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Dehradun News: टी टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कृषि मंत्री गणेश जोशी ने दिए निर्देश
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चाय की ब्रांडिंग और बिक्री को बढ़ावा देने के लिए टाटा ग्रुप जैसे समूहों से समन्वय स्थापित करें
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रदेश में चाय उत्पादन और टी टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए अधिकारियों को सुनियोजित कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने उत्तराखंड की चाय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने पर जोर दिया।
जोशी ने असम में चाय की गुणवत्ता जांच कराने और वन विभाग की रिक्त भूमि पर चाय बागान विकसित करने के भी निर्देश दिए। इससे उत्तराखंड के युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। राजकीय उद्यानों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में टी टूरिज्म को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मंत्री ने चाय की ब्रांडिंग और बिक्री को बढ़ावा देने के लिए टाटा ग्रुप जैसे समूहों से समन्वय स्थापित करने को कहा। वर्तमान में नौ जनपदों में लगभग 1500 हेक्टेयर में चाय बागान हैं। इनसे करीब 7 लाख किलोग्राम हरी चाय पत्तियां और 1.50 लाख किलोग्राम प्रसंस्कृत चाय का उत्पादन होता है। चंपावत, घोड़ाखाल और कौसानी के बागानों को टी टूरिज्म से जोड़ा गया है। अब इसे व्यवस्थित रूप से औद्योगिक स्तर पर चलाने की योजना बनाई जा रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रदेश में चाय उत्पादन और टी टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए अधिकारियों को सुनियोजित कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने उत्तराखंड की चाय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने पर जोर दिया।
जोशी ने असम में चाय की गुणवत्ता जांच कराने और वन विभाग की रिक्त भूमि पर चाय बागान विकसित करने के भी निर्देश दिए। इससे उत्तराखंड के युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। राजकीय उद्यानों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में टी टूरिज्म को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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मंत्री ने चाय की ब्रांडिंग और बिक्री को बढ़ावा देने के लिए टाटा ग्रुप जैसे समूहों से समन्वय स्थापित करने को कहा। वर्तमान में नौ जनपदों में लगभग 1500 हेक्टेयर में चाय बागान हैं। इनसे करीब 7 लाख किलोग्राम हरी चाय पत्तियां और 1.50 लाख किलोग्राम प्रसंस्कृत चाय का उत्पादन होता है। चंपावत, घोड़ाखाल और कौसानी के बागानों को टी टूरिज्म से जोड़ा गया है। अब इसे व्यवस्थित रूप से औद्योगिक स्तर पर चलाने की योजना बनाई जा रही है।
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