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स्मार्ट सिटीः गायब हो जाएगी ट्रैफिक पुलिस

Mon, 28 Oct 2013 03:42 PM IST
मनमीत रावत/अमर उजाला, देहरादून
मनमीत रावत/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 28 Oct 2013 03:42 PM IST
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traffic police will disappear soon in dehradun

पुलिस की योजना परवान चढ़ी तो जल्द ही राजधानी में हाईटेक ट्रैफिक व्यवस्था लागू हो सकेगी। इससे न सिर्फ यातायात संचालन आसान हो जाएगा, बल्कि चौराहों पर पुलिसकर्मियों की भी आवश्यकता नहीं रह जाएगी।

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यही नहीं यातायात नियम का उल्लंघन करने पर आटोमेटिक चालान हो जाएगा। योजना के लिए शासन से 75 लाख के बजट को स्वीकृति भी मिल चुकी है।

पुलिस कर्मी गायब होने वाले हैं
राजधानी के चौराहों से जल्द ही पुलिस कर्मी गायब होने वाले हैं। इसके बाद एडवांस तकनीक से लैस ट्रैफिक लाइट पूरा चौराहा ‘ऑपरेट’ करेंगे। शहर के 27 चौराहे इस प्रोजेक्ट से लाभान्वित होंगे, हालांकि पहले चरण में 16 चौराहों को इससे लैस किया जा रहा है।
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अधिकारियों की मानें तो यमुना एक्सप्रेस-वे में अभी यह तकनीक उपयोग में लाई जा रही है। इसके तहत चौराहों पर हाई सेंसिटिव ट्रैफिक लाइट और कैमरे लगाए जाएंगे।
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पुलिस कंट्रोल रूम के सर्वर रूम
सड़क के जेबरा लाइन के दोनों ओर तीन फिट के छोटे पिलर होंगे, जो एक दूसरे पर लेजर बीम फेंकेंगे। रेड लाइट होते ही लेजर बीम ऑन हो जाएगी। अगर किसी ने भी रेड लाइट क्रॉस किया तो बीम से उसे गुजरना होगा।

बीम से गुजरते ही हाई सेंसिटिव कैमरे उसकी फोटो खीच लेंगे। फोटो सीधे पुलिस कंट्रोल रूम के सर्वर रूम में जाएगी। वहां पर भी पुलिस कर्मियों की जरूरत नहीं पढ़ेगी।

चालान बनाकर प्रिंट बाहर
ऑटोमेटिक चालान मशीन खुद ही फोटो को स्कैन कर चालान बनाकर प्रिंट बाहर कर देगी। वाहन नंबर के आधार पर चालक के घर का पता भी निकाल लिया जाएगा। उसके बाद चालान को नियम तोड़ने वाले के घर पर पोस्ट कर दिया जाएगा।

एसएसपी केवल खुराना ने बताया 15 दिनों के भीतर योजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा। पहले चरण में शहर के 16 चौराहों को इससे लैस किया जाएगा। यह पूरा काम पुलिस मॉडर्ननाइजेशन के तहत होना है।


दून पुलिस खुद हुई वित्तीय सक्षम
दून पुलिस अब किसी भी काम के लिए एमडीडीए और पीडब्ल्यूडी की राह नहीं ताकेगी। दून पुलिस जो लगभग एक करोड़ रुपये का चालान शुल्क सरकारी खजाने में प्रत्येक साल जमा करती है, लेकिन इसमें से पुलिस को कुछ नहीं मिलता था। अब दून पुलिस को 75 फीसदी जो लगभग 75 लाख रुपये होगा। प्रत्येक साल आधुनिकीकरण के लिए मिलेगा।

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