 PM IST
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 10 Oct 2013 12:29 PM IST
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Transportation Department in charge of government departments vehicle

अब उत्तराखंड में अफसर अपने चहेतों को लाभ नहीं पहुंचा सकेंगे। सरकारी विभागों में वाहन अनुबंध प्रक्रिया की कमान अब परिवहन विभाग खुद संभालने वाला है।

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आरटीओ को देनी होगी पूरी जानकारी
विभागों में चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए वाहन अनुबंध करने और वाहन स्वामियों को वक्त पर भुगतान न करने की काफी शिकायतें आने के बाद यह कवायद की जा रही है।
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अब विभाग जो भी वाहन अनुबंधित करेंगे, उसकी पूरी जानकारी आरटीओ को देनी होगी।

परिवहन विभाग की अनुमति के बाद वाहन का दोबारा पंजीकरण कराया जाएगा। परिवहन विभाग ही वाहन के मेक और स्थिति के अनुरूप मासिक भाड़ा और चालक का मानदेय तय करेगा।
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हर महीने अनुबंधित वाहनों की रूटीन चेकिंग भी होगी।

डीजल देगा विभाग
अनुबंधित वाहनों के लिए डीजल/ पेट्रोल की व्यवस्था संबंधित विभाग करेंगे। अलग-अलग वाहनों के लिए आरटीओ ने प्रति किलोमीटर ईंधन खपत तय की है।

इस मानक के अनुरूप वाहन जितने किलोमीटर चलेगा, उतने लीटर ईंधन का व्यय दिया जाएगा।

रात को रुके तो मिलेगा मानदेय
अनुबंधित वाहन चालकों को अब तक रात का मानदेय देने की व्यवस्था नहीं थी।

आरटीओ की ओर से जारी नई व्यवस्था के अनुसार अगर चालकों को रात्रि ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो हर रात के हिसाब से दो सौ रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। वाहन स्वामी के जरिये यह राशि चालक को मिलेगी।

वाहन खरीदना महंगा
सरकारी विभागों में अपने वाहनों की खरीद बंद कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक नए वाहन खरीदना और फिर इनके रखरखाव, ड्राइवर का खर्चा सरकारी कोष के लिए खासा महंगा साबित हो रहा था।


ऐसे में वाहनों को अनुबंधित किया जाता है। लेकिन कुछ विभागों में एमडी से लेकर प्रवर्तन तक के वाहनों का मासिक खर्चा पांच से दस लाख रुपये तक पहुंच रहा था। इसके बाद खर्चों पर लगाम कसने के लिए यह कवायद की जा रही है।

(यह राशि कार मालिक को दी जाएगी, जिसमें से चालक का आरटीओ की ओर से तय हिस्सा उसे देना होगा)

इस प्रक्रिया से वाहन अनुबंध में विभागों में होने वाले भ्रष्टाचार पर भी लगाम कसी जा सकेगी। दूसरी ओर, सरकारी वाहन चलाने वाले ड्राइवर भी अनुशासित रहेंगे।
- संदीप सैनी, RTO

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